ट्विटर बताएगा लोगों का मूड | मनोरंजन | DW | 21.05.2014
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मनोरंजन

ट्विटर बताएगा लोगों का मूड

दुनिया के किसी हिस्से में किस दिन कितनी मायूसी या कितनी खुशहाली है. लोगों का मूड कैसा है, या कहां लोगों को मदद की जरूरत पड़ सकती है. अगर हर मिनट ये आंकड़े सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर पर मिल जाएं तो?

ऑस्ट्रेलिया के रिसर्चरों ने ऐसा ही टूल तैयार किया है. इसके जरिए दुनिया के अलग अलग हिस्सों में लोगों का मूड रीयल टाइम में जाना जा सकता है. इस ऑनलाइन टूल का नाम है 'वी फील'.

वी फील प्रति मिनट 32,000 ट्वीट्स परख सकता है. अंग्रेजी भाषा में होने वाले कुल ट्वीट का 10 फीसदी हिस्सा है. ट्वीट यूजर का मूड बताते हैं कि वह प्रेम, गुस्से, खीझ, आश्चर्य, दुख या डर जैसे किस मूड को जाहिर कर रहा है.

ऑस्ट्रेलिया के ब्लैक डॉग इंस्टीट्यूट में इस टूल को विकसित करने वाले प्रमुख रिसर्चर हेलेन क्रिस्टेंसेन के मुताबिक वी फील इस बात का पता लगाने में मदद करेगा कि किस जगह लोग कैसा महसूस कर रहे हैं. साथ ही पता लग सकेगा कि कब और कहां जीवन रक्षक सेवाओं की जरूरत हो सकती है. इंस्टीट्यूट अवसाद और मूड संबंधी समस्याओं पर रिसर्च और उनका इलाज करता है.

इंस्टीट्यूट के निदेशक क्रिस्टेंसेन ने बताया, "इस तरह मिलने वाली जानकारी को कम करके नहीं आंका जा सकता. फिलहाल मानसिक स्वास्थ्य के रिसर्चरों द्वारा और जन स्वास्थ्य कार्यक्रमों में पांच साल पुराने जनसंख्या संबंधी आंकड़ों का इस्तेमाल किया जाता है."

दुनिया भर में ट्विटर पर करीब 22.5 करोड़ लोग हर महीने एक्टिव हैं. ट्विटर से मिलने वाले भारी डाटा का विश्लेषण ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख विज्ञान संगठन सीएसआईआरओ और अमेजन की रिमोट कंप्यूटिंग सर्विस द्वारा किया जाता है.

फिलहाल इस प्रोजेक्ट में केवल अंग्रेजी में किए जाने वाले ट्वीट शामिल किए जा रहे हैं. प्रोजेक्ट में अहम मुश्किल है कुछ लोगों के लिंग, पहचान और उनके ठिकाने के बारे में सोशल मीडिया पर पूरी जानकारी का न होना. इन दिक्कतों के बावजूद प्रोजेक्ट रिसर्चर ब्रिडियान ओडी का कहना है कि लोगों को बेहतर ढंग से समझने का यह अपने जैसा पहला टूल है. ये वो लोग हैं जो अपने मूड को ट्वीट के जरिए जाहिर करते हैं.

ब्लैक डॉग इंस्टीट्यूट के रिसर्चर ओडी के मुताबिक, "यह दिखाता है कि हम हर समय लोगों की खबर रख सकते हैं. हम ट्रेंड्स पर नजर रख सकते हैं. और अब इसे प्रमाणित करने की जरूरत है कि ये ट्रेंड वाकई वही दिखा रहे हैं जो वास्तव में हो रहा है."

एसएफ/एजेए (एएफपी)

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