टीवी, कंप्यूटर, कार और बीमार | विज्ञान | DW | 12.02.2014
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विज्ञान

टीवी, कंप्यूटर, कार और बीमार

विकास करते देशों में कार, टीवी और कंप्यूटर लोगों में मोटापे और डायबिटीज का खतरा पैदा कर रहे हैं. मनोरंजन और सहूलियत देने वाली इन चीजों से शारीरिक गतिविधि 31 फीसदी कम होती है और ये सुस्ती ही बीमारियों को न्योता देती हैं.

विकासशील और गरीब देशों में सुख सुविधाएं तो बढ़ रही हैं लेकिन उनके पीछे बीमारियां भी आ रही हैं. कनाडा की सिमोन फ्रेजर यूनिवर्सिटी में हेल्थ साइंस की प्रोफेसर स्कॉट लियर ने यह दावा किया है. प्रोफेसर लियर के मुताबिक 17 देशों में डेढ़ लाख से ज्यादा लोगों पर रिसर्च करने बाद यह साफ पता चला कि कंप्यूटर, टीवी और कार विकासशील और पिछड़े देशों में लोगों को सुस्त बना रहे हैं.

इन मशीनों का इस्तेमाल करने वाले लोगों में मोटापा 400 फीसदी की दर से बढ़ रहा है. टाइप-2 डायबिटीज की बीमारी भी 250 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ी है. रिसर्च में पता चला कि कंप्यूटर, कार और टीवी का इस्तेमाल करने वालों की शारीरिक गतिविधियां 31 फीसदी कम हो जाती हैं. वो औरों के मुकाबले 21 फीसदी ज्यादा बैठे रहते हैं. जिन लोगों के पास कार, इंटरनेट और टीवी नहीं है उनके मुकाबले इन सुविधाभोगी मालिकों की कमर नौ सेटींमीटर मोटी पाई गई.

लियर कहती हैं, "कम और मध्य आयवर्ग वाले देशों में आधुनिक जिंदगी में सहूलियत देने वाली चीजें जैसे टीवी, कार और कंप्यूटर के बढ़ते इस्तेमाल के साथ ही मोटापे और डायबिटीज में भी बढ़त देखी जा सकती है. ज्यादा आय वाले देशों की तरह वहां भी ये बीमारियां बढ़ रही हैं क्योंकि लोग बहुत ज्यादा बैठे रहते हैं, कम शारीरिक गतिविधि करते हैं और आहार में ज्यादा कैलोरी लेते हैं."

अमीर देश इन समस्याओं से निपटने के लिए काफी हद तक विकसित ढांचा बना चुके हैं लेकिन विकासशील देशों के सामने ये उभरती बीमारियां मुश्किल खड़ी करेंगी. इनका असर सामाजिक संरचना पर भी पड़ेगा.

ओएसजे/एएम (पीटीआई)

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