दफ्तर में नींद से फुर्ती | लाइफस्टाइल | DW | 12.06.2012
  1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages
विज्ञापन

लाइफस्टाइल

दफ्तर में नींद से फुर्ती

तरोताजा रहना है और काम में चुस्त दुरुस्त रहना है तो दोपहर के खाने के बाद थोड़ी झपकी लीजिए. खासकर अगर आप गर्म जलवायु वाले देश में रहते हैं तब तो ये तरीका और भी कारगर है.

अमेरिका और भारत जैसे देशो में तो पॉवर झपकी का चलन भी है. पॉवर नैप यानी खाने के बाद थोड़ी देर की नींद. इससे दिन के दूसरे हिस्से में आप काफी तरोताजा महसूस करते हैं. काम की गुणवत्ता पर भी इसका असर पड़ता है. जर्मनी में मिशेल्सबर्ग अस्पताल के बाम्बर्ग सोशल फाउंडेशन में मनोचिकित्सक डॉक्टर ग्योरान हजाक का कहना है, ' ये बहुत जरूरी है कि खाने के बाद शरीर का पूरा तंत्र काम करना बंद कर दे और तनाव से छुटी ले.' दोपहर बाद की झपकी तो सेहत के लिए और भी फायदेमंद है. 2007 में एथेंस और बोस्टन के वैज्ञानिकों का प्रयोग भी इसी तरह के निष्कर्ष बताता है. इसके मुताबिक जो लोग खाने के बाद नियमित रूप से झपकी लेते हैं उनको हार्ट अटैक का खतरा कम होता है.

कोलोन यूनिवर्सिटी में मेडिसिन के प्रोफेसर मिशाएल स्टिम्पल कहते हैं, 'हल्की नींद से तनाव में रहने वाले तंत्रिका तंत्र को भी आराम मिलता है. इसका मतलब ये हुआ कि दिल की धड़कन भी कम हो जाती है. नाड़ी की गति धीमी हो जाती है. ब्लड प्रेशर और शरीर का तापमान भी कम हो जाता है.' झपकी लेना तरोताजा होने का सबसे कारगर तरीका है. झपकी लेने के बाद इंसान ज्यादा ऊर्जावान महसूस करता है.दोपहर की झपकी तो शरीर की बुनियादी जरूरतों में शामिल है. हमारा शरीर के आराम करने की दो अवस्थाएं होती हैं. एक बार रात में और एक बार दोपहर के खाने के बाद.

दोपहर के खाने के बाद इंसान आमतौर पर झपकी लेने की जरूरत महसूस करता है लेकिन ये स्वाभाविक रूप से होता है. हां, खाने की वजह से ये प्रक्रिया थोड़ी तेज जरूर हो जाती है. स्टिम्पेल का कहना है, 'दोपहर के भोजन में जिस मात्रा में आप पोषक आहार लेते हैं उसी मात्रा में थकान भी महसूस होती है.खाना पचाने के लिए पेट को बडी तादात में खून चाहिए होता है. और उसी वक्त ह्रदय और शरीर के दूसरे हि्स्सों को भी ऊर्जा की जरूरत होती है. और इसी वक्त काम भी करना होता है इसी तनाव की वजह से इंसान थकान महसूस करता है.' डॉक्टर स्टेम्पेल का कहना है कि दोपहर बाद की झपकी के लिए सबसे अच्छा माहौल होता है अंधेरा कमरा और आरामदायक बिस्तर. यहां तक कि दफ्तर में भी झपकी ली जा सकती है. मोबाइल फोन ऑफ करके और दरवाजे पर 'डोंट डिस्टर्ब' का साइन बोर्ड लगाकर एक झपकी मारी जा सकती है.

झपकी लेने से पहले शरीर को आराम की मुद्रा में छोड़ देना चाहिए. ये सबसे सही तरीका होता है. झपकी लेने के बाद सही समय पर उठ जाना भी उतना ही जरूरी है. डॉक्टरों की राय है कि 15 से 30 मिनट का समय पर्याप्त होता है. अगर झपकी लंबी हो जाती है तो इससे इंसान नींद में चला जाता है. और ये शरीर के चक्र के लिए ठीक नहीं होता.

वीडी/एएम (डीपीए)

DW.COM

WWW-Links

विज्ञापन