तैयार हुआ आईएमएफ का इटली प्लान | NRS-Import | DW | 28.11.2011
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NRS-Import

तैयार हुआ आईएमएफ का इटली प्लान

यूरोप के आर्थिक संकट को विश्व में फैलने से रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने एक योजना तैयार की है. यूरो संकट से निपटने के लिए 600 अरब यूरो की बचाव योजना तैयार की गई है. यह मदद इटली के लिए तैयार रखी जाएगी.

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इटली के अखबार ला स्टाम्पा की रिपोर्ट के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) कर्ज की बड़ी रकम इटली को देगा ताकि इटली की अर्थव्यवस्था को डूबने से बचाया जा सके. इटली को 400 से 600 अरब यूरो का कर्ज दिया जाएगा. कर्ज के अलावा रोम को बजट में कटौती और आर्थिक सुधार लागू करने के लिए एक से डेढ़ साल का समय दिया जाएगा.

USA Währungsfond Christine Lagarde in Washington

रिपोर्ट के मुताबिक कर्ज पर इटली को चार से पांच फीसदी ब्याज देना होगा. यह ब्याज दर बाजार और बॉन्ड के जरिए जुटाई जाने वाली रकम से सस्ती है. इटली को बॉन्ड्स के जरिए सात फीसदी से ज्यादा ब्याज चुका कर पैसा मिलेगा.

इटली के लिए इतने भारी कर्ज का इतंजाम करना आईएमएफ के लिए आसान नहीं है. आईएमएफ को इतनी रकम जुटाने के लिए मौजूदा संसाधनों के अलावा कुछ नए स्त्रोत भी ढूंढने होंगे. इस बात पर भी विचार हो रहा है कि इस पूरी प्रकिया को यूरोपियन सेंट्रल बैंक के मार्फत पूरा किया जाए. ऐसी स्थिति में आईएमएफ गारंटर की भूमिका निभाएगा.

ला स्टाम्पा कहता है, "शुरुआत में आईएमएफ की कड़ी निगरानी में अगर इटली को फंड दिया जाए तो वह इस संकट से बाहर निकल सकता है. मुश्किल में फंसे देशों की मदद के लिए यूरोपियन सेंट्रल बैंक की बड़ी भूमिका को लेकर बर्लिन के विरोध की वजह से यह स्थिति है."

EU Frankreich Deutschland Italien Finanzkrise Angela Merkel Nicolas Sarkozy und Mario Monti

जर्मनी नहीं चाहता कि इस संकट से निपटने के लिए यूरोपियन सेंट्रल बैंक मुद्रा छापकर बाजार में झोंक दे. बर्लिन को आशंका है कि ऐसी स्थिति में मंहगाई बढ़ेगी और यूरो की कीमत गिरेगी. साथ ही कड़े सुधार लागू किए बिना मुद्रा छापने का मतलब संकट का समाधान नहीं बल्कि उससे कुछ देर तक आंखें चुराने जैसे होगा. यह डर भी है कि बाद में अगर फिर आर्थिक संकट आया तो वह ज्यादा घातक होगा.

यूरोपीय संघ और यूरोपियन सेंट्रल बैंक ने ऑडिटरों को इटली भेजा है. ऑडिटर इटली सरकार के बजट व खातों की जांच करेंगे. इसके बाद आईएमएफ अपने विशेषज्ञ भेजेगा. जी-20 बैठक में इटली की पूर्व सरकार इस पर रजामंद हुई थी कि संकट से निकलने की योजना के तहत आईएमएफ विशेषज्ञ की विशेष निगरानी प्रक्रिया होगी.

इटली पर 1,900 करोड़ यूरो को कर्ज है. कर्ज संकट और देश की बहुत धीमी विकास दर की वजह से बीते हफ्तों में दुनिया भर के बाजार हिले हैं. आशंका जताई जाने लगी है कि आर्थिक संकट में फंसे यूरो जोन के अन्य देशों ग्रीस, आयरलैंड और पुर्तगाल की तरह इटली को भी बेलआउट पैकेज की जरूरत पड़ सकती है.

मारियो मोंटी ने 16 नवंबर को इटली की कमान संभाली है. सिल्वियो बर्लुस्कोनी के इस्तीफे के बाद राष्ट्रपति के आदेश पर मोंटी ने प्रधानमंत्री पद संभाला और नई सरकार गठित की. मोंटी यूरोपीय आयोग के पूर्व आयुक्त रह चुके हैं.

रिपोर्ट: एएफपी/ओ सिंह

संपादन: एन रंजन

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