ड्रग एडिक्ट क्या दूर कर पाएँगे अंगदान की कमी? | दुनिया | DW | 17.04.2018
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दुनिया

ड्रग एडिक्ट क्या दूर कर पाएँगे अंगदान की कमी?

घातक मात्रा में नशीली दवाओं के इस्तेमाल के कारण अंगदान करने वालों की तादाद बढ़ गई है. रिसर्चरों का कहना है कि उनके अंग भी अंगदान करने वाले आम लोगों जैसे ही हैं और इससे ट्रांसप्लांट के मरीजों की समस्या हल हो सकती है.

जॉन्स होपकिंस यूनिवर्सिटी के रिसर्चरों ने पता लगाया है कि इस तरह के अंगों का ट्रांसप्लांट साल 2000 के बाद करीब 24 गुना बढ़ गया है. 2016 में महज 149 ट्रांसप्लांट नशीली दवा की ज्यादा मात्रा लेने वालों के अंगदान से हुए लेकिन 2016 में यह संख्या 3,533 तक पहुंच गई.

अधिक मात्रा में नशीली दवाएं लेने के कारण लोगों की मौत ज्यादातर अस्पताल के बाहर होती है और ट्रांसप्लांट में यह एक बड़ी बाधा है. बावजूद इसके ऐसे लोगों के अंगदान की अमेरिका में हिस्सेदारी 13 फीसदी तक पहुंच गई है. रिसर्च का नेतृत्व कर रहे डॉ क्रिश्टीन डुरांड ने एनल्स ऑफ इंटरनल मेडिसिन में लिखा है, "अंगों की कमी का यह आदर्श या लंबे समय के लिए समाधान नहीं है." हालांकि अमेरिका में 115,000 लोग प्रत्यारोपण के लिए अंगों के इंतजार में हैं. हॉपकिंस की रिसर्च टीम का कहना है कि नशीली दवाओं के पीड़ितों के अंग का इस्तेमाल "आसान बनाया जाना चाहिए" क्योंकि दूसरे विकल्प का इंतजार कर रहे लोग मर सकते हैं. 

रिसर्चरों ने यूएस रजिस्ट्री के आंकड़ों का इस्तेमाल कर 2000 से 2016 के 338,000 मरीजों के ट्रांसप्लांट की तुलना की. इनके लिए अंगदान करने वालों में बीमारी, चोट या फिर नशीली दवाओं की ज्यादा मात्रा लेने के कारण मौत के शिकार बने लोग थे.

आमतौर पर ओवरडोज के पीड़ितों के अंग का ट्रांसप्लांट कराने वाले मरीजों का जीवन सामान्य ही रहता है. वास्तव में तो वो बीमारी से मरने वालों की तुलना में कई बार बेहतर भी होते हैं. रिसर्चरों के मुताबिक इसकी वजह यह है कि ओवरडोज से मरने वाले लोग आमतौर पर युवा होते है और उनमें हाई ब्लड प्रेशर या फिर ब्लड शुगर या अंगों पर असर डालने वाली इस तरह की बीमारियां नहीं होती.

रिसर्च में पता चला कि ओवरडोज के कारण मिलने वाले अंगों में दूसरे अंगों की तुलना में एचआईवी, हिपेटाइटिस सी और दूसरे संक्रामक रोगों की चपेट में आने का "ज्यादा खतरा" होता है. हालांकि हॉपकिंस टीम का कहना है कि दान किए गए सभी अंगों के बेहतर परीक्षणों और उसमें संक्रमण का पता लगने के कारण ट्रांसप्लांट के मरीजों का जोखिम कम हो गया है और मरीजों की अलग अलग स्थिति को ध्यान में रख कर विकल्पों का फैसला किया जाना चाहिए.

अमेरिका में ट्रांसप्लांट के तंत्र की देखरेख करने वाले यूनाइटेड नेटवर्क फॉर ऑर्गन शेयरिंग के चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉ डेविड क्लासेन का कहना है, "यह बात अब समझ में आ गई है कि ये अंग अच्छा काम करते हैं और बहुत से फायदे देते हैं."

एनआर/एमजे (एपी)

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