दक्षिण कोरिया के लोग क्यों कर रहे जापानी बीयर का बहिष्कार | दुनिया | DW | 19.07.2019
  1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages
विज्ञापन

दुनिया

दक्षिण कोरिया के लोग क्यों कर रहे जापानी बीयर का बहिष्कार

दक्षिण कोरिया के लोग बीयर काफी पसंद करते हैं लेकिन वे टोक्यो के साथ कारोबारी विवाद पर गुस्सा हैं. और इस गुस्से का इजहार इन दिनों राष्ट्रभक्ति दिखाते हुए वे जापान के पेय पदार्थों के बहिष्कार से कर रहे हैं.

जापान ने जुलाई के शुरू में सैमसंग जैसे दिग्गज टेक कंपनियों के लिए जरूरी सामान जैसे चिप्स के लिए उपयोग किए जाने वाले रसायनों के निर्यात पर सख्त प्रतिबंध लगा दिया. इससे वैश्विक स्तर पर तकनीकी क्षेत्र पर प्रभाव पड़ने की आशंकाओं को हवा मिली है. जापान के इस कदम पर दक्षिण कोरिया के केंद्रीय बैंक ने कहा था कि इससे अर्थव्यवस्था पर "कोई प्रभाव नहीं" पड़ेगा. दोनों देशों के अधिकारियों ने बिगड़ती स्थिति को नियंत्रित करने के लिए घंटों तक बातचीत की, लेकिन अभी तक विवाद का कोई हल नहीं निकला है.

दक्षिण कोरिया की सबसे बड़ी हाइपरमार्केट श्रृंखला ई-मार्ट के अनुसार वहां बीयर पीने वाले जापान को लेकर अपना गुस्सा दिखा रहे हैं. उन्होंने चार बड़े जापानी ब्रांड के पेय पदार्थों को पीना छोड़ दिया है. असही, किरिन, सपोरो और संतूरी चार बड़ी बीयर कंपनियों की बिक्री जून के अंतिम 15 दिन के मुकाबले जुलाई के शुरुआती 15 दिनों में 25 प्रतिशत तक गिर गई है. ई-मार्ट के अधिकारी ने बताया, "यह गिरावट अचानक हुई है. लंबे समय से ऐसा नहीं हुआ था. इस अवधि में कोरियन ब्रॉन्ड के बीयरों की बिक्री में 7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है."

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापान द्वारा कोरियाई लोगों के जबरन श्रम के मुद्दे पर दोनों देशों के बीच दशकों से चल रहा विवाद हाल के दिनों में बढ़ा है. इसने दक्षिण कोरिया में गुस्से को बढ़ा दिया है. वहां 10 में से सात लोग अभी भी पूर्व औपनिवेशिक शासक के प्रति नकारात्मक भावना रखते हैं. इस बीच दक्षिण कोरिया में किराने की लगभग 3,700 दुकानों ने कुछ या सभी जापानी उत्पादों की खरीद रोक दी है. राजधानी सियोल के एक सुपरमार्केट के आगे लगे बोर्ड पर संकेतों में कहा गया है, "जापान एक ऐसा देश है जिसे अपने अतीत पर पछतावा नहीं है. हम अपने यहां जापानी उत्पाद नहीं बेचते हैं."

जापान सरकार का कहना है कि उपकरण बनाने वाले रसायन के व्यापार पर प्रतिबंध, सियोल के साथ संबंधों में "विश्वास की कमी" के कारण लगाए गए हैं. साथ ही जापान ने दक्षिण कोरिया पर संवेदनशील जापानी सामग्री के निर्यात को अनुचित तरीके से हैंडल करने का भी आरोप लगाया. लेकिन सियोल का कहना है कि दक्षिण कोरियाई अदालतों द्वारा जापानी कंपनियों को दशकों पहले जबरी श्रम के पीड़ितों को मुआवजा देने का आदेश दिया गया था. इसी का बदला लेने के लिए जापान ने ऐसा कदम उठाया है.

बहिष्कार के बीच इंस्टाग्राम पर एक तस्वीर शेयर की गई है, जिसमें कहा गया है कि "मैं जापान नहीं जाऊंगा, मैं जापानी उत्पाद नहीं खरीदूंगा". "न" शब्द को जापानी ध्वज के लाल डिस्क के साथ "ओ" के रूप में दिखाया गया है. जापान में दक्षिण कोरिया जाने वाले लोगों के सबसे बड़े ऑनलाइन प्लेटफार्मों में से एक ने आंदोलन के समर्थन में अनिश्चितकालीन बंद की घोषणा की. इस प्लेटफार्म पर 10 लाख से अधिक से अधिक यूजर यात्रा से संबंधित सुझाव साझा करते हैं.

Südkorea Trostfrauen Protest (Getty Images/AFP/Jung Yeon-je)

दक्षिण कोरिया में कंफर्ट वीमन पर जापान का विरोध

दक्षिण कोरियाई स्टेशनरी चेन क्योबो हॉटट्रैक ने संकेत देना शुरू कर दिया है कि कौन सी कलम किस देश में बनी है. इसके लिए वे राष्ट्रीय ध्वज या फूल वाले चिन्ह के साथ लेबल लगा रहे हैं. इस हफ्ते कोरियाई पेन की बिक्री में 23 प्रतिशत का इजाफा हुआ है. देश के ब्यूटी ब्लॉगर्स भी राष्ट्रवादियों के निशाने पर आ गए हैं. रिसाबा एक प्रसिद्ध ब्यूटी ब्लॉगर हैं, जिनके वीडियो चैनल के 20 लाख से अधिक सब्सक्राइबर्स हैं. इस महीने की शुरुआत में एक जापानी मेकअप उत्पाद को दिखाने के लिए उन्हें सार्वजनिक आलोचना के बाद माफी मांगनी पड़ी थी.

दक्षिण कोरिया और जापान दोनों लोकतांत्रिक देश हैं तथा अमेरिका के सहयोगी हैं. इनका सामना तेजी से विकसित हो रहे चीन और परमाणु हथियार संपन्न उत्तर कोरिया से है. हालांकि दक्षिण कोरिया के वामपंथी माने जाने वाले राष्ट्रपति मून जे इन उत्तर कोरिया के साथ जुड़ने के लिए जोर दे रहे हैं. उन्होंने कहा है कि जापान के खिलाफ स्वतंत्रता की लड़ाई दोनों देशों की राष्ट्रीय पहचान के केंद्र में है.

जापान में असाही शिम्बुन समाचार पत्र द्वारा लगभग एक हजार लोगों के एक सर्वेक्षण में पाया गया कि 56 प्रतिशत ने चिप्स बनाने में इस्तेमाल होने वाले रसायनों के दक्षिण कोरिया को निर्यात पर सरकारी नियंत्रण को कड़ा करने का समर्थन किया है.

आरआर/एमजे (एएफपी)

_______________

हमसे जुड़ें: WhatsApp | Facebook | Twitter | YouTube | GooglePlay | AppStore

जापानी अर्थव्यवस्था की चुनौतियां

DW.COM

संबंधित सामग्री

विज्ञापन