जेल से रिहा लेकिन कहां हैं पाकिस्तान की आसिया बीबी | दुनिया | DW | 08.11.2018
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दुनिया

जेल से रिहा लेकिन कहां हैं पाकिस्तान की आसिया बीबी

पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट से ईशनिंदा के आरोपों में बरी होने के बाद अब आसिया बीबी को जेल से भी रिहा कर दिया गया है. कयास लगाए जा रहे हैं कि उन्हें देश के बाहर भेज दिया गया है, लेकिन विदेश मंत्रालय ने इससे इनकार किया है.

पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने ईसाई महिला आसिया बीबी को ईशनिंदा के आरोप से बरी कर दिया था. स्थानीय मीडिया के मुताबिक अब बीबी को जेल से भी रिहा कर दिया गया है. हालांकि ये अब तक साफ नहीं हो पाया है कि वह पाकिस्तान में ही हैं या उन्हें देश के बाहर भेज दिया गया है. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ मुस्लिम कट्टरपंथियों ने देश में हिंसक प्रदर्शन किए थे. कट्टरपंथी आसिया बीबी के लिए मौत की सजा की मांग कर रहे हैं.

ऐसे भी कयास लगाए जा रहे हैं कि बीबी के परिवार को अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए तैयार रहने को कहा गया था. कुछ मीडिया रिपोर्टों में कहा जा रहा है कि वह देश के बाहर जा चुकी हैं. वहीं विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मोहम्मद फैजल ने बीबी के देश छोड़ने जैसी खबरों को गलत करार दिया है. हालांकि यूरोपीय संसद के अध्यक्ष अंतोनियो तैयानी ने आसिया बीबी की जेल से रिहा होने की पुष्टि की है, साथ ही बीबी से जल्द ही यूरोप में मिलने की बात कही है. उन्होंने टि्वटर पर लिखा, "आसिया बीबी को जेल से रिहा कर सुरक्षित जगह भेजा जा रहा है. मैं जल्द ही बीबी और उनके परिवार से यूरोपीय संसद में मिलने की उम्मीद करता हूं."

कुछ दिन पहले आसिया बीबी के वकील ने सुरक्षा कारणों से पाकिस्तान छोड़ दिया. आसिया बीबी का मामला पाकिस्तान के इतिहास में ईशनिंदा का सबसे हाईप्रोफाइल केस रहा है. कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं समेत पश्चिमी देशों की सरकारें भी इस मामले में निष्पक्ष सुनवाई की मांग करती रहीं हैं. 2015 में बीबी की बेटियां वेटिकन सिटी में जाकर पोप फ्रांसिस से भी मिली थीं. ईशनिंदा पाकिस्तान में हमेशा से ही एक संवेदनशील मुद्दा रहा है. मानवाधिकार कार्यकर्ता लंबे समय से देश के ईशनिंदा कानूनों में सुधारों की बात कर रहे हैं. पाकिस्तान की कुल आबादी में 97 फीसदी लोग मुस्लिम हैं. 

पाकिस्तान में रहने वाले ईसाई और दूसरे अल्पसंख्यक समुदाय देश में कानूनी और सामाजिक भेदभाव की शिकायत करते रहे हैं. इस लिहाज से ईशनिंदा के आरोप खासतौर से विवादित रहे हैं. 2012 में डाउन सिंड्रोम से ग्रस्त एक ईसाई लड़की रिमिशा शाह ने कुरान के कुछ पन्ने जला दिए थे. इस घटना के बाद रिमिशा को पुलिस हिरासत में ले लिया गया और कई महीनों बाद उस पर से ईशनिंदा के आरोप हटे. सुरक्षा कारणों के चलते रिमिशा और उसका परिवार 2013 में कनाडा चला गया.

इसी तरह 2014 में एक ईसाई जोड़े को कुरान को अपमानित करने के आरोपों के चलते पीट-पीट कर मार डाला गया और शव को ईंट की भट्टी में जला दिया गया था. 2017 में भी एक ईसाई आदमी को व्हाट्सऐप पर "इस्लाम का अपमान करने वाली सामग्री" साझा करने के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई थी.

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