नजरिया: बुरा सौदा है हुआवे की जर्मनी के 5जी नेटवर्क में हिस्सेदारी | दुनिया | DW | 10.07.2019
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दुनिया

नजरिया: बुरा सौदा है हुआवे की जर्मनी के 5जी नेटवर्क में हिस्सेदारी

विदेशी मीडिया समेत विभिन्न सूचना माध्यमों को रोकने वाले देश चीन की एक कंपनी को जर्मनी के लिए 5 जी नेटवर्क स्थापित करने का मौका देने को डॉयचे वेले के महानिदेशक पेटर लिम्बुर्ग बचकाना कदम मानते हैं .

नजरिया: बुरा सौदा है हुआवे की जर्मनी के 5जी नेटवर्क में हिस्सेदारी

चीनी टेक कंपनी हुआवे चाहता है कि उसे जर्मनी में 5जी नेटवर्क स्थापित करने में हिस्सेदारी का मौका मिले. यह नई तकनीक  मोबाइल इंटरनेट की स्पीड को कहीं ज्यादा तेज कर देगी.  दूसरे शब्दों में कहें, तो एक चीनी कंपनी का लक्ष्य है जर्मनों को तेज इंटरनेट से जोड़ना.

विडंबना यह है कि उसी चीन की सरकार अपने देश के इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों को बाहर की दुनिया से काट कर रखने का हर संभव प्रयास करती आई है. वह अपनी खास तकनीकें आजमा कर चीनी लोगों को यह सब जानने से रोकती है कि जर्मनी समेत दुनिया के बाकी हिस्सों में क्या कुछ हो रहा है.

चीन: सेंसरशिप का चैंपियन

चीनी भाषा में दी जाने वाली सामग्री समेत डॉयचे वेले की सारी पेशकशों को चीन अपने यहां ब्लॉक करता है. डॉयचे वेले के पत्रकारों का चीन से हमारे लिए काम करना सरकार ने असंभव किया हुआ है. केवल मुट्ठी भर चीनी लोग ही ऐसे हैं जो कुछ खास सॉफ्टवेयर लगा कर चीन की दीवार जैसी फायरवॉल को बेध कर जर्मनी, यूरोप और बाकी दुनिया की बिना सेंसर वाली जानकारी पा सकते हैं. चीनी फायरवॉल न केवल डॉयचे वेले के कंटेट को बल्कि बीबीसी जैसे अन्य पश्चिमी मीडिया संस्थानों की चीनी भाषा में की जाने वाली रिपोर्टिंग को लोगों तक पहुंचने से रोकता है.

DW-Intendant Peter Limbourg (DW/M. Magunia)

पेटर लिम्बुर्ग, महानिदेशक, डॉयचे वेले

और देखिए कि इंटरनेट पर चीन अपनी सेंसरशिप बढ़ाता ही जा रहा है. पिछले ही हफ्ते चीन सरकार ने फ्रांकफुर्टर अलगेमाइने साइटुंग और जुइडडॉयचे साइटुंग जैसे जर्मन दैनिकों की वेबसाइट को भी अपने यहां ब्लॉक कर दिया. उनकी कम्युनिस्ट पार्टी नहीं चाहती कि चीन के मानवाधिकार मामलों पर उसे कहीं भी देखने और पढ़ने को मिले. ना ही वो चाहती है कि चीनी लोग चीन के ही हिरासत शिविरों में रखे जा रहे उइगुर मुसलमानों की दुर्दशा या तिब्बत के हालात के बारे में जानें और चर्चा करें.

दूसरी ओर, जर्मनी में चीनी चैनल देखे जा सकते हैं और चीनी पत्रकारों को भी आजादी से कहीं भी आने जाने और रिपोर्टिंग करने की पूरी आजादी है. खुद जर्मन चांसलर अंगेला मैर्केल और विदेश मंत्री हाइको मास भी कई बार चीन और जर्मनी के बीच इस बुनियादी अंतर की ओर इशारा कर चुके है. लेकिन बीजिंग ने प्रतिबंधों को हटाने की इन मांगों पर कभी ध्यान नहीं दिया. चीन का बाहरी दुनिया से सूचना के प्रवाह को अवरुद्ध करना जारी है. 

प्रेस और सूचना की आजादी पर समझौता नहीं

खुद डॉयचे वेले ने कई बार चीनी सेंसरशिप को लेकर बातचीत करने की कोशिश की है लेकिन वे बेनतीजा ही रही हैं. चीन का कहना रहा है कि "अगर आप हमारे बारे में आलोचनात्मक रिपोर्टिंग करना बंद कर देंगे तो हमारे बीच समझौता हो सकता है." लेकिन प्रेस और सूचना की आजादी पर समझौता नहीं किया जा सकता. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एक सार्वभौम मानवाधिकार है.

डॉयचे वेले का चीनी भाषा प्रोग्राम बहुत सारे मुद्दों पर रिपोर्टिंग करता है, जिसमें जर्मन संस्कृति, व्यापार और विज्ञान जैसे विषय भी शामिल हैं. इनके माध्यम से चीनी और जर्मन समाज के बीच बेहतर आपसी समझ विकसित की जा सकती है. लेकिन फिर भी चीन तब तक प्रेस की आजादी के सिद्धांत को ताक पर रखना और डॉयचे वेले की पेशकश पर रोक जारी रखेगा जब तक इसके कुछ ठोस दुष्परिणाम नहीं दिखते. शायद बीजिंग को केवल दबाव की भाषा ही समझ आती है.

कुछ लोगों का मानना है कि हुआवे एक निजी कंपनी है इसलिए उसे चीन सरकार की नीतियों के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए. लेकिन ऐसा मानने वाले शायद बहुत भोले हैं. चीन की कम्युनिस्ट पार्टी जिसे चाहे उसे नियंत्रित कर सकती है. हो सकता है कि कभी कभी उसके पास 100 फीसदी नियंत्रण ना रहता हो या राजनीति से असंबद्ध मुद्दों से नजरें फेर लेती हो, लेकिन हुआवे का मामला ऐसा कत्तई नहीं माना जा सकता. हुआवे वह कंपनी है जो जर्मनी में 5जी नेटवर्क स्थापित करने में अरबों का निवेश करना चाहती है.  उसे ऐसा करने का मौका देने से कई सुरक्षा चिंताएं जुड़ी हैं.

यह मानना तो मुश्किल है कि जर्मन या कोई और यूरोपीय टेक कंपनी अपने बल पर 5जी नेटवर्क बिछा ही नहीं सकती. हो सकता है कि घरेलू स्तर पर ऐसी क्षमता विकसित करने में इसमें थोड़ा ज्यादा समय लग जाए लेकिन जर्मन इंजीनियरिंग का विश्व ऐसे ही लोहा नहीं मानता आया है. अच्छे व्यापारिक संबंध पारस्परिक संतोष की धुरी पर बनते हैं. लेकिन अगर चीन सूचना के मुक्त बहाव को ऐसे ही रोकता रहा तो जर्मनी जैसे उदार लोकतांत्रिक समाज संतुष्ट नहीं होंगे. हमारे लिए अपने सिद्धांतों पर कायम रहना और फिलहाल हुआवे को देश में 5जी के नेटवर्क से बाहर रखना ही सही होगा. चीन को ऐसा करने देना निश्चित रूप से कोई फायदे का सौदा नहीं होगा. 

पेटर लिम्बुर्ग/आरपी

यह लेख मूल रूप से जर्मन दैनिक फ्रांकफुर्टर आलगेमाइने साइटुंग में प्रकाशित हुआ था.

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