जालसाजों के पास इसका कोई तोड़ नहीं | मंथन | DW | 15.07.2016
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मंथन

जालसाजों के पास इसका कोई तोड़ नहीं

डिजिटल युग में नकल इतना आसान हो गया है कि असल और नकल की पहचान करना मुश्किल होता जा रहा है. लिहाजा जर्मन विशेषज्ञ दुनिया के सबसे सुरक्षित आई-कार्ड बना रहे हैं.

डिजिटल युग में नकल इतना आसान हो गया है कि असल और नकल की पहचान करना मुश्किल होता जा रहा है. लिहाजा जर्मन विशेषज्ञ दुनिया के सबसे सुरक्षित आई-कार्ड बना रहे हैं.

देखने में श्टेफान बाउदाख भले ही सामान्य इंसान लगते हों, लेकिन इस लेजर एक्सपर्ट का काम बहुत ही दिलचस्प है. वे धोखाधड़ी करने वाले अंतरराष्ट्रीय गिरोहों के लिए मुश्किल खड़ी करते हैं. बाउदाख सुरक्षा विशेषज्ञ हैं. उनका लक्ष्य है ऐसे आईकार्ड बनाना, जिनमें हेरफेर न हो सके. इसके लिए वे लेजर तकनीक इस्तेमाल करते हैं.

आखिर लेजर एक्सपर्ट कैसे बनते हैं, इसका जवाब देते हुए बाउदाख कहते हैं, "लेजर की ही वजह से मैंने फिजिक्स की पढ़ाई की. शुरुआत स्कूल में हुई. तब मैंने पहली बार एक लेजर देखा था. अद्भुत रोमांचकारी यंत्र. उसी समय साफ हो गया कि मैं फिजिक्स ही पढूंगा."

पूरी गोपनीयता में बाउदाख वहां काम करते हैं जहां पहचान पत्र और नोट डेवलप व प्रिंट किए जाते हैं, "मेरे लिए पहचान की सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है. मेरा डाटा मेरा है. मैं उसके साथ बहुत ही सोच समझकर से पेश आता हूं."

देखिये: ऐसे बनते हैं सुरक्षित नोट

रिसर्चर बाउदाख के लिए जाली दस्तावेज अत्यंत कीमती हैं. उनके जरिये वे जालसाजी के तरीकों की गहराई से जांच करते हैं. जालसाजों को कसने के लिए उन्हीं के जैसे सोचना जरूरत है. तभी, बेहद सुरक्षित आईकार्ड बनाये जा सकते हैं. बाउदाख इसे चूहे बिल्ली का खेल सा मानते हैं, "आखिरकार हम जालसाजों से सिर्फ एक दो कदम ही आगे होते हैं. हम जो भी तकनीकी क्षमता हासित करते हैं वह कभी न कभी उन तक पहुंच ही जाती है. इसलिए हमें बाधाएं इतनी ऊंची रखनी होती है कि जालसाजों के लिए सामान्य खर्च पर दस्तावेजों की नकल करना संभव न रहे."

पहचान पत्रों और लेजर के बारे में अपना सारा ज्ञान बाउदाख ने एक मशीन में झोंक दिया है. यह मशीन आई-कार्ड प्रिंटर है, जिसमें दुनिया का सबसे सुरक्षित पहचानपत्र प्रिंट किया जाता है. फिलहाल इसकी नकल करना नामुमकिन है. अब जालसाजों के लिए आसान होगा कि वह ऐसा दस्तावेज लें जो असली हो और अपने वेष को ऐसे बदले कि वह आई कार्ड पर बनी तस्वीर जैसे दिखे.

बेहद हाईटेक डाटा

आधुनिक अलकेमी की तरह एक लेजर, मशीन के अंदर होलोग्राम, तस्वीरें और स्क्रिप्ट पैदा करता है जिन्हें सिर्फ अल्ट्रा वॉयलेट रोशनी के नीचे पढ़ा और देखा जा सकता है. यह कैसे होता है, यह रहस्य है.

यह सामान्य लेजर नहीं है. लेजर बहुत ही विभिन्न प्रकार के रूप ले सकता है, अब ये रोशनी हो, रंग हो, या धड़कन हो, या कुछ और. ये ऐसी संभावनाएं हैं जो इस समय उपलब्ध हैं.

दस्तावेजों की सुरक्षा के लिए लेजर ऐडेड तकनीक इस समय दुनिया की सबसे अच्छी टेक्नोलॉजी है. कई देशों में बिकने वाली बाउदाख की मशीन जालसाजों की नींद हराम कर रही है. सुरक्षित आईकार्ड पहचान की चोरी रोक रहे हैं.

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