दो नागरिकता चाहते तुर्क जर्मन | दुनिया | DW | 24.07.2013
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दुनिया

दो नागरिकता चाहते तुर्क जर्मन

जर्मनी में दोहरी नागरिकता सिर्फ अपवाद में मिलती है. इसकी वजह से तुर्क जर्मनों को मुश्किल होती है लेकिन हर कोई इस मुश्किल से अलग तरीके से निबटता है. कुछ लोग समझते हैं कि उन्हें काटा जा रहा है.

लेवेंट बायराम 39 साल के हैं. वे बर्लिन में पैदा हुए हैं. उन दिनों, 1970 के दशक में जर्मनी में पैदा होने वाले विदेशियों के बच्चों को सिर्फ अपने माता-पिता के देश की नागरिकता मिलती थी. जर्मन नागरिकता के लिए वंश का नियम लागू होता था. बायराम के पास अभी भी तुर्क नागरिकता है, क्योंकि उन्होंने जर्मन नागरिकता के लिए आवेदन नहीं दिया. जर्मन नागरिकता लेने के लिए उन्हें अपनी तुर्क नागरिकता छोड़नी होगी, लेकिन इसके लिए वे अपने दिल को नहीं मना पा रहे. "मेरे माता-पिता के देश के साथ मेरा बड़ा भावनात्मक रिश्ता है."

संस्कृति का सवाल

जर्मन-तुर्क पत्रिका में काम करने वाले सोशल मीडिया मैनेजर बायराम ने कुछ साल तुर्की में भी काम किया है. अब वे परिवार के साथ बर्लिन में रहते हैं, लेकिन तुर्क संस्कृति से वे संपर्क नहीं तोड़ना चाहते. तुर्की का पासपोर्ट उनके लिए उसका हिस्सा होने का दस्तावेज है. वे यह नहीं समझ पाते कि जर्मन कानून उन्हें नागरिकताओं में से एक चुनने को बाध्य क्यों करता है. यूरोपीय संघ के आप्रवासियों के लिए दोहरी नागरिकता मान्य है. बायराम पूछते हैं, "फिर हम तुर्कों के लिए क्यों नहीं?" और अपने को भेदभाव का शिकार समझते हैं. लेकिन उनका यह भी कहना है कि जर्मनी में उन्हें अच्छा लगता है और उनके साथ कभी बुरा बर्ताव नहीं हुआ.

Bildergalerie Doppelte Staatsbürgerschaft

लेवेंट बायराम अपने परिवार के साथ

बायराम को जर्मनी से प्यार है लेकिन वे तुर्की को भी अपना वतन समझते हैं. वे बर्लिन में भी राजनीतिक रूप से सक्रिय होना चाहते हैं. "मेरे इतने आयडिया हैं, लेकिन मैं यहां कुछ नहीं कर सकता." इसके लिए उन्हें जर्मन नागरिकता लेनी होगी. लेकिन वे दृढ़ता से कहते हैं, "लेकिन तुर्की की नागरिकता छोड़ने की कीमत पर नहीं." जर्मन नागरिकता कानून ने उनके पूरे परिवार को बांट दिया है. अब जन्मस्थान के आधार पर नागरिकता मिलती है. लेवेंट का भाई तुर्क है, बहन जर्मन है, उनकी पत्नी तुर्क है. चार साल पहले जन्मी उनकी बेटी जर्मन है, जबकि पंद्रह साल पहले तुर्की में पैदा हुआ उनका बेटा तुर्क है.

मैर्वे गुल 21 साल की है और उसकी दूसरी समस्या है. वह कानून की पढ़ाई कर रही है. जर्मनी में पैदा हुई और पली बढ़ी मैर्वे के पास नागरिकता का विकल्प है. 2000 के नागरिकता कानून के अनुसार उसे 23 साल की उम्र तक फैसला करना होगा कि उसे कौन सी नागरिकता चाहिए. जर्मन नागरिकता रखने के लिए उसे तुर्की की नागरिकता छोड़नी होगी.

तुर्की के अधिकार

लेकिन कानून की पढ़ाई कर रही मैर्वे ऐसा नहीं चाहती. वह कहती हैं, "एक नियम है जिसके अनुसार तुर्की में तुर्क नागरिकता के बिना कानूनी पेशे की इजाजत नहीं है." वह अपनी पेशेवर आजादी खोना नहीं चाहती, "मैं हर हालत में कुछ साल तुर्की में काम करना चाहती हूं." इसलिए उन्होंने दोनों नागरिकता रखने के लिए अर्जी दी है. जर्मन नागरिकता कानून में इसकी संभावना है, यदि कोई यह साबित कर सके कि नागरिकता छोड़ने पर उसे भारी आर्थिक नुकसान हो सकता है. गुल कहती हैं कि ऐसे मामलों में जरूरी होता है कि आप तटस्थ रहें, और तथ्यों को अपनी बात कहने दें.

Bildergalerie Doppelte Staatsbürgerschaft

मैर्वे गुल पहले तुर्की में काम करना चाहती हैं

सेवदा आदिगुजेल एक ऐसी स्थिति की शिकायत करती हैं, जिसका सामना बहुत से युवा जर्मन तुर्क कर रहे हैं, "तुर्की में मैं जर्मन हूं, जबकि मैं तुर्क मूल की हूं. जर्मनी में मैं तुर्क हूं, लेकिन मैं यहां जर्मन हूं." उन्हें हर जगह ऐसा महसूस होता कि वे वहां की नहीं हैं. 26 वर्षीय सेवदा कोलोन में मैनेजमेंट की पढ़ाई कर रही हैं, फर्राटे से जर्मन बोलती हैं और समाज में घुला मिला महसूस करती हैं. जर्मनी में तीसरी पीढ़ी का तुर्क होने के नाते वे इस बात को अजीबोगरीब मानती हैं कि जर्मन नागरिकता के साथ ही लोगों को समाज में घुला मिला मानते हैं. फिर भी उन्होंने नागरिकता लेने का फैसला किया है क्योंकि वे युवा जर्मन तुर्कों के अधिकारों के लिए लड़ना चाहती हैं.

सेवदा आदिगुजेल 28 साल की आरजू बादाक के साथ आपका कोलोन नाम के एकैडमिक संगठन में सक्रिय है. बादाक सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही है. उसने भी जर्मन नागरिकता लेने का फैसला किया है क्योंकि पेशे में फायदे के अलावा वह राजनीतिक रूप से भी सक्रिय हो पाएगी. वे चाहते हैं कि दूसरे आप्रवासी भी राजनीति में सक्रिय हों. जर्मन आप्रवासी नीति में भ्रम ढुलमुलेपन की स्थिति को समाप्त करने के लिए वे इसे जरूरी मानती हैं.

रिपोर्ट: वोल्फगांग डिक/एमजे

संपादन: आभा मोंढे

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