दिल्ली पहुंचे इतालवी नौसैनिक | दुनिया | DW | 22.03.2013
  1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

दुनिया

दिल्ली पहुंचे इतालवी नौसैनिक

भारतीय मछुआरों की हत्या के आरोपी इतालवी नौसैनिक भारत वापस लौटे. नौसैनिकों को वापस भेजने के फैसले से भारत और इटली के बीच छिड़ा कूटनीतिक युद्ध शांत हुआ. भारत ने आश्वासन दिया है कि नौसैनिकों को फांसी की सजा नहीं दी जाएगी.

शुक्रवार शाम भारत पहुंचते हुए इतालवी नौसैनिक नई दिल्ली में पुलिस के सामने पेश हुए. तयशुदा वक्त पर भारत लौटने की वजह से उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया. हाजिरी लगाने के बाद दोनों नौसैनिक इटली के दूतावास चले गए. वैसे 10 दिन के कूटनीतिक संग्राम और नतीजे भुगतने जैसी चेतावनियों का अंत गुरुवार रात ही हो चुका था. भारी दबाव झेल रही इटली की सरकार ने नौसैनिकों को भारत भेजने का फैसला किया. गुरुवार को भारत सरकार ने इटली को भरोसा दिलाया कि नौसैनिकों को मौत की सजा नहीं दी जाएगी. हालांकि इस आश्वासन की कोई जरूरत नहीं थी. नौसैनिकों पर गैरइरादतन हत्या का आरोप है और ऐसे आरोप में फांसी होना, तकरीबन असंभव ही है. इस बात की बहुत संभावना है कि आरोपी नौसैनिक सजा भारत के बजाए इटली में काटे.

गुरुवार रात ये सारी बातें तय हो जाने के बाद शुक्रवार सुबह इटली के उपविदेश मंत्री स्टेफान दे मिस्तुरा दोनों नौसैनिकों के साथ ब्रिडिशी एयरपोर्ट पहुंचे. वहां से एक सैनिक विमान पर सवार होकर मिस्तुरा नौसैनिकों मासिमिलानो लाटोरे और सल्वाटोरे गिरोने को लेकर भारत के लिए निकल पड़े. भारतीय सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के मुताबिक नौसैनिकों को 22 मार्च तक वापस लौटना था और शुक्रवार शाम जैसे ही वे भारत पहुंचे, यह भी साफ हो गया कि नौसैनिकों ने सुप्रीम कोर्ट की आज्ञा का उल्लंघन नहीं किया है.

नौसैनिकों की वापसी से भारत सरकार को भी बड़ी राहत मिली है. डीएमके के समर्थन वापस लेने और मुलायम सिंह की चेतावनियों के बाद मनमोहन सरकार के गिरने के खतरा खड़ा हो गया था. शुक्रवार को भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा, "मुझे खुशी है कि भारतीय न्यायिक प्रक्रिया की संप्रभुता और उसका सम्मान बरकरार है." मनमोहन सिंह ने पिछले हफ्ते चेतावनी दी थी कि अगर इटली ने नौसैनिकों को वापस नहीं भेजा तो उसे नतीजे भुगतने होंगे.

भारतीय विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने नौसैनिकों के भारत लौटने को बड़ी कूटनीतिक कामयाबी करार दिया है. हालांकि नौसैनिकों के नई दिल्ली पहुंचने के बाद खुर्शीद ने यह भी कहा कि इटली के साथ कोई डील नहीं हुई है.

विपक्षी पार्टी बीजेपी ने इसे सरकार की कूटनीति के बदले सुप्रीम कोर्ट की कामयाबी कहा है. पार्टी के प्रवक्ता शहनवाज हुसैन ने कहा, "सुप्रीम कोर्ट की सख्ती की वजह से क्रिसमस और वोटिंग के लिए गए दो नौसैनिक वापस आए हैं. खुर्शीद इसका श्रेय ले रहे हैं. मुंबई धमाकों का मास्टरमाइंड दाऊद इब्राहिम अब भी पाकिस्तान में हैं, वो उसे वापस क्यों नहीं लाते हैं."

मछुआरों की हत्या का मामला फरवरी 2012 का है. इटली के जहाज पर तैनात नौसैनिकों ने हिंद महासागर में भारतीय मछुआरों पर गोलियां चलाई. नौसैनिकों के मुताबिक उन्होंने मछुआरों को समुद्री डाकू समझा. इटली का कहना है कि घटना अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हुई. वहीं भारत एजेंसियों ने कई सवाल करते हुए पूछा है कि समुद्री लुटेरों का अंदेशा होने पर जहाज ने मानक प्रक्रिया क्यों नहीं अपनाई. फायरिंग के तीन घंटे बाद भी आखिरी घटना की जानकारी किसी भी पक्ष क्यों नहीं दी गई. फायरिंग में दो भारतीय नागरिकों की मौत हुई है, लिहाजा भारत इटली के नौसैनिकों पर मुकदमा चलाने के लिए स्वतंत्र है.

भारत में उन पर मुकदमा चल रहा है. बीते साल दिसंबर में सुप्रीम कोर्ट ने नौसैनिकों को क्रिसमस के दौरान इटली जाने की अनुमति दी थी. इस साल 22 फरवरी को भी नौसैनिकों ने इटली के संसदीय चुनावों में वोट डालने के लिए छुट्टी मांगी. सुप्रीम कोर्ट ने इस बार उन्हें चार हफ्ते की छुट्टी दी. लेकिन छुट्टी पर इटली जाने के कुछ ही दिन बाद इतालवी सरकार ने कहा कि अब नौसैनिक भारत नहीं लौटेंगे. रोम के इस फैसले पर कूटनीतिक विवाद शुरू हो गया. नौसैनिकों की छुट्टी की शर्त पर इटली के राजदूत ने दस्तखत किए थे. लिहाजा भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने इटली के राजदूत के भारत छोड़ने पर रोक लगा दी. इससे विवाद और भड़क उठा.

ओएसजे/एमजे (डीपीए, एपी, पीटीआई)

DW.COM

WWW-Links

संबंधित सामग्री

विज्ञापन