देखिए, ये है ईरान की नई ′खतरनाक′ मिसाइल | दुनिया | DW | 08.02.2019
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दुनिया

देखिए, ये है ईरान की नई 'खतरनाक' मिसाइल

ईरान ने एक नई बैलेस्टिक मिसाइल बना कर पश्चिमी देशों को सीधा जवाब दिया है जो उसके मिसाइल कार्यक्रम के आलोचक हैं. ईरान का कहना है कि वह बैलेस्टिक मिसाइलों पर कोई समझौता नहीं करेगा क्योंकि यह उसकी सुरक्षा के लिए जरूरी हैं.

ईरान के विशेष सैन्य बल रेवोल्यूशनरी गार्ड्स की न्यूज एजेंसी सेबाह न्यूज ने खबर दी है कि जमीन से जमीन पर एक हजार किलोमीटर दूर तक मार करने वाली नई मिसाइल गुरुवार को पहली बार पेश की गई.

माना जा रहा है कि ईरान ने अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ बढ़ते तनाव के बीच अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन करने की कोशिश की है. पश्चिमी देश ईरान से मांग कर रहे हैं कि वह मिसाइल कार्यक्रम को पूरी तरह बंद करे.

रेवोल्यूशनरी गार्ड के कमांडर मेजर जनरल मोहम्मद अली जाफरी और एयरोस्पेस कमांडर ब्रिगेडियर जनरल अमीराली हाजीजेदाह ने नई मिसाइल को सबके सामने पेश किया. हाजीजेदाह ने बताया कि नई मिसाइल को देजफुल का नाम दिया गया है और यह पुरानी जोलफागर मिसाइल की तुलना में 'दोगुनी विध्वंसक' ताकत रखती है. जोलफागर सिर्फ 700 किलोमीटर दूरी तक मार करने में सक्षम है.

फार्स न्यूज एजेंसी ने एक वीडियो जारी किया है जिसमें दोनों कमांडर मिसाइल का मुआयना कर रहे हैं. जाफरी ने कहा, "यह भूमिगत मिसाइल उत्पादन केंद्र पश्चिमी देशों को एक जवाब है जो सोचते हैं कि वे प्रतिबंधों और धमकियों के दम पर हमें हमारे लक्ष्य को पाने से रोक सकते हैं."

यह इशारा स्पष्ट तौर पर यूरोपीय संघ की तरफ है जिसने हाल में एक बयान जारी कर ईरान से अपना बैलेस्टिक मिसाइल कार्यक्रम रोकने को कहा था. ईरान की तरफ से 1,350 किलोमीटर तक मार करने वाली एक क्रूज मिसाइल के सफल परीक्षण के बाद यूरोपीय संघ का बयान आया था.

यूरोपीय शक्तियां 2015 में ईरान के साथ हुए उस समझौते को लेकर प्रतिबद्ध हैं, जिसमें परमाणु कार्यक्रम रोकने के बदले ईरान के ऊपर लगे प्रतिबंध हटाने की बात शामिल थी. हालांकि अमेरिका में डॉनल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद अमेरिका इस समझौते से अलग हो गया. ट्रंप चाहते हैं कि ईरान पर सभी प्रतिबंध दोबारा लगाए जाएं. ईरानी बैलेस्टिक मिसाइल कार्यक्रम ने ट्रंप को ईरान की आलोचना करने की एक वजह दी है. हालांकि ईरानी परमाणु डील में बैलेस्टिक मिसाइल कार्यक्रम का जिक्र नहीं है.

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ईरान में कट्टरपंथी मौलवियों के साथ साथ रेवोल्यूशनरी गार्ड भी परमाणु समझौते के आलोचकों में शामिल हैं.

उधर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने एक प्रस्ताव में 'नरम भाषा' इस्तेमाल करते हुए ईरान से ऐसी बैलेस्टिक मिसाइलें न बनाने को कहा है जो परमाणु हथियारों को ले जाने में सक्षम हों.

वहीं ईरान का कहना है कि बैलेस्टिक मिसाइल कार्यक्रम देश की रक्षा के जरिए जरूरी है और इन्हें 'परमाणु हथियार ले जाने के लिए नहीं तैयार किया गया' है. ईरान का कहना है कि उसने अपनी मिसाइलों की रेंज को दो हजार किलोमीटर तक सीमित कर दिया है. इस तरह इस्राएल, खाड़ी अरब देश और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने उनकी पहुंच में होंगे. अक्टूबर 2018 को ईरान में जिहादियों को निशाना बनाने के लिए सीरिया में जोलफागर मिसाइल दागी थी.

एके/आरपी (एएफपी, रॉयटर्स)

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