दुनिया भर में कम हुए मौत की सजा के मामले | दुनिया | DW | 12.04.2018
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दुनिया

दुनिया भर में कम हुए मौत की सजा के मामले

मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है कि 2016 की तुलना में पिछले साल मौत की सजा के कुल मामलों में गिरावट आई है.

साल 2017 में एमनेस्टी इंटरनेशनल ने दुनिया भर में मौत की सजा के 993 मामले दर्ज किए. 2016 की तुलना में यह चार फीसदी कम है. तब सौ अधिक मामले दर्ज किए गए थे. एमनेस्टी के अनुसार पिछले साल 23 देशों में मौत की सजा दी गई. संख्या में सबसे ज्यादा गिरावट तीन देशों, पाकिस्तान, ईरान और सऊदी अरब में देखी गई. ईरान में 11 फीसदी कम मामले देखे गए, तो वहीं पाकिस्तान में 31 फीसदी. एमनेस्टी इंटरनेशनल के ओलुवेटोसिन पोपूला ने इस बारे में बताया, "ईरान में कमी की वजह यह हो सकती है कि वहां ड्रग्स से जुड़े अपराधों के मामलों को ले कर न्यायिक सुधार हुए हैं." डॉयचे वेले से बातचीत में पोपूला ने कहा कि पाकिस्तान और सऊदी अरब में हुए बदलाव को समझना मुश्किल है. इसके अलावा मिस्र में भी मौत की सजा के मामलों में 20 प्रतिशत गिरावट देखी गई है.

एमनेस्टी की रिपोर्ट में चीन के आंकड़े शामिल नहीं हैं. संगठन के अनुसार चीन दुनिया का वह देश है, जहां सबसे ज्यादा मौत की सजा दी जाती है लेकिन चीन अपने आंकड़े साझा नहीं करता. एमनेस्टी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, "मौत की सजा का सही आंकड़ा नहीं बताया जा सकता क्योंकि बहुत सा डाटा गोपनीय है." रिपोर्ट में आगे कहा गया है, "993 के इस आंकड़े में वे हजारों लोग शामिल नहीं हैं, जिन्हें शायद चीन ने मौत की सजा दी." रिपोर्ट में शामिल 23 देशों में सबसे ज्यादा सजाएं ईरान, सऊदी अरब, इराक और पाकिस्तान में दी गईं.

इसके अलावा कुछ देश ऐसे भी हैं जिन्होंने 2017 में फिर से मौत की सजा देना शुरू किया. इनमें बहरीन, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन शामिल हैं. वहीं अफ्रीका के गिनी ने सजा-ए-मौत को खत्म किया और गाम्बिया ने भरोसा जताया है कि जल्द ही वह भी इस सजा को खत्म कर देगा.

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि दुनिया भर की जेलों में 22,000 ऐसे लोग कैद हैं, जिन्हें मौत की सजा सुनाई जा चुकी है. एमनेस्टी की कोशिश है कि देशों को मौत की सजा खत्म करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए. पोपूला ने कहा कि वे इन देशों से विनती करेंगे कि जेलों में बंद जिन लोगों को मौत की सजा सुनाई जा चुकी है, उसे वापस लिया जाए और इन्हें जेल में ही सजा काटने दी जाए. 2017 के आंकड़ों के बारे में उन्होंने कहा, "ये महत्वपूर्ण नतीजे दिखाते हैं कि दुनिया एक नए मोड़ पर पहुंच चुकी है और इस भयानक, अमानवीय और अपमानजनक सजा को खत्म करना अब मुमकिन है."

कैर्स्टिन क्निप/आईबी

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