दो करोड़ की रेल के डब्बे वाली कोठी! | मंथन | DW | 09.08.2016
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मंथन

दो करोड़ की रेल के डब्बे वाली कोठी!

फिल्म 'की और का' में अर्जुन कपूर अपने घर को रेल के किसी डब्बे की तरह सजाते हैं लेकिन क्या आपने कभी किसी को रेल के डब्बे में ही अपना घर बनाते देखा है? और उस पर दो करोड़ का खर्च भी!

जर्मनी के एक अनजान से इलाके में ट्रेन के दो डब्बे लोगों का ध्यान खींचते हैं. दोनें डब्बों के बीच में एक छोटा सा घर भी दिखता है. इस अजीबोगरीब घर में फोटोग्राफर मार्को श्टेपनियाक और वनेसा श्टालबाउम की दो साल की मेहनत छुपी है. इनसे पहले कभी किसी ने इस तरह के प्रोजेक्ट पर काम नहीं किया था.

2009 में उन्होंने 40,000 यूरो में रेलगाड़ी के ये डब्बे खरीदे, वो भी ऑनलाइन. सबसे पहले 30 साल पुराने डब्बों से रंग हटाया गया. फिर क्रेफेल्ड शहर से उन्हें मार्ल शहर तक लाने में खूब मशक्कत लगी. कभी रेल का इस्तेमाल किया, कभी लॉरी का, तो कभी क्रेन का. तीन दिन में डब्बे इनके पास पहुंच ही गए और खर्च आया 26,000 यूरो का.

Wohnen in zwei alten Eisenbahnwaggons Zughaus

ऐसी दिखती है अब रसोई

डब्बे की मरम्मत में इस रेलप्रेमी जोड़े को 10 महीने लगे. फिर 2010 में दोनों डब्बों के बीच घर का निर्माण शुरू हुआ. करीब डेढ़ साल तक दोनों अपने खाली समय का हर मिनट अपने इस प्रोजेक्ट को दे रहे थे. बड़ी मेहनत से उन्होंने अपना बसेरा बनाया. उन्होंने खिड़कियों को एयर टाइट किया, फ्रेम को रंगा, यहां वहां सब कुछ ठीक किया और अब ट्रेन को देख कर पता ही नहीं चलता कि काया कल्प से पहले इसका रूप कैसा रहा होगा.

70 के दशक में इन डब्बों को डाक ले जाने के लिए इस्तेमाल किया जाता था. इसलिए अंदर कई छोटे छोटे रैक बने थे, जिनमें चिट्ठियां रखी जाती थीं. इस जोड़े ने इन्हें हटाया नहीं, बल्कि अब उनमें ग्लास, कप और कांटा छुरी रखे जाते हैं. घर की दीवार के विपरीत यहां छेद करना संभव नहीं क्योंकि दीवारें मेटल की हैं, इसलिए नया फर्नीचर लगाने में काफी दिक्कतों का सामना भी करना पड़ा.

मार्को श्टेपनियाक बताते हैं कि रेल के डब्बे का आयडिया उन्हें स्कूल में ही आ गया था, "यह बात मुझे अब महसूस हुई है. जो लोग यहां मेरा घर देखने आए उनमें से बहुत से लोगों ने कहा कि मैं यह बात स्कूल में ही कहता था. मैं कोई बहुत बड़ा रेल प्रेमी भी नहीं हूं."

रेल के बड़े डब्बों की वजह से बीच का मकान छोटा लगता है. एक वैगन का वजन 41 टन है. हर डब्बा 27 मीटर लंबा और तीन मीटर चौड़ा है. ताकि यहां माहौल डाक वाले रेल डब्बे का रहे, मकानमालिकों ने पुरानी चीजें बचाकर रखी हैं और उन्हें नए फर्नीचरों के साथ मैच किया है. लेकिन दोनों हमेशा एकराय नहीं रहे कि कौन सी चीजें रखी जानी हैं और किसे फेंक देना चाहिए. वनेसा श्टालबाउम बताती हैं, "होता यह था कि मार्को ज्यादा चीजें बचाकर रखना चाहता था, पुरानी चीजें, 1970 का पुराना टॉयलेट, पुराने प्लास्टिक के टॉयलेट जिन्हें हम रेल के पुराने दिनों से जानते हैं. उसका आयडिया था कि हमें स्टीम क्लीनर लेना चाहिए, वह ऑरीजनल है और यहां फिट भी बैठता है. मैंने कहा, नहीं, तो वह थोड़ा दुखी हुआ. लेकिन मैंने कहा, वह काम करने लायक भी तो होना चाहिए. बात बात पर झगड़े होते थे."

करीब ढाई लाख यूरो यानी लगभग दो करोड़ रुपये में उन्होंने अपने सपने को पूरा किया है. किसी सामान्य घर में शिफ्ट करने के बारे में अब वे सोच भी नहीं सकते हैं.

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