तंबाकू में घुलती महिलाओं की सेहत | विज्ञान | DW | 01.06.2010
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विज्ञान

तंबाकू में घुलती महिलाओं की सेहत

शाहरुख और सलमान अगर सिगरेट पी सकते हैं तो माधुरी दीक्षित कहां पीछे हैं. कैटरीना कैफ़ भी पर्दे पर सिगार सुलगाती देखी गईं और करीना कपूर भी. विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर कितना काबू पा सके हम सिगरेट बीड़ी पर.

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अगर फ़ैशन से जुड़े लोगों और मॉडल्स की सुनें तो वे अपने वज़न पर काबू रखने के लिए सिगरेट पीती हैं. कुछ महिलाएं तो ऐसा भी मानती हैं कि ज़िंदगी में कुछ नया करने के लिए उन्होंने पहली सिगरेट सुलगाई औऱ वो कब लत बन गयी पता ही नहीं चला.

आज यानी 31 मई को दुनिया तंबाकू रहित दिवस मनाती है. लेकिन दुनिया जब बड़े सितारे और आदर्श समझे जाने वाले लोगों को ही सरेआम सिररेट पीते देखती है, तो उसका मन भी एक दो कश लगाने को मचल जाता है.

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युवा मीडियाकर्मी साशा का कहना है कि, "मैंने नौवीं क्लास से सिगरेट पीना शुरू कर दिया था. पहले ये सिर्फ एक शौक था, लेकिन अब ये मेरे लिए एक आदत बन गई है. और अब मेरा शरीर निकोटीन के बिना नहीं रह सकता."

बहाने चाहे कितने बनाए जाएं लेकिन तंबाकू से होने वाले नुकसान को अनदेखा नहीं किया जा सकता. भारत में एडवोकेसी फ़ॉरम फ़ॉर टोबेको कंट्रोल की डॉक्टर मीरा आग़ी का कहना है कि सिगरेट पीना महिलाओं के लिए भी उतना ही हानिकारक है जितना पुरुषों के लिए. लेकिन महिलाओं के स्वास्थ के लिए ये अधिक नुक़सानदेह होता है क्योंकि तंबाकू का असर पैदा होने वाले बच्चों पर काफ़ी बुरा हो सकता है.

फ़ेफ़ड़ों का कैंसर भी सिगरेट पीने वाले पुरुषों के मुक़ाबले महिलाओं में ज़्यादा देखा गया है. जानकारों का मानना है कि सिगरेट पीने की आदत पड़ने का सबसे बड़ा कारण है ''पीयर प्रेशर'' यानि दोस्तों का दबाव होता है.

भारत में सार्वजनिक जगहों पर सिगरेट पीने पर पाबंदी है. लेकिन इसका कितना पालन होता है, हम सबको पता है. तंबाकू के बुरे असर दिखाने के लिए सिगरेट की डिब्बियों पर खतरनाक तस्वीरें छापी जाने लगी हैं लेकिन इससे भी सिगरेट बीड़ी पीने वालों की संख्या कम नहीं हो पाई है.

भारत सरकार देश में बढ़ते तंबाकू के इस्तेमाल को कम करने के लिए कई कदम उठा रही है. लेकिन इस अभियान में महिलाओं और तंबाकू के सेवन से उन्हें होने वाले ख़तरों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है. तंबाकू सेवन के ख़िलाफ़ काम कर रहे लोगों की मांग है कि इन अभियानों में न सिर्फ तंबाकू सेवन पर पूरी तरह रोक लगाई जाए बल्कि महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी विषयों को भी गंभीरता से लिया जाना चाहिए.

सवाल यह है कि अपनी फ़िगर को बनाए रखने के लिए योगा करने वाली और मन को शांति देने के लिए डांस या फिर मेडिटेशन करने वाली अभिनेत्रियों को क्या ये बताना ज़रूरी है कि निकोटिन का शरीर पर बुरा असर होता है.

रिपोर्ट: एजेंसियां/तनुश्री सचदेव

संपादन: उ भ

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