″डर के विरुद्ध हो ग्लोबल मीडिया″ | दुनिया | DW | 30.06.2014
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दुनिया

"डर के विरुद्ध हो ग्लोबल मीडिया"

दुनिया भर के मीडिया से जुड़े लोग, नेता और शोधकर्ता बॉन के ग्लोबल मीडिया फोरम के दौरान इकट्ठे हुए हैं. सम्मेलन की शुरुआत में ही मिस्र के व्यंग्यकार बासेम यूसुफ ने दबाव बढ़ाने के लिए डर के माध्यम पर नजर डाली.

उनका भाषण मजाक, हंसी और व्यंग्य से भरपूर खास तौर पर डर के विरोध में. सोमवार को उन्होंने साफ किया कि क्यों डर लोकतंत्र और आजादी के लिए खतरा है. अरब देशों में यूसुफ अपने व्यंग्यात्मक समाचारों के कारण एक मशहूर कलाकार बन गए हैं. "ताकतवरों का हथियार डर है. वो हमें धमकाती है और हमारी अच्छाई, हमारी मानवीयता और सम्मान खत्म कर देती है." यूसुफ जानते हैं कि वो किस बारे में बात कर रहे हैं क्योंकि उन पर मिस्र की सत्ता ने राष्ट्रपति मुहम्मद मुर्सी को अपमानित करने और इस्लाम की निंदा का आरोप लगाया है. कुछ समय बाद उनके टीवी शो को बंद कर दिया गया.

ग्लोबल मीडिया फोरम में यूसुफ ने डर को केंद्र बनाया है. वो कहते हैं, जब आप हंसते हैं तो आपको कोई डर नहीं होता. इंटरनेट डर के खात्मे का अहम माध्यम है." डर और आजादी के बीच की लड़ाई हर युवा के दिल और दिमाग में जारी है. जो खुद को किसी कीमत पर दबने नहीं देना चाहते और इंटरनेट के जरिए विचारों का लेन देन कर रहे हैं. इससे कभी न कभी हर तरह के फासीवाद का खात्मा होगा.

यूसुफ से पहले यूरोप परिषद के महासचिव थोरब्योर्न यागलांड ने अपने विचार रखे कि इंटरनेट के जरिए किस तरह के मौके और जोखिम हैं. उन्होंने कहा, "इंटरनेट के कारण दुनिया और स्थानीय लोग आपस में जुड़ सकते हैं, राजनीतिक प्रक्रिया में हिस्सा ले सकते हैं." इसी कारण तुर्की में फेसबुक और ट्विटर पर लगी रोक के कारण आजादी के अधिकार पर हमला हुआ. और इसकी अहमियत के कारण ही फिर अदालत ने ये रोक हटाई.

सबसे बढ़िया प्लेटफॉर्म

डॉयचे वेले के महानिदेशक पेटर लिम्बुर्ग ने कहा, "सूचना और भागीदारी के लिए आज सबसे बढ़िया माध्यम इंटरनेट है. एक शानदार खोज जो हमारे जीवन को विविध, रंग बिरंगा और संपन्न बनाती है. उसकी वैश्विक जीत ने संचार और मीडिया के उपयोग में क्रांति पैदा कर दी है. यह वैश्वीकरण की रीढ़ है. इससे विकास, शिक्षा और सामाजिक भागीदारी के कई मौके पैदा होते हैं."

चाहे काहिरा का तहरीर चौक हो, इस्तांबुल का गेजी पार्क या फिर कीव का मैदान. लिम्बुर्ग का कहना था कि सोशल मीडिया के कारण लोगों की भागीदारी बढ़ी. इतना ही नहीं लिम्बुर्ग का यह भी कहना था कि इंटरनेट का दुरुपयोग, भले ही वह जासूसी, अपराध या किसी और कारण से हो रहा हो, वह अर्थव्यवस्था, राजनीति और समाज के लिए बड़ी चुनौती है, और निश्चित ही मीडिया के लिए भी.

रिपोर्टः मार्टिन मुनो/एएम

संपादनः ए जमाल