डॉक्टरों से ज्यादा सटीक साबित होती मशीनी बुद्धि | विज्ञान | DW | 06.01.2018
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विज्ञान

डॉक्टरों से ज्यादा सटीक साबित होती मशीनी बुद्धि

लंग कैंसर और दिल की बारीक बीमारी अक्सर अनुभवी डॉक्टरों की पकड़ में भी नहीं आती हैं. लेकिन मशीनी बुद्धि इन बीमारियों को जबरदस्त ढंग से दबोच रही है.

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए ब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विस बेहद गंभीर बीमारियों को पकड़ने में सफल हुई है. दुनिया भर में हार्ट की नसों से जुड़ी बीमारियां अक्सर बेहद कुशल डॉक्टरों को भी गच्चा दे जाती हैं. फिलहाल हृदयरोग विशेषज्ञ स्कैन से मिलने वाले धड़कन के ग्राफ देखते हैं. लेकिन इससे भी हार्ट अटैक या हार्ट अटैक के खतरे का 100 फीसदी अंदाजा नहीं लगता. पांच मरीजों में एक की बीमारी अब भी पकड़ में नहीं आती.

जॉन रेडक्लिफ हॉस्पिटल में विकसित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम स्कैन से मिले ग्राफ की बेहद सटीक समीक्षा करता है. मशीन मिलीमीटर से छोटे उतार या चढ़ाव को पकड़ लेती है. टेस्ट के दौरान एक तरफ मशीन रखी गई और दूसरी तरफ बेहद अनुभवी डॉक्टर थे. बीमारी पकड़ने के मामले में मशीन ने डॉक्टरों को बुरी तरह हरा दिया.

मशीन में पिछले सात साल के दौरान चेक किए गए 1,000 मरीजों की स्कैन रिपोर्ट डाली गई. वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट प्रोफेसर लीसन ने कहा, "एक कार्डियोलॉजिस्ट होने के नाते में हम स्वीकार करते हैं कि हम हमेशा इसे सही सही नहीं पहचान पाते हैं. लेकिन अब हमारे पास इसे बेहतर करने की संभावना है." ब्रिटेन में हर साल 60,000 हार्ट स्कैन होते हैं. इनमें से करीब 12,000 मामलों में बीमारी पकड़ में नहीं आती.

वैज्ञानिकों का दावा है कि उन्होंने मशीनी बुद्धि वाला सिस्टम फेफड़े के कैंसर और दिल की बीमारियों को सटीक ढंग से पहचान रहा है. सिस्टम लाखों पाउंड का खर्च बचाएगा.

2017 की गर्मियों में नेशनल हेल्थ सर्विस के अस्पतालों में हार्ट डिजीज टेक्नोलॉजी का मुफ्त परीक्षण किया गया. ब्रिटिश ब्रॉडकॉस्टिंग कॉर्पोरेशन (बीबीसी) से बात करते हुए जेनेटिक्स विशेषज्ञ जॉन बेल ने कहा, "एनएचएस करीब 2.2 अरब पाउंड पैथोलॉजी सेवाओं पर खर्च करता है. इस खर्च को 50 फीसदी तक कम किया जा सकता है."

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