′जीवन शैली में योग का सहारा′ | फीडबैक | DW | 10.06.2012
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फीडबैक

'जीवन शैली में योग का सहारा'

हिंदी वेबसाइट के लेख पढ़ कर जब हमारे पाठक हमें अपनी प्रतिक्रियाएं भेजते हैं सुझाव भेजते हैं, तो हमें बहुत अच्छा लगता है.

सेहत में जहर घोलता तम्बाकू - विश्व तम्बाकू दिवस के अवसर पर डॉयचे वेले की यह खास रिपोर्ट डॉयचे वेले की हिन्दी वेबसाइट पर विज्ञान के अंतर्गत पढ़ने को मिली, यह जानकर बेहद दुख हुआ कि अकेले भारत में प्रतिदिन कई सौ ज़िंदगियां तम्बाकू के सेवन से मौत की आगोश में चली जाती हैं. जागरुक करने वाले लोगों को जानकारी देते रहते हैं और तम्बाकू सेवन करने वाले खुद ही अपनी मौत को दावत देते रहते हैं, इसका जिम्मेदार कौन है यह हम अच्छी तरह जानते हैं. हम खुद ही सबसे बड़े जिम्मेदार हैं हमें न तो अपनी जिंदगी की चिंता है और न ही भविष्य की.
आबिद अली मंसूरी,पैग़ानगरी-मीरगंज,बरेली उत्तर प्रदेश

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बहुत अर्से बाद रेडियो के बाद अब नेट पर आपकी उपलब्धता मन को बहुत हर्षाती है.बदलते हुए समय के साथ रेडियो डॉयचे वेले का बदलना जहां मन को भा रहा है वहीं रेडियो सेवा सहित नेट से ऑडियो सेवा की गैरमौजूदगी बहुत खल रही है.आपके पन्ने का कलेवर काफ़ी खूबसूरत है और विश्व समाचारों की प्रस्तुति बहुत ही प्रभावशाली.

अजय कुमार झा,दिल्ली

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पहले मै आपके हिंदी कार्यक्रमों को रेडियो पर सुनता था और पत्र भी लिखता था पिछले कुछ दिनों
से मै पत्र भी नहीं लिख पा रहा हूं और न ही रेडियो पर कार्यक्रमों को सुन पा रहा हूं इसलिए नेट पर कार्यक्रमों को पढ़ लेता हूं क्या श्रोताओं के मेल कार्यक्रमों में शामिल किए जाते हैं कृपया मेल के माध्यम से मुझे सूचित अवश्य करें.

पवन दिवेदी,प्रतापगढ़,उत्तर प्रदेश

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16 वर्षीय भारतीय लड़के शौर्य राय, जो की ड्रेसडेन, जर्मनी, में पढ़ रहा है, जिसने आइस्सक न्यूटन द्वारा उत्पन 300 साल पुरानी गणितीय समस्या को हल कर दिया है. इसके बारे में आपकी वेबसाइट पर पढ़ा. हमें इस बारे में कुछ और जानकारी देने की कृपा करें.

दीपक पी. वर्मा,हैदराबाद

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100 साल की नई दिल्ली - यह खबर और भी अधिक व्याख्यात्मक हो सकती थी...साथ ही चित्रों की प्रस्तुतियां भी. बुरे और अच्छे वक्त के चित्रों को दिखाने का आपका धन्यवाद.कृपया इतिहास पर और अधिक विवरण देने की कोशिश करें जिन्हें प्रत्येक युवा व्यक्ति ऑनलाइन पर पढ़ सके.

अंतर्यामी पाणिग्रही,बालेश्वर,उड़ीसा

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लाइफ स्टाइल से कैंसर का खतरा - भारत में आज भी गांवों में बहुत कम डाक्टर हैं, क्योंकि वहां मरीज नहीं हैं. प्राचीन खान पान की शैली विशुद्ध और स्वास्थ्यप्रद है, साथ ही जीवन शैली भी प्रकृति के अनुरूप है अतः लोग कम बीमार होते हैं. मेरी आयु 70 वर्ष है मैंने जीवन में 500 रुपए की भी दवाई नहीं खाई है. केवल तभी दवाई लेनी पड़ी जब दो या तीन बार गिरने से फ्रैक्चर हो गया. हस्पताल भी तभी जाना पड़ा. खाना मैं अपनी पसंद का ही लेता हूं, फास्ट फूड कतई पसंद नहीं. जीवन शैली में योग का सहारा है.

दिमाग को धोखा देने वाला चश्मा - विशेष चश्मे का अविष्कार मनोरंजक तो है ही साथ ही मोटापे से निजात दिलाने वाला है यह खुशी की बात है.

प्रमोद माहेश्वरी, फतेहपुर-शेखावाटी, राजस्थान

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संकलनः विनोद चड्ढा

संपादनः आभा मोंढे