दुनिया पर राज करने का आईएस का दावा | दुनिया | DW | 19.08.2015
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दुनिया

दुनिया पर राज करने का आईएस का दावा

पाकिस्तान के कबायली इलाके में ऐसे दस्तावेज मिले हैं जिनकी तुलना हिटलर की आत्मकथा माइन कांप्फ से की जा रही है. इसके मुताबिक अगले पांच सालों में आईएस द्वारा पूरी दुनिया में खिलाफत का दावा करने की बात सामने आई है.

दस्तावेज में भारतीय उपमहाद्वीप पर आईएस की अगली नजर होने के भी संकेत मिले हैं. इनमें ग्राफिक की मदद से आईएस के प्रसार का 6 स्तरों में चित्रण किया गया है. इसके मुताबिक 2017 को अंतिम चरण के रूप में दिखाया गया है जब एक खुला युद्ध होगा. पांचवे चरण में खिलाफत के एलान का चित्रण किया गया है.

32 पन्नों वाले दस्तावेज को पढ़ कर एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि "पढ़ने में यह खिलाफत की माइन कांप्फ जैसी लगती है. जहां एक तरफ दुनिया सीरिया और इराक में आईएस के हाथों लोगों के सिर कलम करने और सूली पर चढ़ाए जाने के वीडियो देख रही है, वहीं दूसरी ओर आईएस उत्तरी अफ्रीका और मध्य पूर्व में कदम बढ़ा रहा है."

हिटलर की यहूदी विरोधी सोच का जिक्र उसकी आत्मकथा 'माइन कांप्फ' (मेरा संघर्ष) में है. 1920 के दशक में हिटलर ने म्यूनिख की एक जेल में इसे लिखा था. जर्मन सरकार ने इस किताब पर प्रतिबंध लगा रखा है.

दस्तावेज में इस बात के खिलाफ संकेत हैं कि आईएस पश्चिम और उत्तरी अमेरिकी देशों में खिलाफत की कूटनीति को तरजीह दे रहा है. इसके विपरीत इसमें लिखा है, "अमेरिका के साथ सीधी टक्कर में ऊर्जा खपाने के बजाय, हमें अरब देशों में खिलाफत स्थापित करने के लिए हथियारबंद बगावत करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए." दस्तावेज में यह भी कहा गया है कि आगे आईएस की नजर भारत पर है.

मैप में देखा जा सकता है कि आईएस 2020 तक दुनिया भर पर कब्जा करने की सुनियोजित ताक में है. ग्राफिक चित्रण के मुताबिक आईएस की सीधी नजर मध्यपूर्व, उत्तरी अमेरिका, भारतीय उपमहाद्वीप और यूरोप के अधिकांश हिस्सों पर अगले पांच साल में कब्जा करके खिलाफत का एलान करने पर है. पश्चिम में स्पेन से पूर्व में चीन तक खिलाफत के अंतर्गत शरिया कानून लागू करने की योजना के संकेत मिले हैं.

बीबीसी रिपोर्टर एंड्र्यू होस्केन ने अपनी किताब 'एंपायर ऑफ फीयर' में लिखा है कि "आईएस उस पूरे इलाके पर कब्जा करना चाहता है जिसे वह इस्लामिक विश्व के रूप में देखता है. एक बार खिलाफत स्थापित हो जाने के बाद वे बाकी दुनिया से मुकाबला करना चाहते हैं." होस्केन का कहना है कि हालांकि आईएस के खिलाफ 60 देश खड़े हैं जिनमें अमेरिका और रूस शामिल हैं. "ऐसे में यह हो पाना संभव नहीं लगता. लेकिन यह भी सोचने वाली बात है कि उन्होंने जो शुरुआती कदम उठाए उनकी भी उम्मीद नहीं थी."

इस्लामिक स्टेट और जिहादी समूहों के इतिहास और विस्तार के बारे में भी इन दस्तावेजों में लिखा गया है. ये दस्तावेज आधिकारिक दस्तावेज लगने के बजाय आईएस के किसी समर्थक द्वारा लिखे गए ज्यादा मालूम होते हैं. अमेरिकी मीडिया इंस्टीट्यूट को मिले उर्दू में लिखे दस्तावेज के दावों के मुताबिक, "स्वीकार लो कि खिलाफत रहेगी और तब तक फैलती रहेगी जब तक पूरी दुनिया पर कब्जा नहीं कर लेती और हर उस इंसान का सिर कलम नहीं कर देती जो अल्लाह का विरोध करता है. यह एक कड़वा सच है, इसे पी लो."

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