जापानी मंदिर से आर्थिक लाभ की योजना | दुनिया | DW | 01.01.2016
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दुनिया

जापानी मंदिर से आर्थिक लाभ की योजना

जापान के पश्चिमी छोर के पास घने जंगल में स्थित 13वीं सदी के बौद्ध मंदिर में एक बार एप्पल संस्थापक स्टीव जॉब्स को भी सन्यास का ख्याल आया था. इस मंदिर को लेकर अब टोक्यो की एक कंपनी की नई योजनाएं हैं.

टोक्यो की बिल्डर कंपनियां मंदिर को आर्थिक मुनाफे में मददगार बनाने के लिए इलाकों में ऐसी सुविधाएं देना चाहते हैं जिनसे पर्यटकों को लुभाया जा सके. ईहीजी मंदिर की देखरेख के लिए जिम्मेदार स्थानीय प्रशासन और मोरी बिल्डिंग कंपनी मंदिर के आसपास कुछ शानदार होटलों का निर्माण करके इलाके में बदलाव करना चाहते हैं. वहां से एक पक्का रास्ता श्रद्धालुओं को मंदिर तक ले जाने के लिए बनाया जा जाएगा. जंगल में बने इस मंदिर के आसपास अच्छे होटलों और अन्य सुविधाओं से यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आसानी होगी जिससे प्रबंधकों को आर्थिक मुनाफा होगा.

जापान में मंदिरों का तकनीक से जुड़ा होना कोई नई बात नहीं. इनसे बढ़िया मुनाफा भी होता है. हाल में लगी प्रदर्शनी में ईहीजी का ड्रोन से लिया गया वीडियो शामिल था जिसे एक संत ने बनाया था. लेकिन दुनिया के दूसरे हिस्सों के मुकाबले क्योटो के बाहरी इलाकों में स्थित धार्मिक स्थल विदेशी पर्यटकों को लुभाने में खास कामयाब नहीं रहे हैं. जहां पहुंचना मुश्किल होता है उन इलाकों के मठ और मंदिर पर्यटन से होने वाले मुनाफों से वंचित रह जाते हैं.

ईहीजी के उपनिरीक्षक रेव शोडो कोबायाशी के मुताबिक, "ईहीजी ऐसा मंदिर है जो बाकी दुनिया से अलग थलग है. लेकिन हम अपने समुदाय से कट कर नहीं रह सकते. हमें पर्यटन को बढ़ावा देकर स्थानीय सरकार की जरूरतों में मदद करनी है." ईहीजी में रहने वाले संतों और यहां के प्रशिक्षण केंद्रों के लिए भी आर्थिक मदद की जरूरत है. लेकिन यहां आने वालों की संख्या साल भर में मात्र पांच लाख ही रह गई है. यह संख्या 1980 के दशक के मुकाबले दो तिहाई है, जब जापानी कंपनियां यहां के टुअर कराया करती थीं.

मंदिर के पास ही 1.3 अरब येन की लागत वाला दो मंजिला होटल बनाया जाएगा जो आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा. 2020 तक पूरे किए जाने की योजना वाले इस प्रोजेक्ट में होटलों को मंदिर से जोड़ने वाले रास्ते भी शामिल हैं जिन पर स्थानीय प्रशासन काम करेगा. ईहीजी गांव के एक अधिकारी शाउजी कावाकामी कहते हैं, "रहने की जगह होगी तो सैलानी यहां ज्यादा समय और धन खर्चेंगे." स्थानीय अधिकारियों को उम्मीद है कि 2025 तक वे सैलानियों की संख्या दोगुनी करने में कामयाब हो सकेंगे.

एसएफ/आरआर (रॉयटर्स)

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