नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में भी है परिवारवाद | दुनिया | DW | 20.03.2019
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दुनिया

नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में भी है परिवारवाद

नरेंद्र मोदी कांग्रेस पर परिवारवाद का आरोप लगाते हैं. लेकिन परिवारवाद की लिस्ट भाजपा में भी लंबी है. मोदी के मंत्रिमंडल में कई मंत्री राजनीतिक परिवारों से आते हैं.

20 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी वेबसाइट पर एक ब्लॉग लिखा. संस्थाओं का सम्मान और संस्थाओं की अवमानना- दो परस्पर विरोधी अप्रोच. जब इस ब्लॉग को उन्होंने ट्विटर पर शेयर किया तो सबसे पहली लाइन लिखी- वंशवाद की राजनीति से सबसे अधिक नुकसान संस्थाओं को हुआ है. नरेंद्र मोदी अक्सर वंशवाद के ऊपर अपनी चुनावी रैलियों में भी सवाल उठाते रहे हैं. उनके वंशवाद का आशय कांग्रेस को लेकर ही होता है.

आजादी के बाद के 71 सालों में 38 साल कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष गांधी-नेहरू परिवार से रहे हैं. जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी तीनों भारत के प्रधानमंत्री भी रहे हैं. लेकिन ऐसा नहीं है कि नरेंद्र मोदी की पार्टी भाजपा वंशवाद से अछूती रही हो. जानते हैं नरेंद्र मोदी कैबिनेट के ऐसे मंत्रियों के बारे में. पहले बात उन मंत्रियों की जो खुद राजनीतिक परिवार से आते हैं.

सुषमा स्वराज- विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की राजनीतिक दिलचस्पी की एक वजह उनके परिवार की राजनीतिक पृष्टभूमि भी है. उनके पिता बलदेव शर्मा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक और हरियाणा में राज्य स्तर के नेता रहे थे. सुषमा के पति स्वराज कौशल भी राजनीति से जुड़े रहे हैं. वो 1990 से 93 तक मिजोरम के गवर्नर और 1998 से 2004 तक राज्यसभा सांसद रहे हैं. उनकी छोटी बहन वंदना शर्मा हरियाणा में विधानसभा चुनाव भी लड़ चुकी हैं लेकिन जीत नहीं सकी थीं.

पीयूष गोयल- मोदी सरकार के सबसे तेजतर्रार मंत्रियों में गिने जाने वाले पीयूष गोयल की राजनीति को उनकी पार्टी के शब्दों में वंशवाद का परिणाम कहा जा सकता है. पीयूष की मां चंद्रकांता गोयल तीन बार विधायक रहीं और उनके पिता वेदप्रकाश गोयल अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में केंद्रीय मंत्री भी रहे थे.

निर्मला सीतारमण- निर्मला सीतारमण ने जेएनयू से पढ़ाई की. उन्होंने पराकला प्रभाकर से शादी की. पराकला का परिवार राजनीतिक परिवार है. पराकला के पिता आंध्र प्रदेश कांग्रेस के बड़े नेता थे. वो मंत्री भी रहे. उनकी मां भी विधायक रहीं. पराकला ने भी 1994 और 1996 में कांग्रेस के टिकट पर दो बार विधायक का चुनाव लड़ा पर हार गए. फिर वो भाजपा में शामिल हो गए. 1998 में नरसपुर से चुनाव लड़ा. चुनाव में उनकी हार हुई. वह आंध्र प्रदेश में टीडीपी की वर्तमान सरकार में कैबिनेट रैंक की कम्युनिकेशन एडवाइजर की पोस्ट पर थे. लेकिन टीडीपी के एनडीए का साथ छोड़ते ही उन्हें पद छोड़ना पड़ा.

रविशंकर प्रसाद- भाजपा की तरफ से आक्रामक प्रवक्ता का काम करने वाले रविशंकर प्रसाद बिहार में कर्पूरी ठाकुर सरकार में मंत्री रहे ठाकुर प्रसाद के बेटे हैं. ठाकुर प्रसाद जनसंघ के शुरुआती नेताओं में से थे. वो जनसंघ की बिहार यूनिट के अध्यक्ष भी रहे थे.

चौधरी बीरेंदर सिंह- चौधरी बीरेंदर सिंह किसान नेता सर छोटूराम के पोते हैं. बीरेंदर के पिता चौधरी नेकीराम भी पंजाब-हरियाणा की राजनीति में सक्रिय रहे. बीरेंदर सिंह 2014 तक कांग्रेस में रहे और लोकसभा चुनाव से पहले इस्तीफा देकर भाजपा में आ गए. उनकी पत्नी प्रेमलता भी हरियाणा की उचाना कलां विधानसभा से विधायक हैं.

मेनका गांधी- मेनका गांधी भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के छोटे बेटे संजय गांधी की पत्नी हैं. मेनका के पुत्र वरुण गांधी भी भाजपा से सांसद हैं. मेनका पीलीभीत और वरुण सुल्तानपुर से सांसद हैं.

राव इंद्रजीत सिंह- राव इंद्रजीत सिंह राव बीरेंदर सिंह के बेटे हैं जो पंजाब के मुख्यमंत्री रहे थे. बीरेंदर सिंह हरियाणा और पंजाब की सरकार के साथ केंद्र सरकार में भी मंत्री रहे थे.

धर्मेंद्र प्रधान- धर्मेंद्र प्रधान के पिता देबेंद्र प्रधान ओडिशा में भाजपा के बड़े नेता थे. वो अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में मंत्री भी रहे थे.

हरसिमरत कौर बादल- हरसिमरत कौर बादल सुखबीर सिंह बादल की पत्नी हैं. सुखबीर पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री रह चुके हैं, सुखबीर पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और अकाली दल के वरिष्ठ नेता प्रकाश सिंह बादल के बेटे हैं.

विजय गोयल- विजय गोयल केंद्र में मंत्री बनने से पहले दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष रहे थे. इनके पिता चरती लाल गोयल दिल्ली बीजेपी के बड़े नेता थे और दिल्ली विधानसभा के स्पीकर रहे थे.

जयंत सिन्हा- जयंत भाजपा के कद्दावर नेता और वाजपेयी सरकार में मंत्री रहे यशवंत सिन्हा के बेटे हैं. यशवंत सिन्हा ने हाल ही में भाजपा से इस्तीफा दे दिया था.

किरण रिजिजू- अरुणाचल से आने वाले किरण रिजिजू के पिता रिन्चिन खारू राजनीति में सक्रिय थे. वो अरुणाचल प्रदेश की पहली विधानसभा में प्रो-टर्म स्पीकर भी रहे थे.

अनुप्रिया पटेल- अपना दल की सांसद और मोदी सरकार में मंत्री अनुप्रिया पटेल सोनेलाल पटेल की बेटी हैं. सोनेलाल ने ही अपना दल की स्थापना की थी. उनकी एक सड़क हादसे में मौत के बाद उनकी पत्नी इस पार्टी की अध्यक्ष बनीं. इनकी बेटी अनुप्रिया अब मोदी सरकार में मंत्री हैं.

इसके बाद बारी उन मंत्रियों की जो अपने परिजनों को राजनीति में स्थापित कर रहे हैं.

राजनाथ सिंह- भारत सरकार में गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने अपना राजनीतिक मुकाम खुद हासिल किया. लेकिन अब वो अपनी विरासत को अपने पुत्र पंकज सिंह के सहारे आगे बढ़ाना चाहते हैं. पंकज उत्तर प्रदेश भाजपा के महासचिव हैं और नोएडा से विधायक भी हैं. हालांकि राजनाथ सिंह का कहना है कि उनका बेटा 2002 से भाजपा में कार्यकर्ता की तरह काम कर रहा है और 15 साल मेहनत के बाद 2017 में उसे टिकट मिला है.

नरेंद्र सिंह तोमर- मोदी सरकार में मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर अपने बेटे देवेंद्र प्रताप सिंह को राजनीति में स्थापित करने में लगे हुए हैं.  रामू भैया के नाम से पुकारे जाने वाले देवेंद्र मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान बीजेपी की तरफ से टीवी पर पार्टी का पक्ष रखते हुए कई बार दिखाई पड़े. वह स्थानीय राजनीति में काभारतफी सक्रिय हैं. फिलहाल कोई चुनाव नहीं लड़ा है लेकिन हर त्यौहार पर उनके गृहनगर में लगने वाले पोस्टर दिखाते हैं कि वो राजनीति में जगह बनाने की पुरजोर कोशिश में हैं.

रामविलास पासवान- बिहार की हाजीपुर सीट से सांसद और केंद्र में मंत्री रामविलास पासवान राजनीति में अपने परिजनों को साथ लेकर चल रहे हैं. उनके बेटे चिराग पासवान सांसद हैं. रामविलास के छोटे भाई पशुपति नाथ बिहार सरकार में मंत्री हैं. साथ ही, उनके दामाद अनिल पासवान भी राजनीति में सक्रिय हैं.

इसके अलावा टीडीपी के सांसद और 2018 तक केंद्र में मंत्री रहे अशोक गजपति राजू भी एक राजनीतिक परिवार से आते हैं. उनके पिता विजयराम गजपति आंध्र प्रदेश में कई बार विधायक और सांसद रहे थे. वो आंध्र प्रदेश सरकार में मंत्री भी रहे थे.

2018 में कैंसर के चलते जान गंवाने वाले तत्कालीन केंद्रीय मंत्री अंनत कुमार की माता गिरिजा शास्त्री जनसंघ की सक्रिय नेता थीं. वो हुबली धारवाड़ की डिप्टी मेयर भी रहीं थी. साल 2014 में एक सड़क हादसे का शिकार हुए केंद्रीय मंत्री गोपीनाथ मुंडे की दोनों बेटियां पंकजा और प्रीतमा राजनीति में सक्रिय हैं. पंकजा महाराष्ट्र सरकार में मंत्री हैं और प्रीतमा बीड़ से सांसद हैं.

मंत्रियों के अलावा राज्यों के मुख्यमंत्रियों में अरुणाचल के सीएम पेमा खांडू पूर्व सीएम दोरजी खांडू के बेटे हैं. महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडनवीस के पिता गंगाधर फडनवीस महाराष्ट्र विधानपरिषद के सदस्य रहे थे. गोवा के सीएम प्रमोद सावंत की पत्नी सुलक्षणा गोवा बीजेपी महिला मोर्चा की अध्यक्ष हैं. हाल ही में राजस्थान के मुख्यमंत्री पद से हटीं वसुंधरा राजे ग्वालियर की महारानी विजयाराजे सिंधिया की बेटी हैं जो जनसंघ के संस्थापक सदस्यों में थीं. वसुंधरा के बेटे दुष्यंत लोकसभा सांसद हैं. राजे की छोटी बहन यशोधरा राजे मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री थीं और अब वह शिवपुरी से विधायक हैं.

मंत्री और मुख्यमंत्रियों के अलावा कई नेताओं के परिवार भी राजनीति में सक्रिय हैं. विजय बहुगुणा के बेटे सौरभ बहुगुणा उत्तराखंड के सितारगंज से विधायक और विजय की बहन रीता बहुगुणा यूपी सरकार में मंत्री हैं. प्रेम कुमार धूमल के बेटे अनुराग ठाकुर हमीरपुर से सांसद हैं. प्रमोद महाजन की बेटी पूनम महाजन मुंबई उत्तर-मध्य से सांसद और कल्याण सिंह के बेटे राजबीर सिंह एटा सीट से सांसद हैं. दिल्ली के पूर्व मुख्य मंत्री और एक जमाने में बीजेपी के दिग्गज जाट नेता रहे साहिब सिंह वर्मा के बेटे प्रवेश वर्मा पश्चिमी दिल्ली से सांसद, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रह चुके रमन सिंह के बेटे अभिषेक सिंह राजनंदगांव से सांसद, कर्नाटक के विवादित नेता और पूर्व सीएम बीएस येदियुरप्पा के बेटे राघवेंद्र येदियुरप्पा शिमोगा से सांसद, उत्तर प्रदेश से आने वाले बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालजी टंडन के बेटे आशुतोष टंडन यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं.

क्षेत्रीय पार्टियों के ऊपर एक ही परिवार का कब्जा होना आम बात हो चुकी है. जैसे नेशनल कॉन्फ्रेंस पर अब्दुल्ला परिवार, पीडीपी पर मुफ्ती परिवार, समाजवादी पार्टी पर यादव परिवार, टीडीपी पर नायडू परिवार, डीएमके पर करुणानिधि परिवार, टीआरएस पर चंद्रशेखर परिवार, आरजेडी पर लालू यादव परिवार जैसे उदाहरण बहुत आम हैं.

एक इंटरव्यू में यशोधरा राजे से परिवारवाद पर मैंने सवाल पूछा था तो उन्होंने कहा था कि राजनीति में परिवारवाद का विरोध गलत है. डॉक्टर के बेटे के डॉक्टर बनने पर कोई सवाल नहीं करता जबकि वो बस पढ़ाई से ही बन जाता है. नेता बनने के लिए जनता के बीच जाना होता है. जनता तय करती है कि किसी भी परिवार से आने वाला कोई भी व्यक्ति राजनीति के काबिल है या नहीं. राजनीतिक परिवार से आने वाले लोग राजनीतिक कामकाज को तेजी से समझ लेते हैं. ऐसे में उनका राजनीति में आना बिल्कुल गलत नहीं है.

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