दिल्ली में इमारत गिरी, 55 लोगों की मौत | जर्मन चुनाव 2017 | DW | 15.11.2010
  1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

जर्मन चुनाव

दिल्ली में इमारत गिरी, 55 लोगों की मौत

सोमवार शाम दिल्ली में एक चारमंजिला इमारत गिरने से 55 लोगों की मौत हो गई. इस हादसे में कम से कम 75 लोग घायल भी हुए हैं. राहत और बचाव का काम जारी है. कई लोगों के अभी भी मलबे में दबे होने की आशंका.

default

जांच के आदेश

हादसा स्थानीय समय के मुताबिक करीब आठ बजे हुआ. पूर्वी दिल्ली के भीड़ भाड़ वाले इलाके लक्ष्मी नगर के ललिता पार्क इलाके की एक चारमंजिला इमारत अचानक भरभरा कर जमींदोज हो गई. इमारत का इस्तेमाल मुख्य तौर पर रिहायशी रूप से ही होता था हालांकि कुछ लोगों का कहना है कि बेसमेंट में एक कपड़ा एक्सपोर्ट करने वाली कंपनी का वर्कशॉप भी था. इमारत तक पहुंचने का रास्ता संकरा होने के कारण राहतकर्मियों को यहां पहुंचने में काफी देर लगी और दिक्कत हुई.

दिल्ली की स्वास्थ्य मंत्री किरण वालिया ने पहले समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि हादसे में 32 लोगों की मौत हुई है लेकिन अब मृतकों की संख्या बढ़ गई है. बचाव में जुटे राहतकर्मी स्थानीय लोगों की मदद से लोगों को मलबे से बाहर निकाल रहे हैं. इमारत पूरी तरह से ढह गई है.

दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने इमारत बनाने में इस्तेमाल किए गए सामान की जांच करने के आदेश दे दिये हैं. मुख्यमंत्री ने कहा, "हादसा बहुत बड़ा है और मुझे नहीं लगता कि हाल के वर्षों में इससे पहले भी इस तरह का कोई हादसा हुआ है. मुख्यमंत्री ने ये भी आशंका जताई है कि गिरी इमारत अवैध निर्माण भी हो सकती है.

मुख्यमंत्री का कहना है, "इस बार दिल्ली में मानसून के दौरान जबर्दस्त बरिश हुई. कई दशकों के बाद इतनी ज्यादा बरसात हुई और यमुना में बाढ़ भी आई. मुमकिन है कि बारिश के पानी ने इमारत की नींव कमजोर कर दी हो जिस कारण ये हादसा हुआ."

मुख्यमंत्री ने एक समाचार चैनल से बातचीत में ये भी कहा कि बिल्डर की लापरवाही भी एक वजह हो सकती है जिसने ऐसा मकान बनाया बाढ न झेल सके. दिल्ली की स्वास्थ्य मंत्री किरण वालिया ने कहा, "मकान के मालिक की पहचान कर ली गई है और जल्दी ही उससे पूछताछ शुरू की जाएगी." नाम न बताने की शर्त पर एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि आसपास की दूसरी इमारतों के भी गिरने की आशंका जताई जा रही है.

रिपोर्टः एजेंसियां/एन रंजन

संपादनः एस गौ़ड़

विज्ञापन