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G20-Gipfel - Erste Arbeitssitzung
तस्वीर: picture-alliance/dpa/AP/J. Macdougall

जी-7 की एकता में ट्रंप नाम की बड़ी दरार

८ जून २०१८

बड़े औद्योगिक देशों के संगठन जी-7 देशों में फूट पड़ चुकी है. छह देश अब डॉनल्ड ट्रंप के बिना आगे बढ़ने की तैयारी कर रहे हैं.

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कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रुडो के पूर्व विदेश नीति सलाहकार रोलैंड पैरिस जी-7 बैठक की अध्यक्षता करेंगे. लेकिन उनके मन में एक आशंका है. उनका संदेह जी-8 और जी-20 सम्मेलनों में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश के प्रतिनिधि रह चुके डैनियल प्राइस से मेल खाता है. दोनों को लगता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप आखिरी लम्हों में जी-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने से इनकार कर देंगे.

अमेरिका और उसके अहम सहयोगियों के बीच मतभेद इतने बढ़ चुके हैं कि अब ट्रंप को गर्मजोशी भरे स्वागत की बिल्कुल उम्मीद नहीं करनी चाहिए. पैरिस कहते हैं, "ऐसी संभावना कम है, लेकिन कुछ भी हो सकता है." आयात शुल्क के जरिए कारोबारी युद्ध भड़काने वाले ट्रंप के फैसलों से यूरोपीय संघ और कनाडा जैसे मित्र आहत हैं. 

बुश के शीर्ष अंतरराष्ट्रीय व्यापार सलाहकार रह चुके डैनियल प्राइस को अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों का शेरपा भी कहा जाता है. प्राइस कहते हैं, "अगर ट्रंप नहीं आए तो यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण होगा."

अकेला पड़ने लगा है ट्रंप का अमेरिका

जी-7 में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और कनाडा शामिल हैं. जी-7 को उत्तरी अमेरिका, यूरोप और एशिया की महाशक्तियों के समूह के तौर पर देखा जाता है. लेकिन यह पहला मौका है जब जी-7 में ऐतिहासिक मतभेद दिख रहे हैं. सम्मेलन से कुछ ही दिन पहले ट्रंप ने जी-7 के पांच देशों के स्टील और एल्युमीनियम पर आयात शुल्क बढ़ा दिया.

ट्रंप ने कारोबार से जुड़ी जांच करने का भी आदेश दिया. हो सकता है कि आने वाले दिनों में अमेरिका आयात की जाने वाली कारों पर शुल्क बढ़ा दे. इसकी सबसे करारी चोट जर्मनी और जापान पर पड़ेगी.

अमेरिका ने ईयू पर स्टील और एल्युमीनियम शुल्क लगाए

पेरिस की जलवायु संधि, ईरान के साथ हुए परमाणु समझौते और अब कारोबारी युद्ध, ट्रंप ने अमेरिका के ऐतिहासिक साझेदार रहे देशों की निशाना बनाया है. साझेदारों को इनकार करने के बावजूद ट्रंप जलवायु संधि और ईरान न्यूक्लियर डील से बाहर निकले. आयात शुल्क के मामले में ट्रंप ने फ्रांस के राष्ट्रपति एमानुएल माक्रों, जर्मनी की चांसलर अंगेला मैर्केल और कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रुडो में से किसी की नहीं सुनी.

माक्रों ने जी-7 सम्मेलन से पहले ट्रंप को आगाह करते हुए कहा कि जी7 शिखर सम्मेलन में अमेरिका के बिना सिर्फ छह देश समझौते पर दस्तखत कर सकते हैं. माक्रों ने ट्वीट कर कहा, "अमेरिकी राष्ट्रपति को अलग-थलग होने पर शायद फर्क नहीं पड़े लेकिन अगर जरूरत पड़े तो हम छह देश ही समझौते पर हस्ताक्षर करने में नहीं हिचकेंगे."

(अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप कभी अपने ट्वीट तो कभी अपने फैसलों के चलते चर्चा में बने रहते हैं. ट्रंप ने जिस दिन से पद संभाला है, उस दिन से लेकर अब तक वह कई समझौतों, करारों और साझेदारियों को तोड़ चुके हैं.)

मिषाएल क्लिगे/ओएसजे

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