दुनिया के कई हिस्सों में क्यों हो रहा विंड फार्म का विरोध? | दुनिया | DW | 23.08.2019
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दुनिया

दुनिया के कई हिस्सों में क्यों हो रहा विंड फार्म का विरोध?

गर्म होती दुनिया को प्रदूषण फैलाने वाले जीवाश्म ईंधन की जगह विकल्पों की जरूरत है. पवन ऊर्जा इस समस्या के समाधान का एक हिस्सा है लेकिन चर्चा शुरू हो गई है कि पवन चक्कियां प्रकृति को कितना नुकसान पहुंचा रही हैं.

पर्यावरण संरक्षण को देखते हुए आए दिन कोयले के लिए खनन, गैस के लिए फ्रैकिंग और तेल के लिए बोरिंग करने को लेकर विरोध प्रदर्शन होते हैं. लेकिन पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र की बात करने वाले लोगों के बीच ऊर्जा के नवीकरणीय साधनों को लेकर भी विवाद पैदा हो सकता है.

पवन चक्की के लिए जगह बनाने को लेकर घर के पास के जंगल को खाली करने की योजना के बारे में बोलते हुए गाब्रिएले नीहाउस उबेल कहती हैं कि वह असहाय और क्रोधित महसूस करती हैं. गाब्रिएले जर्मन राज्य हेसे में 20 पवन टरबाइन वाले फार्म लगाने की योजना का विरोध कर रहे लोगों का नेतृत्व कर रही हैं. हालांकि इस योजना से जंगल का 2 प्रतिशत से कम हिस्सा प्रभावित होगा लेकिन वे इस फैसले से खुश नहीं हैं. वे कहती हैं कि इससे पहले से बना बनाया पारिस्थितिकी तंत्र नष्ट हो जाएगा. वे इसकी तुलना ऐतिहासिक हामबाख वन से करती हैं, जो लिग्नाइट खदान के विस्तार की वजह से खतरे में है.

गाब्रिएले कहती हैं, "वहां वे एक-एक पेड़ के लिए संघर्ष कर रहे हैं. मीडिया में यह मुद्दा छाया हुआ है. यहां 200 वर्ग किलोमीटर तक पेड़ काट दिए जाएंगे और कोई एक शब्द नहीं बोल रहा है." हालांकि, यह चर्चा नई नहीं है. विश्व पवन ऊर्जा संघ (डब्ल्यूडब्ल्यूईए) के महासचिव श्टेफान ग्सेंगर कहते हैं, "शुरू से ही पवन ऊर्जा का विरोध रहा है."

जर्मनी में हजारों संगठन कर रहे पवन ऊर्जा का विरोध

एक एक्टिविस्ट वेबसाइट के अनुसार जर्मनी में हजारों संगठन पवन ऊर्जा परियोजनाओं का विरोध कर रहे हैं. गाब्रिएले का समूह भी उनमें से एक है. फिर भी पवन ऊर्जा जलवायु परिवर्तन की गति को कम करने और वैश्विक ऊर्जा मांग को पूरा करने का एक हिस्सा है. संभावना जताई जा रही है कि अगले दो दशक में इसमें 30 प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है. डब्ल्यूडब्ल्यूईए के अनुसार 2018 तक स्थापित हो चुके पवन टरबाइन पूरी दुनिया में बिजली की मांग का 6 प्रतिशत पूरा करने में सक्षम होंगे. इंटरनेशनल रिन्यूएबल एनर्जी एजेंसी के अनुसार ऊर्जा क्षेत्र में नवीकरणीय ऊर्जा का प्रतिशत 2017 में 25 है, जो 2050 तक 85 प्रतिशत पहुंचने की संभावना है. यह सौर और पवन ऊर्जा सेक्टर में वृद्धि से होगा.

Infografik Windkraft Zubau 2018 weltweit EN

दुनिया में नवीकरणीय ऊर्जा को लेकर बदलाव जारी है. ऐसे में पवन चक्की फार्म का प्रकृति पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह भी समझना जरूरी है. पवन चक्की को पक्षियों और विशेष रूप से चमगादड़ों के लिए खराब माना जाता है. उदाहरण के लिए, पक्षी टरबाइन के ब्लेड से टकराकर घायल हो जाते हैं और यह उनके लिए जानलेवा साबित होता है. साथ ही टावर के आकार में बने टरबाइन पक्षियों को उनके प्रजनन स्थान से भोजन लाने वाले रास्ते को बदलने पर मजबूर कर सकते हैं. दूसरे शब्दों में कहें तो उन्हें लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी, जिससे उनकी अधिक ऊर्जा नष्ट होगी.

दक्षिणी स्पेन के एक्स्ट्रेमादुरा में जैव विविधता वाले क्षेत्र या उनके नजदीक में पवन चक्की फार्म का निर्माण किया गया है, जो सही योजना के अभाव को दर्शाता है. स्पेन के एक संरक्षण समूह एसईओ बर्डलाइफ का कहना है कि इससे स्पेन की शाही बाज जैसी खतरे में पड़ी प्रजातियों के विलुप्त होने का खतरा और बढ़ सकता है. लेकिन कई अन्य अध्ययनों से पता चला है कि पवन चक्कियों के कारण होने वाली पक्षियों की मौतें अन्य मानव-संबंधित कारणों जैसे बिजली की लाइनों या इमारतों से टकराव की तुलना में बहुत कम हैं.

पंक्षियों के संरक्षण की बात

एसईओ बर्डलाइफ की रिपोर्ट इस तरह के अध्ययन में खामियों को उजागर करती है, जिसमें जानकारी की कमी और छोटे सैंपल साइज हैं. इसमें और शोध होने की जरूरत है. समूह ने अपनी रिपोर्ट में कहा गया है, "हमें इस बात की अनदेखी नहीं करनी चाहिए कि कम प्रजनन दर विलुप्त होने की कगार पर पहुंच चुकी प्रजातियों या कम प्रजनन करने वाले प्रजातियों पर गंभीप प्रभाव डाल सकती है."

एनएबीयू हेसे के प्रकृति संरक्षण केंद्र के प्रमुख मार्क हारथून का कहना है कि एक जलवायु आपातकालीन संदर्भ में, नवीकरणीय ऊर्जा के लिए वुडलैंड की क्षमता का उपयोग करना "जंगलों और वहां रहने वाली सभी प्रजातियों के लिए सबसे अच्छा संरक्षण है." उन्होंने यह भी कहा कि गर्मियों के पिछले दो मौसम में हेसे क्षेत्र में 15,000 हेक्टेयर जंगल को नुकसान पहुंचा है. हालांकि एनएबीयू ने जर्मनी में अन्य पवन ऊर्जा परियोजनाओं के खिलाफ अपनी कई शिकायतें दर्ज करवाई हैं, जिनमें कहा गया है कि यह प्रकृति को खतरे में डाल सकती है.

यूरोप के बाहर बर्डलाइफ दक्षिण अफ्रीका ने हाल ही में केपटाउन के उत्तर में लगभग 120 किलोमीटर दूर ग्रोट विंटरहॉकबर्ग पहाड़ों में स्थापित होने वाले एक पवन चक्की फार्म  को बंद करने के फैसले का जश्न मनाया. यहां लुप्तप्राय पक्षियों को खतरा हो सकता था. दरअसल, यह समूह एनर्जी टास्क फोर्स के साथ काम करता है जिसकी स्थापना यूनाइटेड नेशन कंवेशन द्वारा प्रवासी प्रजाति की देखरेख के लिए की गई है. यह उन जगहों को चिह्नित करता है जहां पक्षियों को नुकसान पहुंचाए बिना नवीकरणीय ऊर्जा के स्ट्रक्चर का निर्माण किया जा सके.

जर्नल बायोलॉजिकल कंजर्वेशन में 2012 में प्रकाशित एक अध्ययन में कहा गया था कि दक्षिणी स्पेन के कादीज में 13 पवन चक्की फार्म में गिद्ध की मृत्यु दर में 50% की गिरावट दर्ज की गई थी. ऐसा इस वजह से हुआ क्योंकि जब वे पक्षियों को पास में देखते थे, अपनी टरबाइन बंद करने लगे थे. इससे ऊर्जा उत्पादन में केवल 0.7 प्रतिशत की वार्षिक गिरावट दर्ज की गई थी.

Infografik wie Vögel sterben EN

स्थानीय लोगों की सहभागिता

अमेरिकन विंड वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ने पवन टरबाइनों के परिणामस्वरूप पक्षी की मृत्यु से संबंधित दस अलग-अलग अध्ययनों की जांच की और निष्कर्ष निकाला कि हवा की गति कम होने की स्थिति में ब्लेड को घूमने से रोक देने पर चमगादड़ों की मृत्यु की दर 50 से 87% के बीच कम हो सकती है.

विशेषज्ञ कहते हैं कि न तो सभी जगह पवन टरबाइन बनेंगे और न ही सभी पक्षी और चमगादड़ सड़क पर बिछी बिजली की तारों से बच सकेंगे. ग्सेंगर कहते हैं, "इन सब से महत्वपूर्ण यह है कि सभी प्रभावित लोगों को ज्यादा से ज्यादा शामिल किया जाए और शुरुआत से ही उन्हें अधिक से अधिक स्वामित्व और लाभ दिया जाए." माली जैसे विकासशील देशों में, नवीकरणीय ऊर्जा गरीबी से निपटने में अहम भूमिका निभा सकती है. साथ ही न सिर्फ लोगों के पास ऊर्जा होगी, बल्कि इस पर उनका नियंत्रण भी होगा.

नागरिकों की सहभागिता पर पवन टरबाइन के समर्थक ग्सेंगर और आलोचक गाब्रिएले दोनों सहमत है. उनका कहना है कि नागरिकों की भागीदारी और स्वामित्व पवन ऊर्जा के नकारात्मक प्रभावों को कम करेगी क्योंकि वे किसी अन्य की तुलना में भूमि को अधिक समझते हैं और महत्व देते हैं.

गाब्रिएले का कहना है कि विंड टरबाइन ज्यादातर स्थानीय लोगों को प्रभावित करेंगी, इसलिए, "दूसरे शहरों के नेताओं को लगाने का क्षेत्र नहीं तय करना चाहिए क्योंकि वे शहरों को नहीं जानते हैं."

रिपोर्टः आयरीन बानोस रुइज/आरआर

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