तुर्क मूल की महिला अब जर्मन मंत्री | ताना बाना | DW | 23.04.2010
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ताना बाना

तुर्क मूल की महिला अब जर्मन मंत्री

पिछले आम चुनावों के बाद जर्मनी में पहली बार विदेशी मूल का कोई व्यक्ति मंत्री बना. देश के स्वास्थ्य मंत्री फिलिप रोएसलर का जन्म विएतनाम में हुआ और उन्हें जर्मनी में गोद लिया गया था. अब एक महिला भी प्रादेशिक मंत्री बनी हैं

आईगुएल ओएचकान

आईगुएल ओएचकान

जर्मनी के लोवर- सैक्सनी राज्य में तुर्क मूल की आईगुएल ओएचकान समाज कल्याण, स्वास्थ्य और विदेशी प्रवासियों के सामाजिक समन्वीकरण की मंत्री बनी हैं.

लंबे काले बालों वाली आईगुएल ओएचकान ने 38 साल की ही उम्र में काफी सफलताएं हासिल की हैं. वे एक सफल वकील हैं, एक फर्म में क्षेत्रीय मार्केटिंग मैनेजर और सैंकड़ों लोगों की बॉस रहीं हैं. 2004 से वे राजनीति में सक्रिय हैं और अब एक राज्य में मंत्री बनी हैं. वे इसलाम को मानती हैं, शादी शुदा हैं और उनका 7 साल का एक बेटा है. ऐसे में आईगुएल जर्मनी में विदेशी मूल की लाखों महिलाओं के लिए आदर्श बन गईं हैं. वे कहती हैं :

मै इसको बोझ नहीं मानती, इसे सकारात्मक तरीके से देखतीं हूं कि मुझे आदर्श माना जा रहा है. यह एक संकेत है कि लोवर-सैक्सनी में पहली बार विदेशी मूल के लोगों के पास आगे बढ़ने के समान अवसर हैं. मैने जर्मनी में बहुत ही अच्छी शिक्षा पाई है. मुझे बहुत ही अच्छा प्रशिक्षण मिला है. और अब आप देखिए, इसका परिणाम क्या है. इस बात को मैं युवाओं के सामने लाना चाहती हूं. अच्छा काम कर दिखाने और हर चीज़ में हिस्सा लेने से लाभ होता है. - आइएगुल ओएचकान

आईगुएल के माता पिता 1960 के दशक में तुर्की से जर्मनी आए. वे दर्जी थे. वैसे, आईगुएल के नाम का शाब्दिक अर्थ है चंद्रगुलाब, पर कहने का मतलब है चंद्रमुखी. 2004 में आईगुएल वर्तमान जर्मन चांसलर अंगेला मैर्कल की सीडीयू पार्टी की सदस्य बनीं, फिर 2008 में हैम्बर्ग में एक विधायक और अब लोवर-सैक्सनी में मंत्री. आईगुएल कहतीं हैं कि वह ऐसे लोगों को राजनीति की तरफ़ आकर्षित करना चाहतीं हैं, जिन्होंने शायद पहले राजनीति में कभी दिलचस्पी ही नहीं दिखाई हो. आईगुएल आत्मविश्वास से भरी हैं और कहतीं हैं कि उनके बारे में हमेशा इसी बात पर ज़ोर देना कि वह तुर्क मूल की हैं, पर्याप्त नहीं है.

Christian Wulff

लोअर सैक्सनी के मुख्यमंत्री क्रिस्टियान वुल्फ़

मै किसी कोटे पर तो आगे नहीं आई हूं, कि हां अब समय आ गया है एक विदेशी मूल के मंत्री का भी. और फिर, यह सवाल दूसरों से भी पूछा जाना चाहिए. मुझे तो ऐसा नहीं लगता. मैं इस लिहाज़ से अपने आप को देखना भी नहीं चाहती हूं. मैं जर्मनी में पली बढी हूं, मैंने यहां शिक्षा पाई हैं, मैं पर्फैक्ट जर्मन बोल सकती हूं और कई दूसरी भाषाएं भी. मेरे अंदर ऐसे गुण हैं जो दूसरों को भी प्रभावित करते हैं. - आइएगुल ओएचकान

जर्मनी में तुर्क समुदाय विदेशियों का सबसे बड़ा समुदाय हैं. करीब 60 लाख तुर्क या तुर्की मूल के लोग जर्मनी में रहते हैं. साथ ही इटली, पूर्व युगोस्लाविया, पूर्व सोवियत संघ, ईरान, ग्रीस या अफ़गानिस्तान के लोग भी जर्मनी में देखने को मिलते हैं. भारतीयों या पाकिस्तानियों की संख्या दूसरे देशों की तुलना में काफी कम है. कुल क़रीब 80 000. लोवर- सैक्सी के मुख्यमंत्री क्रिस्टियान वुल्फ कहते हैं कि सिर्फ तुर्क मूल का होना वैश्विकरण के ज़माने में पर्याप्त नहीं है, प्रतिभा की भी ज़रूरत है.

हमें यह समझना होगा कि जर्मन बुंडस्लीगा के फ़ुटबॉल क्लब वैर्डर ब्रेमेन ने मेहसूत ओएज़ील को इसलिए तो अपनी टीम में शामिल नहीं किया कि वह तुर्क मूल का है, बल्कि इसलिए कि वह अच्छा फुटबॉल खेलता है. आईगुएल ओएचकान के मामले में भी ऐसा ही है. चाहे फुटबॉल हो, संगीत हो या फिल्म की दुनिया, हर जगह तुर्क मूल की हस्तियां अब देखने को मिलती हैं. और अब राजनीति में भी. लोवर- सैक्सनी के लोग खुले ख़यालों वाले लोग हैं. वे उन लोगों को देखकर खुश होते हैं, जो उनके राज्य को आगे बढाने की कोशिश करते हैं. - क्रिस्टियान वुल्फ़

करीब 8 करोड़ की आबादी वाले जर्मनी में इस वक्त करीब डेढ़ करोड़ विदेशी रहते हैं. खासकर ग्रामीण इलाकों में अब भी उन्हे अक्सर पूर्वाग्रहों का सामना करना पड़ता है. कई तो शरणार्थी के तौर पर जर्मनी आते हैं और उन्हे समाज में घुलने-मिलने में दिक्कत होती है. अक्सर यह भी देखा जाता है कि विदशी मूल के बच्चों की जर्मन भाषा कमज़ोर होती है. आईगुएल का मानना है कि विदेशी मूल के लोगों में जो गुण हैं, उनका समर्थन करना चाहिए. उदाहरण के लिए कि वह दो अलग अलग समाजों और संस्कृतियों को जानते हैं, अलग भाषाएं बोलते हैं, वे पुल और मध्यस्थ बन सकते हैं. इससे अंततः सब का लाभ हो सकता है. आईगुएल का लक्ष्य हैं कि छोटी उम्र में विदेशी मूल के बच्चे भी किंडरगार्डन जाएं और विदेशी मूल के ज़्यादा से ज़्यादा युवा स्कूली पढ़ाई पूरी करें. आईगुएल को मीडिया बहुत पसंद करता रहा है क्योंकि वह अपना पक्ष बहुत ही कुशल और स्पष्ट तरीके से रख सकतीं हैं. इस क्षमता को आईगुएल अब अपने काम के लिए इस्तेमाल करना चाहतीं हैं, ताकि हर क्षेत्र में विदेशी मूल के लोगों को समर्थन मिले.

रिपोर्ट: प्रिया एसेलबोर्न

संपादन: उज्ज्वल भट्टाचार्य

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