दांव पर क्यों लगी है जीन्स की प्रतिष्ठा | दुनिया | DW | 30.04.2021
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दुनिया

दांव पर क्यों लगी है जीन्स की प्रतिष्ठा

पहनावे के तौर पर जीन्स जितनी लोकप्रिय और आरामदेह है, पर्यावरण के लिए उतना ही बड़ा सरदर्द बन गयी है. जीन्स कारोबार के लिए ये दुविधा की स्थिति है. सुझाव बहुत से हैं लेकिन समस्याएं भी कम नहीं.

जब भी आप नई जीन्स खरीदते हैं तो समझिए कि अपना नल खुला छोड़कर 21 घंटे तक पानी बहाते रहते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि डेनिम का कपड़ा, कॉटन से बनता है और कॉटन उगाने के लिए बहुत बड़ी मात्रा में पानी चाहिए होता है. एक जीन्स को तैयार करने में दस हजार लीटर पानी खर्च होता है. दुनिया में चौथी सबड़े बड़ी अंतःस्थलीय झील के रूप में विख्यात, अरल सागर का अधिकांश भाग सूख चुका है, इसकी एक वजह है यूरोपियन यूनियन के लिए मध्य एशिया में होने वाली सघन कॉटन खेती. बहुत बड़े पैमाने पर जीन्स चलन में है. हर साल दो अरब जीन्स खरीदी जाती हैं. लेकिन हमेशा से ऐसा नहीं था.

पर्यावरण संकट के लिए कुख्यात होता जीन्स उद्योग

1850 के दशक में फ्रांसीसी शहर निम्स से डेनिम का अमेरिका को निर्यात किया गया था. तभी इस कपड़े का ना  नाम पड़ा "डे निम्स.” उसे खान मजदूरों की पोशाक के लिए एक मजबूत कपड़ा माना जाता था. सौ साल पहले जीन्स ने अन्य संस्कृतियों में अपनी जगह बनाई और फिर मुख्यधारा की पोशाक बन गयी. अब जीन्स उद्योग पर्यावरण संकट का हिस्सा बन गया है और ये दाग हटाने के लिए ये समझना जरूरी है कि डेनिम आखिर यहां तक कैसे आ पहुंचा. कैसे वो हवा, पानी और मजूदरों के फेफड़ों को प्रदूषित करता है. वो न सिर्फ बहुत सारा पानी इस्तेमाल करता है बल्कि एक नुकसानदेह प्रदूषक भी है.

लिवाइस का अनुमान है कि उनकी जींस का एक जोड़ा वायुमंडल में करीब साढ़े 33 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ता है- कार से एक हजार किलोमीटर से ज्यादा के सफर के बराबर. डेनिम से इतना अधिक सीओटू उत्सर्जन इसलिए है क्योंकि वो कपड़ा चीन और भारत जैसे देशों में तैयार होता है जहां बिजली के लिए कोयला एक मुख्य स्रोत है. डेनिम का ट्रेडमार्क नीला रंग सिंथेटिक नील की डाई के जरिए मिलता है जिसका नाता साइनाइड जैसे जहरीले रसायन से है. गंदे पानी के ट्रीटमेंट के लिए पैसा न देना पड़े, इसके लिए कंपनियां इन रसायनों को नदियों में डम्प कर देती है. 2019 के एक अध्ययन के दौरान बांग्लादेश में फैक्ट्रियों से निकले टेक्सटाइल डाई के अंश, पास ही उगायी जा रही फसलों में पाए गए थे.

काम के लिहाज से भी खतरनाक है डेनिम की फैक्ट्री

डेनिम फैक्ट्री में काम करना भी घातक हो सकता है. सैंडब्लास्टिंग को ही लीजिए. इस तरीके के तहत बहुत ज्यादा प्रेशर वाले होज पाइप से बालू का डेनिम पर छिड़काव किया जाता है. उससे जीन्स थोड़ा घिसी हुई दिखती है और उपभोक्ताओं में काफी पसंद भी की जाती है. इस प्रक्रिया में रेत के बारीक कण मजदूरों की सांस में मिल जाते हैं जिससे उन्हें फेफड़ों की जानलेवा बीमारी सिलिकोसिस होने की आशंका रहती है.

15 साल की उम्र में बेगो देमिर तुर्की की एक डेनिम सैंडब्लास्टिंग फैक्ट्री में काम करते थे जहां उनके देखते देखते 120 लोग सिलिकोसिस से मारे गए. देमिर ने डॉयचेवेले को बताया, "सैंडब्लास्टिग में आठ साल काम करने के बाद, मेरे आधे फेफड़े बेकार हो चुके हैं."

देमिर तुर्की में क्लीन क्लोद्स कैम्पेन (सीसीसी) के समन्वयक हैं. इस अभियान के तहत ही 2009 में सैंडब्लास्टिंग गैरकानूनी घोषित हो पायी थी. लेकिन अब ये लड़ाई, सैंडब्लास्टिंग की जगह इस्तेमाल हो रहे पोटैशियम परमैंगनेट के खिलाफ भी शुरू हो चुकी है. सीसीसी के लिए तैयार 2019 की एक रिपोर्ट में देमिर ने पाया कि तुर्की की डेनिम फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूर पोटैशियम परमैंगनेट का इस्तेमाल करते हैं जिसकी वजह से उन्हें दमा और त्वचा पर खुजली की शिकायत होने लगी थी.

देमिर का कहना है कि दुनिया भर में डेनिम के उत्पादन में अब भी बड़े पैमाने पर पोटैशियम परमैंगनेट का इस्तेमाल किया जा रहा है. वह कहते हैं, "ब्रांड तो मानो इंतजार करते हैं कि उनके न रहने के बाद ही कुछ करेंगे. सैंडब्लास्टिंग फैक्ट्रियों में भी उनका यही रवैया था. बहुत सारे मजदूरों की मौत के बाद ही ब्रांड हरकत में आए थे." 

डेनिम की अतिउत्पादन की समस्या

जीन्स की आपूर्ति और मांग की तीव्रता को बनाए रखने के चलते बड़े पैमाने पर और जरूरत से ज्यादा डेनिम का चौतरफा उत्पादन हो रहा है. जैसे अमेरिका को ही लीजिए जहां उपभोक्ताओं के पास औसतन सात जोड़ी जीन्स रहती है. 2017 में जीन्स उद्योग की कीमत 56 अरब डॉलर थी और आज कोविड-19 से पैदा हुई वैश्विक मंदी के बावजूद उद्योग फलफूल रहा है. ये व्यापार पूरब से पश्चिम का रुख करता है और उसका ध्यान एशिया-प्रशांत क्षेत्र में और वृद्धि पर टिका है.

मिसाल के लिए, बांग्लादेश, यूरोप के लिए डेनिम का सबसे बड़ा निर्यातक देश है और अमेरिका के लिए तीसरा सबसे बड़े निर्यातक है. बांग्लादेश की राजधानी ढाका का हा-मीम डेनिम 2007 में शुरू होने के बाद छह गुना वृद्धि कर चुका है. वो इस समय अमेरिका और यूरोप के बाजारों के लिए हर महीने चार हजार किलोमीटर – यानी न्यू यॉर्क और लॉस एंजेलिस शहरों के बीच की दूरी के बराबर डेनिम बना रहा है. हा-मीम डेनिम के जनरल मैनेजर रवीन्द्र शाह ने डायचेवेले को बताया "हम लोग फैशन ब्रांडों से लेकर टेस्को और लीड्ल जैसे ग्रॉसरों तक के लिए डेनिम बनाते हैं. हम लोग सबकी मांग पूरी करते हैं. उन्हें जो उत्पाद चाहिए, हम मुहैया कराते हैं."

वैश्विक मांग को संतुष्ट करते हुए डेनिम उद्योग सस्ती, लचीली जीन्स का इस्तेमाल बढ़ाने की तरफ मुड़ा है. ये कॉटन और पेट्रोल-आधारित इलास्टिक फाइबर को मिलाकर तैयार की जाती है. इस इलास्टिक को रिसाइकिल करना कठिन है. ये बायोडिग्रेडेबल नहीं है और इस तरह डेनिम के पर्यावरणीय दुष्प्रभाव को और बढ़ाता है.

हा-मीम फैक्ट्री में बनने वाला कोई 90 प्रतिशत डेनिम, लचीले फैब्रिक्स के साथ मिलाकर बनाया जाता है क्योंकि, रवीन्द्र शाह के मुताबिक "आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है. " उनके कहने का आशय ये है कि उपभोक्ता की पसंद, उद्योग की दिशा को प्रभावित करती है.

बायोडिग्रेडेबल फैब्रिक का रुख

लेकिन प्रवृत्तियां बदल रही हैं. 2020 में अमेरिकी परामर्शदाता एजेंसी मैकेंजी एंड कंपनी ने अमेरिका और यूरोप के खरीदारों के बीच एक सर्वे किया और उनसे पूछा कि क्या कोविड-19 ने फैशन के प्रति उनके रुझान को बदला है या नहीं. नतीजों में दिखाया गया कि 67 प्रतिशत लोग नये कपड़े खरीदते हुए अब टिकाऊ सामग्रियों को एक महत्त्वपूर्ण फैक्टर मानने लगे हैं.

कुछ ब्रांड वैकल्पिक डेनिम में निवेश कर रहे हैं. उदाहरण के लिए, टिकाऊ ढंग से व्यवस्थित जंगलों में उगे पेड़ों की छाल के सेलुलोज से बना टेनसेल टीएम नाम के एक बायोडिग्रेडेबल फैब्रिक ने लिवाइस, क्लोज्ड और किंग्स ऑफ इंडिगो जैसे जानेमाने डेनिम ब्रांडों के साथ करार किए हैं.

इटली के मिलान शहर के नजदीक स्थित कानिडियानी कंपनी ने प्राकृतिक रबर कोरेवा से एक लचीली डेनिम बनायी है जो मिट्टी में विषैले पदार्थ मिलाए बिना छह महीने में ही जैविक रूप से नष्ट हो सकती है. कानिडियानी की वेबसाइट इसे "डेनिम इंडस्ट्री के लिए गेम चेंजर" मानती है. क्योंकि ये "निर्णायक समाधान में योगदान करती है. "

वीडियो देखें 03:35

लकड़ी के कपड़े

डेनिम समझौता बचाएगा अरबों लीटर पानी

लेकिन आलोचकों ने आगाह किया है कि टिकाऊ फैब्रिक का इस्तेमाल ही मामले का अकेला हल नहीं है. उद्योग को ओवर प्रोडक्शन पर काबू पाना ही होगा. डेनिम की चक्रीय अर्थव्यवस्था का समर्थन करने वाले गैर लाभकारी संगठन, द हाउस ऑफ डेनिम के सह संस्थापक जेम्स वीनहॉफ ने डॉयेचेवेले को बताया, "कॉटन को बायोडिग्रेड करने का पूरा विचार ही व्यर्थ है. लाओ, बनाओ, इस्तेमाल करो और फेंक दो."

अक्टूबर में वीनहॉफ ने ऐम्सटर्डम में एक डेनिम समझौते की अगुआई भी की जिसमें टॉमी हिलफिगर जैसे 30 नामीगिरामी डेनिम ब्रांडों ने 2023 तक नीदरलैंड्स में 20 प्रतिशत तक रिसाइकिल किए हुए फैब्रिक से कम से कम तीस लाख डेनिम उत्पाद बनाने की प्रतिबद्धता पर दस्तखत किए थे. नीदरलैंड्स के बाजार में हर साल दो करोड़ तीस लाख डेनिम चीजें बिक जाती हैं. अब इस डेनिम समझौते के तहत 15 अरब लीटर से ज्यादा पानी बचा लेने का लक्ष्य रखा गया है.

डेनिम की जड़ों की ओर लौटते हुए

बाकी वस्त्र उद्योग की तरह, डेनिम का बड़े पैमाने पर उत्पादन की लागत अब कोई राज़ नहीं रहा है और यही उद्योग अब बहुत सारे समाधानों की तलाश और बहस का मंच बन चुका है. लंबे समय से टिकाऊ फैशन के प्रमोटर और सस्टेनेबिलिटी के लिए जागरूक करने वाले संगठन रीमोकी में सलाहकार डालिया बेनेफाटो बताती हैं, "हम बातचीत के चरण में हैं. सफर शुरू हो चुका है."  

बेनेफाटो का मानना है कि डेनिम को अपने उद्देश्य को फिर से खोजना चाहिए. इसके लिए, उपभोक्ताओं को भी इसका इतिहास समझने की जरूरत है- कामगार की पोशाक से लेकिन काउंटरकल्चर के एक प्रतीक तक.

वह कहती हैं, "1980 के दशक में, बाजार ने उपभोक्ता को विद्रोही बनने पर जोर दिया था. और आज हमें एक बार फिर से बगावत करनी होगी. हमें इसकी ब्रांडिंग शुरू करनी होगी और उपभोक्ता को एक पर्यावरणीय नायक के रूप में, हरित आंदोलन के लिए जूझते एक नये विद्रोही के रूप में महसूस कराना होगा." 

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