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नई एफआईआर से जीरम घाटी हमला मामले में राजनीतिक उबाल

हृदयेश जोशी
२८ मई २०२०

बस्तर की जीरम घाटी में हुए माओवादी हमले के 7 साल बाद कांग्रेस नेताओं ने उस घटना में "राजनीतिक षड्यंत्र” की जांच के लिए मुकदमा दर्ज करवाया है. पुलिस अब इस मामले की जांच करेगी. एनआईए पहले ही कर चुकी है मामले की जांच.

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Indien Chhattisgarh | Angriff maoistische Rebellen
छत्तीसगढ़ में होते रहे हैं माओवादी हमलेतस्वीर: picture-alliance/AP Photo/KK Production

यह मुकदमा 25 मई 2013 को हुए माओवादी हमले की सातवीं बरसी के दिन कांग्रेस के पूर्व विधायक उदय मुदलियार के बेटे जीतेंद्र मुदलियार ने दर्ज कराया है. उस नक्सली हमले में मारे गए कांग्रेस नेताओं में उदय मुदलियार भी शामिल थे. बस्तर के दरबा थाने में दर्ज कराई एफआईआर में जीतेंद्र मुदलियार ने इस घटना में आपराधिक षड्यंत्र की जांच करने की मांग की है.

जीतेंद्र मुदलियार ने डीडब्ल्यू से कहा कि उस घटना के पीछे एक गंभीर षड्यंत्र था और हत्याकांड के सात साल बाद भी पीड़ित परिवारों को न्याय नहीं मिला है, "हम सारे पीड़ित परिवारों के लोग न्याय चाहते हैं. सात सालों से हमें इसका इंतजार है. हमने मांग की है कि एनआईए (नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी) की जांच में (आपराधिक) षड्यंत्र वाला हिस्सा अभी भी छूटा हुआ है. उसकी जांच होनी चाहिए. एनआईए ने षड्यंत्र को लेकर कोई जांच नहीं की और अगर वह इस विषय में जांच करते तो पीड़ित परिवारों से बात करते लेकिन आज तक उन्होंने किसी परिवार से बात नहीं की है. हम चाहते हैं कि इस घटना के राजनीतिक षड्यंत्र का खुलासा हो और दोषियों को सजा मिले.

अब पुलिस करेगी जांच

बस्तर के इंस्पेक्टर जनरल पी सुंदर राज ने हत्या और आपराधिक षड्यंत्र की धाराओं में मुकदमा दर्ज किए जाने की पुष्टि की और कहा कि कानूनी कार्यवाही की जा रही है. पुलिस अधीक्षक दीपक झा ने डीडब्ल्यू से बातचीत में कहा कि एफआईआर दर्ज हो जाने के बाद पुलिस अब इस मामले में जांच करेगी, "वह (जीतेंद्र मुदलियार) घटना के षड्यंत्र वाले हिस्से की जांच कराना चाहते हैं. उन्हें लगता है कि अन्य एजेंसी ने इस मामले की जांच में षड्यंत्र को नहीं देखा है. उनका कहना है कि उनके पास इस मामले में सबूत और दस्तावेज हैं जिससे वह ये साबित करेंगे कि इस मामले में षड्यंत्र था. हम इसकी जांच कर रहे हैं ताकि भविष्य में अगर कोई इस मामले में कोर्ट में जाता है तो हम उस पर जवाब दे सकें."

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हमले में मारे गए कांग्रेस नेता महेंद्र कर्मातस्वीर: Getty Images/AFP/M. Romana

सात साल पहले यह माओवादी हमला तब हुआ जब कांग्रेस पार्टी नक्सल प्रभावित बस्तर की जीरम घाटी से "परिवर्तन यात्रा” निकाल रही थी. उस हमले में कांग्रेस नेता महेंद्र कर्मा, प्रदेश अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, वरिष्ठ नेता विद्याचरण शुक्ला और पूर्व विधायक उदय मुदलियार समेत कई कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता मारे गए थे. कांग्रेस के नेता तभी से इस घटना में राजनीतिक षड्यंत्र की जांच की मांग करते रहे हैं.

राज्य व केंद्र में विवाद

जीरम हमले के बाद 2013 में मनमोहन सिंह सरकार ने मामले की जांच एनआईए को सौंप दी. एनआईए ने अपनी चार्जशीट में इस घटना के लिए नक्सली संगठन सीपीआई (माओवादी) के नेताओं को आरोपी बनाया. कांग्रेस के नेताओं द्वारा एनआईए जांच को "निराशाजनक” और "अधूरा” बताया गया. 2016 में इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की स्वीकृति भी रमन सिंह सरकार ने दी लेकिन केंद्र सरकार ने यह कहकर मांग को अस्वीकार कर दिया कि एनआईए इस मामले में जांच पूरी कर चुकी है.

नवंबर 2018 में राज्य में कांग्रेस सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस मामले की जांच के लिए एक स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) का गठन कर दिया. इसके तुरंत बाद ही एनआईए को लिखी चिट्ठी में छत्तीसगढ़ सरकार ने जांच से संतुष्ट न होने और षड्यंत्र में शामिल 100 लोगों को छोड़ दिए जाने की बात कही. छत्तीसगढ़ सरकार एनआईए से मांग कर रही है कि वह इस मामले में की गई जांच के दस्तावेज एसआईटी के साथ साझा करे ताकि वह "षड्यंत्र का पर्दाफाश” कर सके.

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भारत के कई इलाकों में माओवादी सक्रिय हैंतस्वीर: picture-alliance/AP Photo/M. Quraishi

राजनीतिक पैंतरे के आरोप

छत्तीसगढ़ के पूर्व गृहमंत्री और बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सदस्य रामविचार नेताम इस नई एफआईआर को कांग्रेस का राजनीतिक पैंतरा बताते हैं, "इस बारे में उच्च स्तरीय एनआईए जांच की जा चुकी है. इसके बावजूद अगर कांग्रेस पार्टी और वर्तमान (राज्य) सरकार को अगर विश्वास नहीं है तो मुझे आश्चर्य होता है कि इतनी विश्वसनीय जांच में क्यों उन्हें संतुष्टि नहीं है. यह एक तरह से राजनीतिक मुद्दा ही है क्योंकि तमाम सबूतों के आधार पर ही जांच हुई है."

उधर बस्तर पर करीबी नजर रखने वाले और जीरम घाटी हमले को कवर कर चुके लेखक और पत्रकार आशुतोष भारद्वाज कहते हैं कि कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा में सुरक्षा चूक से इनकार नहीं किया जा सकता क्योंकि उस वक्त प्रशासन ने सारी सिक्योरिटी रमन सिंह की "विकास यात्रा” में झोंक दी थी. लेकिन भारद्वाज ये नहीं मानते कि जीरम घाटी हमले में किसी तरह की साजिश की गई थी, "मेरे ख्याल से इस हमले के पीछे कोई षड्यंत्र नहीं है. मैंने हमले के बाद कई माओवादी नेताओं से भी इस विषय में बात की है, सबने षड्यंत्र को सिरे से खारिज कर दिया है." उनका मानना है कि यह कांग्रेस के सामने एक राजनैतिक मजबूरी है. वह इस मसले पर स्टैंड पहले दिन ही ले चुकी थी, जिसे उन भावुक क्षणों में समझा भी जा सकता था. उस समय कांग्रेस के कई नेता अपनी ही पार्टी के अजीत जोगी को भी निशाना बना रहे थे और फिर उन्होंने रमन सिंह सरकार पर सुरक्षा में चूक के लिए प्रहार भी किया. भारद्वाज के अनुसार आज इस षड्यंत्र थ्योरी की कोई जरूरत नहीं है.

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