डंडे छोड़ कर आरती की थाली थामती पुलिस | भारत | DW | 13.04.2020
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भारत

डंडे छोड़ कर आरती की थाली थामती पुलिस

तालाबंदी के शुरूआती दौर में उसे लागू कराने के अभियान में पुलिस का एक वीभत्स चेहरा नजर आया. अब ऐसी खबरें आ रही हैं जिनसे लग रहा है कि पुलिस डंडों और मारपीट के आगे भी सोच रही है और कुछ अनूठे तरीकों का सहारा ले रही है.

पूरे देश में 24 मार्च से जारी 21 दिनों की तालाबंदी की समय सीमा अब खत्म होने वाली है. कई राज्यों ने इसे जारी रखने का भी फैसला ले लिया है. जैसे लोगों के लिए इस तरह की तालाबंदी एक नया अनुभव था, उसी तरह प्रशासन के लिए भी यह एक नया प्रयोग था. इसे कड़ाई से लागू कराने की जिम्मेदारी पूरे देश में पुलिस के कंधों पर थी. शुरूआती दौर में तालाबंदी लागू कराने के अभियान में देश के कई इलाकों में पुलिस का एक वीभत्स चेहरा नजर आया, एक ऐसा चेहरा जिसे देखकर आम लोगों के मन में पुलिस के प्रति डर और नफरत के आलावा शायद और कोई भावना ना आई हो.

लेकिन अब कई इलाकों से ऐसी खबरें आ रही हैं, जिनसे लग रहा है कि पुलिस डंडों और मारपीट के आगे भी सोच रही है और कुछ अनूठे तरीकों का सहारा ले रही है. पिछले कुछ दिनों से कई राज्यों से स्थानीय पुलिस द्वारा तालाबंदी तोड़ कर घर से बाहर निकलने वालों की आरती उतारने की खबरें आ रही हैं. ऐसी खबरें जम्मू, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र से भी आईं.

उत्तराखंड के ऋषिकेश में जब पुलिस को विदेशी नागरिकों का एक समूह तालाबंदी का उल्लंघन कर घूमता हुआ नजर आया, तो उन पर पुलिस ने डंडे नहीं बरसाए. उन्हें कागज पर 500 बार 'आई ऐम सॉरी' लिखने को कहा.

तो दूसरी तरफ जयपुर पुलिस ने धमकी दी है कि अगर कोई भी तालाबंदी का उल्लंघन करता पाया गया तो उसे एक कमरे में बंद कर के 'मसकली 2.0' का गाना लूप पर चला कर सुनाया जाएगा. 

'मसकली 2.0' एक नई हिंदी फिल्म का गीत है. 2009 में आई हिंदी फिल्म 'दिल्ली 6' के हिट गीत 'मसकली' को रीमिक्स कर इस गीत को बनाया गया है. सोशल मीडिया पर पिछले कई दिनों से इसकी आलोचना हो रही है. पुराने 'मसकली' गीत के प्रेमी रीमिक्स वाले गीत को बुरा बता रहे हैं.

कई राज्यों में पुलिस ने बुरे गाने चलाने की धमकी की जगह खुद ही संगीत का सहारा ले लिया. पुलिसकर्मियों ने खुद हाथ में माइक्रोफोन लिया और गाना गा कर आम लोगों तक तालाबंदी का संदेश पहुंचाने की कोशिश की.

अहमदाबाद पुलिस ने अपने अधिकारियों से गवाने की जगह गायकों को बुला कर आम लोगों का मनोरंजन किया. कई राज्यों में पुलिस सोशल मीडिया पर क्रिएटिव अभियान चला रही हैं. मुंबई पुलिस हिंदी फिल्मों और सोशल मीडिया का बखूबी सहारा ले रही है.

कहीं कहीं पुलिसवाले तालाबंदी का संदेश लोगों तक पहुंचाने के लिए अपना भेस भी बदल रहे हैं. कहीं वायरस बन रहे हैं तो कहीं भूत.

आम लोगों के लिए प्रशासन का पहला चेहरा पुलिस ही होती है. इसलिए पूरी दुनिया में यह माना जाता है कि पुलिस का लोगों के प्रति रवैया उदार और मानवतापूर्ण होना चाहिए. भारत में तालाबंदी के शुरू के दिनों में डंडे बरसाती, तोड़फोड़ करती पुलिस का भयावह चेहरा सामने आया था. ऐसा लगता है कि पुलिस अब अपनी छवि सुधारने की कोशिश कर रही है.

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