तकनीकी व प्रबंधन संस्थानों में इस साल बेहतर प्लेसमेंट | भारत | DW | 03.12.2020

डीडब्ल्यू की नई वेबसाइट पर जाएं

dw.com बीटा पेज पर जाएं. कार्य प्रगति पर है. आपकी राय हमारी मदद कर सकती है.

  1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages
विज्ञापन

भारत

तकनीकी व प्रबंधन संस्थानों में इस साल बेहतर प्लेसमेंट

कोरोना महामारी के दौरान लॉकडाउन से आर्थिक मंदी की आशंका जताई जा रही थी. भारत के तकनीकी व प्रबंधन संस्थानों में इस साल बेहतर प्लेसमेंट से अर्थव्यवस्था सुधरने की उम्मीदें जगी हैं.

कोरोना महामारी और उसके कारण हुए लंबे लॉकडाउन व आर्थिक मंदी की वजह से अंदेशा जताया जा रहा था कि भारत के इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट कालेजों से पास होने वाले छात्रों को शायद इस साल पहले की तरह नौकरियां नहीं मिलेंगी. लेकिन हाल में कई आईआईटी और आईआईएम के प्लेसमेंट के आंकड़े उत्साहजनक रहे हैं. आईआईटी रुड़की में एक छात्र को सर्वाधिक 80 लाख का सालाना घरेलू पैकेज मिला है जो एक रिकार्ड है. बीते साल यह रकम 62 लाख थी. वहीं रुड़की और आईआईटी मुंबई के कई छात्रों को डेढ़-डेढ़ करोड़ तक का का इंटरनेशनल पैकेज मिला है. इसी तरह आईआईटी, मद्रास और खड़गपुर में भी शुरुआती नतीजे काफी उत्साहवर्द्धक रहे हैं. इन संस्थानों में बीते साल के मुकाबले ऑफर भी बढ़े हैं और वेतन भी. साथ ही कैंपस में आने वाली कंपनियों की तादाद भी बढ़ी है. यह बेहद सकारात्मक संकेत हैं.

नौकरियों की भरमार

देश भर के तमाम भारतीय तकनीकी संस्थानों (आईआईटी) और भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) में प्लेंसमेंट का सीजन इसी सप्ताह शुरू हुआ है. कोरोना महामारी की वजह से यह प्रक्रिया भी ऑनलाइन ही चल रही है. इससे कई तरह की आशंकाएं जताई जा रही थीं. मसलन मंदी के इस दौर में जानी-मानी कंपनियां नौकरी के ऑफर के साथ आएंगी या नहीं और अगर आएंगी भी तो ऑनलाइन प्रक्रिया कितनी कारगर साबित होगी. बीते साल जिन छात्रों को नौकरियां मिली थीं उनमें से कइयों के ऑफर वापस ले लिए गए थे और बाकी ज्यादातर लोग भी अब तक ज्वायन नहीं कर सके हैं. ऐसे में इस साल आशंका स्वाभाविक थी. लेकिन इन तमाम आशंकाओं को निराधार साबित करते हुए पहले दिन से ही प्लेसमेंट की शानदार तस्वीरें सामने आ रही हैं.

Indien Wirtschaftskraft

फाइल

आईआईटी रुड़की और आईआईटी कानपुर में सोमवार को कैंपस प्लेसमेंट के पहले दिन पांच छात्रों को 1.54 करोड़ रुपये का सालाना पैकेज मिला. इनमें रुड़की के तीन और कानपुर के दो छात्र शामिल हैं. आईआईटी रुड़की में किसी छात्र को मिलने वाला यह अब तक का सबसे बड़ा पैकेज है. इससे पहले रविवार को आईआईटी बीएचयू के चार छात्रों को डेढ़ करोड़ और आईआईटी मुंबई में दो छात्रों 1.39 करोड़ से ज्यादा का पैकेज मिला था.
आईआईटी रुड़की की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि सोमवार को शुरू हुए कैंपस प्लेसमेंट में एक अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनी ने कंप्यूटर साइंस, इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग फिजिक्स स्ट्रीम के छात्रों को सालाना 1.54 करोड़ रुपये का पैकेज ऑफर किया है. इसके अलावा एक अन्य छात्र को 80 लाख रुपये का सालाना पैकेज ऑफर हुआ है. 15 दिसंबर तक चलने वाले प्लेसमेंट के पहले दिन 30 कंपनियों ने 322 छात्रों को नौकरियां दीं हैं.

लाखों की नौकरियां
आईआईटी कानपुर में अमेरिकी कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने जहां दो छात्रों को 1.54 करोड़ रुपये का पैकेज दिया है, वहीं एक अन्य अमेरिकी कंपनी इंटेल ने चार छात्रों को 62.28 लाख रुपये सालाना की नौकरी दी है. संस्थान में प्लेसमेंट के पहले ही दिन 240 छात्रों को नौकरियां मिलीं. 15 दिसंबर तक चलने वाले कैंपस प्लेसमेंट के दौरान माइक्रोसॉफ्ट, इंटेल, गोल्डमैन, जीई इलेक्ट्रॉनिक्स समेत 100 से ज्यादा कंपनियों के हिस्सा लेने की उम्मीद है. आईआईटी बीएचयू में रविवार को शुरू हुए कैंपस प्लेसमेंट में करीब 450 छात्रों को नौकरियों के ऑफर मिल चुके हैं. संस्थान के प्रोफेसर अनिल कुमार अग्रवाल के मुताबिक, प्लेसमेंट के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की करीब 250 कंपनियां आएंगी.
आईआईटी धनबाद में भी 24 दिसंबर तक चलने वाले कैंपस प्लेसमेंट के पहले चरण में अब तक 21 छात्रों को 43.31 लाख तक का सालाना पैकेज मिल चुका है, जो एक रिकार्ड है. संस्थान के डॉ. एसके सिन्हा का कहना है कि इस बार 'एक छात्र, एक नौकरी' का नियम तय किया गया है.

आईआईटी मुंबई में डच फर्म आप्टिवर ने 1.57 लाख यूरो (1.39 करोड़) का सर्वाधिक अंतरराष्ट्रीय ऑफर दिया है. उसके अलावा क्वालकॉम, वर्ल्डक्वांट, मोरगन स्टेनले और उबर जैसी कंपनियों ने भी अबकी 35 लाख से 46.41 लाख रुपये तक के सालाना पैकेज के ऑफर दिए हैं. मुंबई, मद्रास और दूसरी आईआईटीज में माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, टेक्सास इंस्ट्रूमेंट्स, बॉस्टन कंसल्टिंग ग्रुप और एप्पल प्रमुख नियोक्ता के तौर पर उभरे हैं. इस साल तमाम संस्थानों में प्री-प्लेसमेंट ऑफर (पीपीओ) की तादाद भी पिछले साल के मुकाबले बढ़ गई है. आईआईटी दिल्ली में भी पहले दिन ही तीन सौ छात्रों को नौकरियां मिल गईं. इस साल कई नई कंपनियां भी नौकरियां देने कैंपस में आ रही हैं. इससे संस्थान प्रबंधन में काफी उत्साह है.

प्रबंधन संस्थानों की स्थिति

आईआईटी के अलावा भारतीय प्रबंधन संस्थानों (आईआईएम) में भी इस बार प्लेसमेंट को लेकर तमाम आशंकाएं गलत साबित हुई हैं. आईआईएम अहमदाबाद में एक दिसंबर से शुरू प्लेसमेंट सीजन के दौरान देश-विदेश की तमाम कंपनियां आकर्षक पैकेज के साथ नौकरियां दे रही हैं. ऐसे दूसरे संस्थानों में भी प्लेसमेंट प्रक्रिया की तस्वीर बेहतर है. आईआईएम कोझिकोड, लखनऊ और कलकत्ता में तो एक दिन में ही तमाम छात्रों के समर प्लेसमेंट की प्रक्रिया पूरी हो गई और वह भी बेहतर पैकेज और प्रोफाइल के साथ. इन तमाम संस्थानों में एमबीए के छात्रों की तादाद पांच सौ या उससे ज्यादा है.

आईआईएम कलकत्ता की प्लेसमेंट कमिटी के अध्यक्ष प्रोफेसर अभिषेक गोयल कहते हैं, "महामारी औऱ आर्थिक मंदी की वजह से इस साल कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा था. लेकिन इस बार प्लेसमेंट की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होने के बावजूद हम इन चुनौतियों से प्रभावी तरीके से निपटने में सक्षम रहे हैं. हमारी तमाम आशंकाएं गलत साबित हुई हैं. यह सीजन बीते साल के मुकाबले बेहतर रहा है.”

आईआईएम अहमदाबाद की प्लेसमेंट कमिटी के अध्यक्ष अमित करण ने बीते सप्ताह कहा था, "इस मुश्किल दौर में भी नियोक्ताओं ने भारतीय प्रबंधन संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों की प्रतिभा पर भरोसा जताया है. शायद कंपनियों को अगले साल हालात बेहतर होने की उम्मीद है. मौजूदा दौर में जब कोविड का खतरा टला नहीं है, पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन है और गतिविधियां सीमित हैं, विभिन्न तकनीकी और प्रबंध संस्थानों में प्लेसमेंट और नौकरियों के बेहतर ऑफर उद्योग जगत के बदलते मूड और सकरात्मक रवैए का संकेत हैं.”

शिक्षाशास्त्रियों का कहना है कि अब कई देशों में कोरोना के टीके के विकसित होने की खबरों से अर्थव्यवस्था में सुधार की उम्मीद जगी है. इसलिए कंपनियां आकर्षक पैकेज पर नौकरियां दे रही हैं. एक प्रबंधन संस्थान में अर्थशास्त्र पढ़ाने वाले प्रोफेसर निरंजन माइती कहते हैं, "बीते साल नौकरियां तो अच्छी मिली थीं. लेकिन कोरोना, उसकी वजह से लागू लॉकडाउन और यात्रा पर लगी पाबंदियों के कारण दर्जनों कपंनियों ने अपने ऑफर वापस ले लिए थे. लेकिन अब हालात में बदलाव आया है. इसके अलावा जल्दी ही कोरोना का टीका सामने आने के संकेत हैं. इससे अर्थव्यवस्था में जान आ रही है.” उनका कहना है कि इन कंपनियों को महसूस हो रहा है कि अगले साल कोरोना के टीके के बाद अर्थव्यवस्था में आने वाले उछाल के साथ तालमेल के लिए उनको मैनपावर की जरूरत होगी. यही वजह है कि उनके ऑफर पहले से आकर्षक नजर आ रहे हैं. यह एक बेहतर संकेत है. दरअसल यह वर्ष 2020 की सबसे बढ़िया खबर भी है.

__________________________

हमसे जुड़ें: Facebook | Twitter | YouTube | GooglePlay | AppStore

DW.COM

संबंधित सामग्री