जी-20 शिखर सम्मेलन में भी ट्रंप का ′अपनी ढफली, अपना राग′ | दुनिया | DW | 28.06.2019
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दुनिया

जी-20 शिखर सम्मेलन में भी ट्रंप का 'अपनी ढफली, अपना राग'

दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ते तनाव और कमजोर होते आर्थिक विकास के बीच जापान के ओसाका शहर में दुनिया की 20 सबसे ताकतवर अर्थव्यवस्था वाले देशों का शिखर सम्मेलन शुरू हुआ है.

जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने सम्मेलन की शुरुआत में साथी देशों से समझौते की तैयारी दिखाने का आह्वान किया. जी-20 देशों के बीच भी आपसी विवादों की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा, "हमें अपने मतभेदों पर जोर देने के बदले सहमतियां ढूंढनी चाहिए."

उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन को ऐसा सम्मेलन बनाना चाहिए जिसमें सबका फायदा हो. अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने ओसाका पहुंचने से पहले कई सदस्य देशों की आलोचना की और यहां तक कि मेजबान जापान को भी नहीं बख्शा. जापान को सैन्य कमजोरी की वजह से, जर्मनी को कम सैन्य बजट के लिए, चीन को कारोबारी बाधाओं के लिए और भारत को ऊंचे टैरिफों के लिए लताड़ा.

ओसाका में बड़े औद्योगिक देशों और तेज विकास कर रहे देशों के सरकार और राज्य प्रमुख दो दिनों के सम्मेलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिति का जायजा लेंगे और अंतरराष्ट्रीय कारोबार से जुड़े मुद्दों के अलावा डिजीटाइजेशन और पर्यावरण सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा करेंगे.

जी-20 के देशों के नेता द्विपक्षीय बैठकों में मध्यपूर्व और कारोबारी झगड़ों जैसे मुद्दों पर भी बात करेंगे. कम से कम द्विपक्षीय मुलाकात में ट्रंप थोड़े लचकदार नजर आए. जर्मन चांसलर अंगेला मैर्केल से हुई मुलाकात में उन्होंने चांसलर को दोस्त बताया.

भारी मतभेद

शिखर सम्मेलन की शुरुआत पर बहुत सारे मुद्दों पर जी-20 देशों के बीच गंभीर मतभेद हैं. यह भी साफ नहीं था कि दिन बीतते बीतते कोई साझा बयान जारी होगा भी या नहीं. आम तौर पर इस तरह के सम्मेलनों में साझा न्यूनतम पर जोर दिया जाता है लेकिन पिछले सालों में पर्यावरण जैसे मुद्दों में अमेरिका के साथ ऐसे मतभेद रहे हैं कि साझा बयान संभव नहीं रहा है. पर्यावरण सुरक्षा और मुक्त व्यापार के मुद्दों पर अब भी अमेरिका बाकी देशों से अलग राय रखता है. सम्मेलन से जुड़े राजनयिकों का मानना है कि अमेरिका को छोड़कर बाकी 19 सदस्य देश साझा बयान पर सहमत हो सकते हैं.

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अमेरिका का साझा बयान में शामिल न होना और अपनी डफली बजाना जी-20 के शिखर सम्मेलन की मूल भावना के खिलाफ होगा जिसके केंद्र में बहुपक्षीय राजनय है. इसी को ध्यान में रखकर 2008 के वित्तीय संकट के बाद इसका सरकार प्रमुखों के स्तर पर गठन किया गया था. सम्मेलन में भाग ले रहे संयुक्त राष्ट्र महासचिव अंटोनियो गुटेरेश ने भी निराशा जताते हुए कहा है कि सम्मेलन बड़े राजनीतिक तनाव के माहौल में हो रहा है.

आपसी मुलाकातें

शिखर सम्मेलन के औपचारिक कार्यक्रम के अलग जी-20 के नेता सामयिक मुद्दों पर चर्चा के लिए आपस में मिल रहे हैं. इनमें ईरान और उत्तर कोरिया के अलावा सीरिया और यूक्रेन के विवाद भी शामिल हैं. शनिवार को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भेंट का खास इंतजार है. अमेरिका और चीन के बीच कारोबारी विवाद ने पूरी दुनिया की धड़कनें रोक रखी हैं क्योंकि उसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने की आशंका है. ओसाका में ट्रंप भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी मिलेंगे.

जी-20 संगठन में दुनिया की 19 सबसे अर्थव्यवस्थाओं के अलावा यूरोपीय संघ शामिल है. इन देशों में दुनिया की दो तिहाई आबादी रहती है और यहां दुनिया के सकल घरेलू उत्पादन का 80 प्रतिशत पैदा होता है. इन देशों के बीच दुनिया भर में होने वाले कारोबार का तीन चौथाई कारोबार भी होता है. 2008 से पहले जी-20 की बैठकें वित्त मंत्री के स्तर पर हुआ करती थीं, लेकिन वित्तीय संकट के बाद बिगड़े हालात पर काबू पाने के लिए इसे शिखर सम्मेलन का दर्जा दे दिया गया. शिखर सम्मेलन किसी एक सदस्य देश में होता है.

एमजे/एके (एएफपी)

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