दिल्ली में अब तक कड़ाके की सर्दी क्यों नहीं पड़ी | खबरें | DW | 26.11.2019

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दिल्ली में अब तक कड़ाके की सर्दी क्यों नहीं पड़ी

दिल्ली में प्रदूषण का स्तर खराब ही बना हुआ है साथ ही लोग अब तक गर्म कपड़े कम ही पहने दिख रहे हैं. आखिर क्या है वजह कि दिल्ली में अब तक सर्दी नहीं आई.

दिल्ली के लाजपत नगर मार्केट में स्वेटर, जैकेट बेचने वाले आशीष सुबह से ग्राहक के इंतजार में खड़े हैं. आशीष मुख्य बाजार के किनारे एक रेहड़ी पर गर्म कपड़े बेचते हैं. आशीष बताते हैं, "नवंबर का महीना खत्म होने वाला है और दिसंबर शुरू होने वाला है लेकिन हमारे पास गर्म कपड़ों के खरीदार ना के बराबर आ रहे हैं. हमें नहीं पता इस सर्दी के मौसम में हम कितना माल बेच पाएंगे."

आशीष की चिंता जायज है और यह चिंता इस ओर इशारा करती है कि कैसे बदलता मौसम आम लोगों के साथ-साथ बाजार पर भी असर डाल रहा है. आशीष ने बताया, "हर बार सर्दी के पहले ही बाजार में गर्म कपड़ों की मांग बढ़ जाती थी लेकिन इस बार लोग हमारी दुकान की तरफ कम ही आ रहे हैं."

दुनिया भर में मौसम तेजी से बदल रहा है. कभी बेमौसम भारी बरसात, कभी चक्रवात, तो कभी जानलेवा गर्मी और सिमटती सर्दी विशेषज्ञों के लिए ये सब शोध के विषय बन गए हैं. नीति निर्माता भी अपने एजेंडे में जलवायु परिवर्तन को शामिल कर रहे हैं.

Indien Wintermarkt in Neu-Delhi

सर्दी ना होने के वजह से स्वेटरों का बाजार में रौनक नहीं दिख रही

इसी बाजार में खरीदारी करने आई निशा रानी कहती हैं, "हम दिल्ली वालों के सामने अनेक चुनौतियां हैं, गर्मी का मौसम ज्यादा समय तक चल रहा है. दिल्ली में देखिए हम लोग कैसे बिना स्वेटर के बाहर घूम रहे हैं यही नहीं घर के भीतर भी सोते समय पंखा चलाना पड़ता है. प्रदूषण की तो आप बात ही मत कीजिए. कभी-कभी हमें बदलते मौसम को देख बहुत भय महसूस होता है."

जलवायु परिवर्तन रोकना हर इंसान की जिम्मेदारी है, छोटे-बड़े कदम उठाकर लोग जलवायु परिवर्तन से लड़ सकते हैं और ऐसे में सरकारी एजेंसियों से लेकर गैर लाभकारी संगठन रास्ता दिखा सकते हैं. कार्बन उत्सर्जन को बढ़ाने वाले काम को बंद या उसे कम करना भी उसमें शामिल हैं. जानकारों का कहना है कि छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देकर हम इस लक्ष्य को पा सकते हैं जैसे अक्षय ऊर्जा बहुत ही बेहतर विकल्प है.

दिल्ली की सर्दी कहां गई

स्काइमेट के वाइस प्रेसिडेंट और मौसम वैज्ञानिक महेश पलावत के मुताबिक, "पिछले साल भी सर्दी देरी से ही आई थी, इस बार उम्मीद है कि थोड़ा पहले सर्दी आ जाएगी. नवंबर के पहले हफ्ते में पश्चिमी विक्षोभ बने थे जिस कारण जम्मू-कश्मीर, लद्दाख में बर्फबारी हुई थी. इस महीने में चौथा पश्चिमी विक्षोभ जारी है. जब पश्चिमी विक्षोभ आगे बढ़ जाता है तो उत्तर दिशा से बर्फीली हवाएं चलती हैं, उसके कारण दिल्ली-एनसीआर में तापमान गिरना शुरू हो जाता है. "

Indien Wintermarkt in Neu-Delhi

गर्म कपड़े बेचने वाले ग्राहकों की कमी से परेशान हैं.

स्काइमेट के मुताबिक इस बार एक के बाद एक लगातार हल्के पश्चिमी विक्षोभ आ रहे हैं, हालांकि सक्रिय रूप से चार ही पश्चिमी विक्षोभ थे जिसकी वजह से पहाड़ों पर अच्छी बर्फबारी हुई. स्काइमेट के पलावत कहते हैं, "पश्चिमी विक्षोभ के कारण उत्तर-पश्चिमी दिशा से चलने वाली बर्फीली हवाओं की दिशा बदल जाती है. यही वजह है कि तापमान गिर नहीं पा रहे हैं."

मौसम विज्ञानियों का कहना है कि यह पश्चिमी विक्षोभ जब आगे बढ़ेगा तो फिर बर्फीली हवाएं चलेंगी और इस महीने की 28, 29 और 30 तारीख के बीच 5-6 डिग्री तापमान गिर सकता है.

हवा चलेगी प्रदूषण घटेगा

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का स्तर भी उत्तर-पश्चिमी दिशा से आने वाली हवाओं के कारण घटेगा. ऐसे में दमघोंटू हवा से दिल्ली-एनसीआर के लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है. स्वच्छ हवा के चलने से वायु की गुणवत्ता भी सुधरेगी. दिल्ली में पिछले कुछ दिनों से प्रदूषण का स्तर या तो खराब या कुछ हद तक सामान्य रहा.

आशीष जैसे दुकानदारों को उम्मीद है कि मौसम बदलेगा तो गर्म कपड़ों की बिक्री बढ़ेगी और निशा रानी को भी मौसम से ही उम्मीद है. थोड़ी बारिश और हवा से दिल्ली की हवा साफ होगी और बच्चे-बूढ़े सभी स्वच्छ वातावरण में थोड़े दिन के लिए ही सही सर्दी का मजा ले पाएंगे. 

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