′दिव्य कण′ की खोज में सफलता | विज्ञान | DW | 04.07.2012
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विज्ञान

'दिव्य कण' की खोज में सफलता

सर्न में धरती के गर्भ में महाप्रयोग कर रहे वैज्ञानिकों ने अणु के भीतर का एक नया कण खोज लिया है. यह 'दिव्य कण' कहे जाने वाले हिग्स बोसोन से मेल खा रहा है. वैज्ञानिक कहते हैं ब्रह्मांड की रचना का राज इन्हीं में छुपा है.

हर चीज में भार क्यों होता है. गुरुत्व बल और द्रव्यमान (मास) की वजह से. द्रव्यमान कहां से आता है. आखिर ऐसे कौन से कण हैं जो अतिसूक्ष्म स्तर पर द्रव्यमान पैदा करने लगते हैं. वैज्ञानिकों को लगता है कि द्रव्यमान पैदा करने वाले कण 'हिग्स बोसोन' हैं. इन्हें 'गॉड पार्टिकल' या 'दिव्य कण' भी कहा जा रहा है.

स्विटजरलैंड के सर्न में जमीन के भीतर 2008 से प्रयोग कर रहे वैज्ञानिकों ने बुधवार को अणु के भीतर का एक खास कण खोजने का दावा किया. सोमवार को शिकागो के फेर्मी नेशनल एक्सेलेटर लैब ने भी द्रव्यमान के पीछे हिग्स कणों के होने का दावा किया.

CERN Teilchenbeschleuniger

सर्न का हाइड्रॉन कोलाइडर

बुधवार को सर्न में लार्ज हेड्रोन कोलाइडर के भीतर प्रोटोनों की टक्कर कराने के बाद यहां तक पहुंचे वैज्ञानिकों ने ऐसा ही दावा किया. दोनों टीमों के मुताबिक नये तत्व का वजन 125-126 गिगाइलेक्ट्रॉन वोल्ट है. यह अणु के केंद्र में रहने वाले प्रोटोन से 130 गुना भारी है.

लार्ज हेड्रोन कोलाइडर, सर्न के वैज्ञानिक फिलहाल इसे हिग्स बोसोन का नाम देने से बच रहे हैं. हिग्स पार्टिकल की तलाश कर रही एक टीम के प्रवक्ता जोए इनकाडेला ने सर्न में कहा, "यह शुरुआती नतीजे हैं लेकिन हमें लगता है कि यह ठोस और बहुत मजबूत हैं."

ब्रिटेन की साइंस एंड टेक्नोलॉजी फैसिलिटीज काउंसिल के चीफ एक्जीक्यूटिव जॉन वोमेरस्ली के मुताबिक, "मैं यह पुष्टि कर सकता हूं कि एक ऐसा तत्व खोजा गया है जो हिग्स बोसोन थ्योरी से मेल खाता है.

ब्रह्मांड की उत्पत्ति कैसे हुई, हिग्स कण इस पहेली को समझा सकते हैं. इस सिद्धांत के जरिए यह समझा जा सकता है कि कैसे अतिसूक्ष्म तत्व एक साथ आए और उन्होंने विशाल तारों, ग्रहों और जीवन का निर्माण किया. फिलहाल वैज्ञानिक मानते हैं कि 13.7 अरब साल पहले बिंग बैंग के साथ ब्रह्मांड की उत्पत्ति

Physiker Peter Higgs

हुई. बिग बैंग के समय हिग्स बोसोन कण छटके, इन्हीं की वजह से ब्रह्मांड बना. थ्योरी के मुताबिक जब कुछ कण हिग्स से टकराते हैं तो उनकी गति धीमी पड़ जाती है और वे द्रव्यमान के साथ आकार लेने लगते हैं. लेकिन ये कण जब प्रकाश से टकराते हैं तो उनकी गति और यात्रा में कोई बाधा नहीं पड़ती है.

हिग्स कण का सिद्धांत 1964 में एडिनबर्ग यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक प्रोफेसर पीटर हिग्स ने दिया. अपने पांच सहयोगियों के साथ उन्होंने यह दावा किया. प्रोफेसर पीटर हिग्स ने तब कहा था कि एक दिन विज्ञान हिग्स तत्वों की खोज तक पहुंच जाएगा. उन्होंने इस दिन के बारे में कहा, "मुझे अपने जीवन में ऐसा होने की उम्मीद नहीं है और मैं अपने परिवार वालों से कहूंगा कि वह फ्रिज में कुछ शैंपेन रख दें." एक न एक दिन विज्ञान यहां तक पहुंच ही जाएगा, तब फ्रिज वाली शैंपेन निकाल कर जश्न मनाया जाएगा. बोसोन कणों का सिद्धांत भारतीय वैज्ञानिक सत्येंद्र नाथ बोस ने खोजा. बोस के ही नाम पर इन कणों को बोसोन कहा जाता है.

इस नई खोज के साथ कुछ पुराने दावों पर भी निगाह पड़ रही है. वैज्ञानिक यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि इस नए कण को हिग्स बोसोन ही कहा जाए या नहीं. या फिर इसे हिग्स का ही एक रूप या फिर एक नया ही कण कहा जाए. अगर इसे नया कण माना गया तो हर चीज के बुनियादी ढांचे को लेकर बनाए गए वैज्ञानिक सिद्धांत गड़बड़ा सकते हैं.

रिपोर्ट: ओंकार सिंह जनौटी (एएफपी, एपी, रॉयटर्स)

संपादन: मानसी गोपालकृष्णन

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