दुनिया की सबसे खतरनाक छलांग | लाइफस्टाइल | DW | 09.10.2012
  1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages
विज्ञापन

लाइफस्टाइल

दुनिया की सबसे खतरनाक छलांग

आसमान में 37 किलोमीटर की ऊंचाई से धरती पर छलांग लगाना बच्चों का काम नहीं. लेकिन 43 साल की उम्र जरा ज्यादा होती है. फिर भी ऑस्ट्रिया के फेलिक्स बाउमगार्टनर ऐसा करने को निकल पड़े हैं.

बाउमगार्टनर के लिए तो ये शौक और पेशा दोनों है. वह न्यू मेक्सिको में दुनिया की सबसे ऊंची छलांग लगाने के लिए तैयार हैं. ये छलांग जितनी ऊंची है उतनी ही खतरनाक भी. बाउमगार्टनर का पेशा यूं तो हेलिकॉप्टर उड़ाना है लेकिन वो गर्म गुब्बारे पर आकाश की सैर भी करते हैं. आसामान में जिस ऊंचाई से वह छलांग लगाने वाले हैं वो एक नया रिकॉर्ड होगा. इस रिकॉर्ड की राह में खतरे भी हैं.

37 किलोमीटर ऊपर आसमान में ऑक्सीजन नहीं होती. यानी बाउमगार्टनर को सांस लेने के लिए जद्दोजेहद करनी होगी. लेकिन सबसे बड़ी चुनौती तो खराब मौसम की है. टीम ने खोज बीन के बाद ऐसा इलाका ढूंढ निकाला है जहां बाउमगार्टनर को एक गुब्बारा आसमान में 36,576 मीटर की ऊंचाई पर ले जाएगा. अगर मौसम का मिजाज ठीक रहा तो सुबह सुबह ही उसे आसमान के लिए छोड़ दिया जाएगा. लेकिन अगर मौसम ने साथ नहीं दिया तो बाउमगार्टनर की उम्मीदों पर पानी भी फिर सकता है. जिस ऊंचाई से बाउमगार्टनर छलांग लगाएंगे वहां तक पहुंचने में गुब्बारे को करीब 3 घंटे का वक्त लगेगा.

गुब्बारे को हवा की मार से भी जूझना पड़ सकता है. अच्छा खासा मोटा यह गुब्बारा 9.7 किलोमीटर की रफ्तार से ज्यादा की हवा नहीं झेल सकता. मुश्किलों के बाद भी बाउमगार्टनर का हौसला कमजोर नहीं पड़ा है. उनका दावा है कि वह पिछला रिकॉर्ड तोड़ पाने में कामयाब होंगे. पिछला रिकॉर्ड 31,333 मीटर की ऊंचाई से छलांग लगाने का है. ये अमेरिकी वायु सेना के कर्नल जो किटिंगर के नाम है.

कहा जा रहा है कि बाउमगार्टनर जब छलांग लगाएंगे तो उनकी गति किसी विमान की तरह तेज होगी. छलांग लगाने के वक्त शरीर की मुद्रा का भी खासा खयाल रखना होगा. जहां से बाउमगार्टनर छलांग लगाएंगे वहां हवा नहीं होगी. इसलिए वो घूमते हुए नीचे गिरेंगे. इस प्रक्रिया में उनके दिमाग, दिल और शरीर को चोट पहुंचने का खतरा है. हालांकि इससे निपटने का भी इंतजाम किया गया है और उनकी सुरक्षा के लिए एक अंतरिक्ष सूट तैयार किया गया है जो उन्हें कम वायुदाब और शून्य से भी 57 डिग्री नीचे के तापमान से बचाएगा.

जहां हवा नहीं होती, वहां सबसे बड़ा खतरा शरीर के खून उबलने का है. जहां हवा नहीं होती, वहां शरीर का द्रव खौल कर गैस बनने लगता है. एक मिनट के भीतर ही फेफड़े खराब हो सकते हैं. इससे निपटने के लिए हालांकि डॉक्टरों और चिकित्सा यंत्रों से सुसज्जित एक हेलिकॉप्टर बाउमगार्टनर के साथ साथ चलता रहेगा. नासा के फ्लाइट सर्जन जोनथन क्लार्क कहते हैं, "हम जो कर रहे हैं वो केवल रिकॉर्ड बनाने के लिए नहीं हैं. ये फ्लाइट टेस्ट कार्यक्रम भी है."

वीडी/एजेए (रॉयटर्स)

DW.COM

विज्ञापन