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जेनेवा में महामशीन से फिर होगा महाप्रयोग

२४ मार्च २०१०

भारत में पैदा हुए जुड़वां बच्चों की नागरिकता संबंधी विवादों, जर्मन युवाओं के नए ट्रेंड-पीयर्सिंग पर तथा खोज और अंतरा के विषयों पर श्रोता क्या सोचते हैं, आइये जाने.....

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महामशीन महाप्रयोग के लिए फिर तैयारतस्वीर: picture alliance/dpa

खोज में जेनेवा में महामशीन के एक साल बाद फिर से चालू होने के बारे में जानकारी, इसके उपयोग और इस मशीन के प्रयोग को रूकवाने के लिए जर्मनी में एक महिला द्वारा कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के बारे में सुनने को मिला. साथ ही डॉलफिन को भी मनुष्य जैसी बिमारियां जिसमें अस्थाई मधुमेह रोग होता है जान कर आश्चर्य हुआ.

इसराइल अंसारी, आजाद रेडियो लिस्नर्स क्लब, नौगछिया, भागलपुर, बिहार

संदीप जावले,मारकोनी डीएक्स क्लब , पारली वैजनाथ , महाराष्ट्र

सुनील केशरी, कोआथ, बिहार

हैलो जिंदगी में जर्मनी में लड़के लड़कियों द्वारा शरीर पर कहीं भी 1 से 5 सेंटीमीटर के छेद कर बालियां पहनने के बढ़ते फैशन की जानकारी दिलचस्प थी. अपने आसपास आदिवासी बालाओं एवं महिलाओं में कानों को छिदवाने की परंपरा थी, लेकिन अब यह परंपरा बंद सी हो गई है. विकसित देश जर्मनी में इस तरह के फ़ैशन को देखकर थोड़ा ताज्जुब होता है. मैं तो इसे फ़ैशन नहीं, बल्कि इसे पागलपन कहूंगा. बहरहाल रोचक जानकारी के लिए धन्यवाद.

चुन्नीलाल कैवर्त, ग्रीन पीस डी एक्स क्लब, जिला बिलासपुर, छत्तीसगढ़

संदीप जावले,मारकोनी डीएक्स क्लब , पारली वैजनाथ , महाराष्ट्र

धड़कन कार्यक्रम ने हमारे दिलों को हिला दिया. जुड़वा बच्चों की नागरिकता संबंधी विवादों को ले भारत जर्मनी के बीच झुलाने के ऊपर विस्तार से दी गयी जानकारी काफी कारुणिक एवम मर्मस्पर्शी लगी.इन अबोध बच्चों का क्या दोष है जो नागरिकता के लिए दोनों देशों के कानूनों की चक्की में पिस तिल तिल मरने को मज़बूर हो रहे है. किराये की मां चुनने से पहले जर्मन दम्पति को भारत और जर्मनी में इसके बारे में क़ायदे कानून को जानना बहुत ज़रूरी था.

गुलेन्द्र यादव,फरिहा, आजमगढ़, उत्तर प्रदेश

संदीप जावले,मारकोनी डीएक्स क्लब , पारली वैजनाथ , महाराष्ट्र

अतुल कुमार, राजबाग रेडियो लि.क्लब, सीतामढ़ी, बिहार

खोज के अंतर्गत मधुमेह पर विशेष कार्यक्रम सुना. वास्तव में यह रोग धीमे जहर के समान है, अगर इससे प्रभावित व्यक्ति स्वास्थ्य के प्रति सचेत, देखभाल, परहेज और समय पर दवा न ले और देखरेख न करे तो मौत के द्वार तक पहुंच सकता है.

कुशकेतु मिश्र, शिव प्रसन्न श्रोता संघ, दरभंगा, बिहार

साप्ताहिक कार्यक्रम अंतरा में जांबाज़ और ज़िंदादिल महिलाओ की दास्तान को सुन कर दिल खुश हो गया. केवल और अकेली महिलाओं के द्वारा बच्चों की परवरिश करना असाधारण तो है परंतु असंभव नहीं है. जिन्होंने जन्म दिया हैं उनके द्वारा बच्चों की परवरिश करना कोई बड़ी बात नहीं है, आवश्यकता इस बात की है कि उनके प्रति समाज और कानून का संरक्षण मिलता रहे. जर्मनी या यूरोपीय जैसे देशों में लोगों की सोच ऊंची है, ऐसी महिलाओं का सम्मान किया जाना चाहिए.

मिकाइल अंसारी, आजाद रेडियो लिस्नर्स क्लब, भागलपुर, बिहार.