दुनिया में हर तीन में एक बच्चा गलत पोषण का शिकार | दुनिया | DW | 15.10.2019
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दुनिया

दुनिया में हर तीन में एक बच्चा गलत पोषण का शिकार

यूनिसेफ की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के एक तिहाई बच्चे गलत तरह के पोषण के शिकार हैं. इससे या तो वो मोटे हो जाते हैं या फिर दुबले या उनकी लंबाई कम रह जाती है. दक्षिण एशियाई और अफ्रीकी देशों में खासकर ऐसा है.

दुनिया में बच्चों की कुल जनसंख्या में एक तिहाई बच्चे यानी करीब 70 करोड़ कुपोषण के शिकार हैं. ये बच्चे या तो भूखे हैं या फिर मोटापे के शिकार हैं. यूनिसेफ द्वारा प्रकाशित की गई रिपोर्ट "दुनिया में बच्चों की स्थिति" से यह बात सामने आई है. 1999 के बाद 20 साल में यह पहली बार है जब यूनिसेफ की इस रिपोर्ट में बच्चों के पोषण पर ध्यान दिया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक गरीब और मध्यम आय वाले देशों के बच्चे भी अब उन बीमारियों से त्रस्त हैं जो पहले कभी सिर्फ बेहद अमीर या बेहद गरीब देशों में हुआ करती थीं. यूनिसेफ के मुताबिक इन बच्चों में से आधे बच्चे "छिपी हुई भूखमरी" से परेशान हैं. इसका मतलब उन्हें जरूरी विटामिन और दूसरे पोषक तत्व नहीं मिल पा रहे हैं.

दुनिया में करीब पांच करोड़ बच्चे गरीबी और खाने की कमी के कारण दुर्बलता जैसे पतलेपन के शिकार हैं. करीब 14.9 करोड़ बच्चे अपनी उम्र के बच्चों की तुलना में छोटे कद के हैं. जबकि 1990 से 2015 के बीच में छोटे कद के बच्चों की संख्या में करीब 40 प्रतिशत की कमी आई है. कम लंबाई से बच्चों के शारीरिक और मानसिक दोनों तरह के विकास पर असर पड़ता है. रिपोर्ट के मुताबिक छह महीने से दो साल के बीच के करीब 45 प्रतिशत बच्चों को फल या सब्जियां खाने में नहीं मिल पाती हैं. करीब 60 प्रतिशत बच्चों को अंडा, डेयरी उत्पाद, मछली या मांस नहीं मिल पाते हैं.

अफ्रीकी और दक्षिण एशियाई देशों में बच्चों के विकास से जुड़ी समस्याएं सबसे ज्यादा हैं. इन देशों में पांच साल की उम्र तक के सबसे ज्यादा बच्चे मोटापे, पतलेपन या कम लंबाई की समस्या के शिकार हैं. सबसे ज्यादा खराब हालात पापुआ न्यू गिनी और इरिट्रिया की है. इन देशों के करीब 60 प्रतिशत बच्चों का विकास सही तरह से नहीं हो पा रहा है.

तीन गुनी चुनौती

दुनिया के सभी उम्र के लोगों को देखा जाए तो 80 करोड़ लोग लगातार भूख का सामना कर रहे हैं जबकि 2 करोड़ लोग जरूरत से ज्यादा और स्वास्थ्य के लिए खतरनाक खाना खा रहे हैं. 30 साल पहले गरीब देशों में मोटापे की कोई समस्या नहीं थी. लेकिन अब जंक फूड की उपलब्धता के चलते कम आय वाले देशों में भी पांच साल की उम्र से कम के 10 प्रतिशत बच्चे मोटापे की समस्या का शिकार हैं. दुनियाभर में चार करोड़ बच्चों का वजन औसत से ज्यादा है या वो मोटापे के शिकार हैं.

यूनिसेफ के पोषण कार्यक्रम के प्रमुख विक्टर अगुए कहते हैं, "बच्चों के कुपोषण की समस्या को दूर करना बड़ा मुश्किल है क्योंकि इसके अब कई आयाम हैं. अब तीन तरह की चुनौतिया हैं. इनमें कम खाना मिलना, जरूरी पोषक तत्वों का ना मिलना और मोटापा शामिल हैं. ये समस्याएं या तो एक ही देश में मिल रही हैं, या एक ही पड़ोस में या फिर एक ही घर के बच्चों में ही मिल रही हैं."

जलवायु परिवर्तन का असर

जलवायु परिवर्तन के चलते कम पोषण मिलने की समस्या बढ़ती जा रही है. तापमान बढ़ने से सूखा पड़ रहा है और खेती को नुकसान हो रहा है. वातावरण में बढ़ रही कार्बन की मात्रा से भी फसलें खराब हो रही हैं और उनमें मौजूद पोषक तत्वों की गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है. हर बच्चे को स्वस्थ भोजन देने के लिए यूनिसेफ जलवायु परिवर्तन के खिलाफ गंभीर राजनीतिक पहल की मांग कर रहा है. साथ ही यूनिसेफ जंक फूड पर भी आंशिक रोक लगाने की मांग कर रहा है.

यूनिसेफ का कहना है कि जंकफूड पर ज्यादा टैक्स लगाया जाए. साथ ही बच्चों को इन्हें खाने के लिए ना दिया जाए. स्कूल और इनके आसपास जंकफूड ना बिकने दिया जाए और इनके प्रचार पर भी रोक लगाई जाए. अगुए का कहना है, "अगर हमारे बच्चों को अच्छा खाना नहीं खिलाया जाएगा तो हम अपनी आने वाली पीढ़ी के भविष्य पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा रहे हैं."

आरएस/एमजे (डीपीए, एएफपी)

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