टेबल के नीचे लेनदेन रुके, तो पाकिस्तान के पास पैसा होगा | दुनिया | DW | 17.11.2018
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दुनिया

टेबल के नीचे लेनदेन रुके, तो पाकिस्तान के पास पैसा होगा

पाकिस्तान के राजस्व मंत्री दिन रात इसी चिंता में हैं कि लोगों को टैक्स देने के लिए कैसे तैयार किया जाए. पाकिस्तान की हालत खस्ता है और टैक्स देना तो दूर, रिटर्न फाइल करने वाले लोगों की तादाद आबादी के एक फीसदी से भी कम है.

धन की कमी से जूझ रहा पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के अधिकारियों के साथ बेलआउट पैकेज पर बातचीत करेगा और इस दौरान एक बड़ा मुद्दा यही होगा कि पाकिस्तानी लोगों को सरकार टैक्स देने के लिए कैसे तैयार करेगी. टैक्स की चोरी यहां बहुत आम है और इसकी वजह से सरकार की झोली में धन की लगातार कमी बनी हुई है. 2013 के बाद यह दूसरा मौका है जब पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी आईएमएफ से बेलआउट पैकेज के लिए अनुरोध किया है.

37 साल के राजस्व मंत्री मोहम्मद म्माद अजहर का कहना है कि वह दीर्घकालीन सुधारों की योजना बना रहे हैं. सबसे पहले वह तकनीकी सुधारों के जरिए सरकार को टैक्स चोरों को पकड़ने में सक्षम बनाना चाहते हैं. समाचार एजेंसी रॉयटर्स से बातचीत में अजहर ने कहा, "बहुत से काम किए जाने की जरूरत है."

सबसे कम टैक्स जमा होने की दर से कुछ हद तक अंदाजा हो जाता है कि पाकिस्तान के अस्पतालों और स्कूलों की दुर्दशा क्यों है. तीन महीने पहले सरकार की बागडोर संभालने वाले इमरान खान ने टैक्स वसूली को दोगुना करने की शपथ ली है. इसके लिए वह फेडरल ब्यूरो ऑफ रेवेन्यू (राजस्व विभाग) में सुधार करना चाहते हैं. इमरान खान इस महकमे को "पूरी तरह भ्रष्ट" बताते हैं.

खान ने सत्ता संभालने के बाद राजस्व विभाग के प्रमुख को भी बदला है. हाल के महीनों में राजस्व विभाग ने 350 अमीर लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है. वह ऐसे लोगों को निशाना बना रहा हैं जो बड़ी संपत्तियों के मालिक हैं या फिर महंगी गाड़ियों में घूमते हैं, या फिर व्यापार के सिलसिले में बड़ी लेनदेन करते हैं, मगर टैक्स रिटर्न जमा नहीं करते.

पाकिस्तान का इतिहास बताता है कि सरकार टैक्स सुधारों को लागू करेगी, दोषियों पर कार्रवाई करेगी जैसे बयान तो बहुत दिए जाते हैं लेकिन यह महज घोषणाएं ही बन कर रह जाती हैं. जमीन पर ज्यादा काम नहीं होता. अकसर इसके पीछे राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी को जिम्मेदार ठहराया जाता है. पाकिस्तान की राजनीतिक अर्थव्यवस्था पर किताब लिखने वाले यूसुफ नजर लंदन में सिटीग्रुप के इमर्जिंग मार्केट इक्विटी इन्वेस्टमेंट्स के प्रमुख रह चुके हैं. यूसुफ कहते हैं, "हमारे जैसे देशों में टैक्स तंत्र में सुधार करना बहुत बड़ा काम है. सरकार, बड़े कारोबारी और बड़े जमींदार टैक्स सुधारों को लेकर गंभीर नहीं हैं."

Pakistan, Islamabad: Muhammad Hammad Azhar (Reuters/F. Mahmood)

पाकिस्तान के राजस्व मंत्री मोहम्मद हम्माद अजहर

टैक्स देने वालों में ज्यादा से ज्यादा लोगों को शामिल करने के लिए सरकार ने दो तरह से काम करने की सोची है. एक तरफ वह टैक्स चुराने वालों पर कार्रवाई कर रही है, तो दूसरी तरफ ईमानदारी से टैक्स जमा करने वालों के लिए इसे आसान बनाया जा रहा है. टैक्स चुकाने वालों के लिए सिंगल विंडो सिस्टम लागू किया जा रहा है. अजहर ने बताया कि उनकी टीम सरकार के पास मौजूद कार खरीदारी, बैंक के लेनदेन और विमान यात्रा के ब्योरे पर नजर रख रही है ताकि वह ऐसे अमीर लोगों की पहचान कर सके, जो टैक्स जमा नहीं करते. हालांकि इन ब्योरों को देखने और दोषियों की पहचान करने में थोड़ा वक्त लगेगा.

इस तरह की कोशिशें आईएमएफ को मनाने में कारगर साबित हो सकती हैं और फिर बेलआउट पैकेज पाने का रास्ता साफ हो जाएगा. उम्मीद की जा रही है कि आईएमएफ इसी तरह के कदमों की मांग रखेगा. इससे पहले की सरकार ने जीडीपी के मुकाबले टैक्स वसूली को 10.1 फिसदी से बढ़ा कर 13 फीसदी कर दिया. हालांकि आर्थिक सहयोग और विकास संगठन, ओईसीडी के देशों के औसत, 34 फीसदी से यह अब भी बहुत कम है. सरकार की कर वसूली में ज्यादा इजाफा आयात शुल्क, बिक्री कर और दूसरे अप्रत्यक्ष करों को बढ़ा कर हासिल हुआ. पाकिस्तान सरकार के कुल राजस्व में इनकी हिस्सेदारी करीब 63 फीसदी है. हालांकि आलोचक इन करों को गरीबों पर मार और देश को पीछे धकेलने वाला भी बताते हैं.

पाकिस्तान में पिछले साल केवल 16 लाख लोगों ने टैक्स रिटर्न फाइल किया. इनमें 4 लाख से ज्यादा लोगों की आमदनी टैक्स की सीमा में नहीं आती थी. करीब 2 लाख लोग सबसे कम टैक्स देने वालों में थे और महज साढ़े नौ लाख लोग ही ऐसे थे जिन्होंने इतना टैक्स दिया जिसे सरकार के लिए राजस्व माना जा सके.

Saudi Arabien, Riad: Imran Khan auf der Investment Konferenz (picture-alliance/dpa/A. Nabil)

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान रियाद के इन्वेस्टमेंट कांफ्रेंस में.

नई सरकार ने टैक्स नहीं देने वालों को पकड़ने की राजनीतिक इच्छाशक्ति तो दिखाई है लेकिन इमरान खान की पार्टी में ही इसके लिए आम सहमति नहीं है. टैक्स विशेषज्ञ जीशान मर्चेंट का कहना है कि इमरान कि पार्टी ज्यादा समय तक इस रुख पर कायम नहीं रह पाएगी. रॉयटर्स से बातचीत में उन्होंने कहा, "हमें भाषणबाजी नहीं, कार्रवाई की जरूरत है."

हाल ही में सुधारों को लागू करने का काम शुरू हुआ है. इमरान खान की कैबिनेट ने टैक्स की नीतियों को राजस्व वसूली से अलग कर दिया है. इसका असर यह होगा कि एफबीआर की अब कर नीतियां बनाने में कोई भूमिका नहीं होगी. इससे पहले यह विभाग साल के अंत में कर वसूली के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए नए अप्रत्यक्ष कर लगाने के लिए जाना जाता रहा है.

राजस्व मंत्री के लिए एक बड़ी चुनौती है काले धन को पकड़ना. आमतौर पर संपत्ति, सामान और सेवाओं के लिए नगद भुगतान होता है और ऐसे में टैक्स की चोरी होती है. कई लोगों का मानना है कि यह पाकिस्तान के 310 अरब की आधिकारिक अर्थव्यवस्था से कहीं ज्यादा बड़ी है. अजहर का कहना है, "हम नगद अर्थव्यवस्था पर रोक लगाना चाहते हैं, यह सारा पैसा टेबल के नीचे से दिया जाता है और हम इसे मुश्किल बनाना चाहते हैं."

एनआर/आईबी (रॉयटर्स)

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