जर्मन चांसलर शॉल्त्स की पार्टी की प्रांतीय चुनाव में दूसरी बड़ी हार | दुनिया | DW | 16.05.2022

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दुनिया

जर्मन चांसलर शॉल्त्स की पार्टी की प्रांतीय चुनाव में दूसरी बड़ी हार

सबसे बड़ी आबादी वाली जर्मन राज्य में सीडीयू की जीत के बाद सत्ता के नये समीकरण उभर रहे हैं. किंगमेकर बनी ग्रीन पार्टी ने अपनी शर्तों की बात शुरू कर दी है. उधर लगातार दूसरी बड़ी हार के बाद एसपीडी दबाव में है.

नॉर्थराइन वेस्टफालिया के मुख्यमंत्री और सीडीयू नेता हेंड्रिक वुस्ट

नॉर्थराइन वेस्टफालिया के मुख्यमंत्री और सीडीयू नेता हेंड्रिक वुस्ट

रविवार को जर्मनी के नॉर्थ राइन वेस्टफालिया राज्य के चुनाव के बाद सीडीयू सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है. 35.7 फीसदी वोट हासिल कर निश्चित रूप से इस चुनाव में जीत का सेहरा उसी के सिर सजा है हालांकि इतने भर से सरकार नहीं बन पायेगी. उधर चांसलर शॉल्त्स वाली एसपीडी को सर्वेक्षणों के मुकाबले ज्यादा बड़ी हार मिलने से पार्टी दबाव में आ गई है. एसपीडी को महज 26.7 फीसदी वोट ही हासिल हुए हैं.

किंगमेकर ग्रीन पार्टी

ग्रीन पार्टी को पिछली बार की तुलना में दोगुने वोट मिले हैं. 18.2 फीसदी वोट के साथ ग्रीन पार्टी नॉर्थ राइन वेस्टफालिया में किंगमेगर की भूमिका में आ गई है. केंद्र सरकार जैसा त्रिकोणीय गठबंधन राज्य में भी बन सकता है, हालांकि सीडीयू की बड़ी जीत को देखते हुए इसके आसार कम लग रहे हैं. ज्यादा संभावना इसी बात की है कि सीडीयू, ग्रीन पार्टी या फिर दूसरे दलों के सहयोग से सरकार बनाएगी.

एसपीडी को मिले वोट पार्टी के 76 सालों के इतिहास में सबसे कम हैं

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संसद में ग्रीन पार्टी की वरिष्ठ सांसद कातारीना ड्रोगे ने कहा कि राज्य में सीडीयू के शीर्ष नेता हेंड्रिक वुस्ट को संभावित गठबंधन पर चर्चा शुरू होने से पहले पर्यावरण पर अपनी की नीतियों के बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए. ड्रोगे ने कहा, "हेंड्रिक वुस्ट को निश्चित रूप से किसी भी हाल में ऐसी नीतियों को अलविदा कह देना चाहिए, जिनका मतलब ऊर्जा के परिवर्तन को धीमा करने से है." गठबंधन पर बातचीत की तैयारियों के बीच ड्रोगे ने यह भी कहा कि ग्रीन पार्टी "सभी लोकतांत्रिक पार्टियों से बात" करेगी.

इससे पहले सीडीयू के महासचिव मारियो छाया ने सोमवार को जर्मन टीवी चैनल जेडडीएफ से बातचीत में कहा कि वह राज्य में सीडीयू और ग्रीन पार्टी के गठबंधन सरकार की उम्मीद कर रहे हैं. कोलोन, डूसेलडॉर्फ, एसन और डॉर्टमुंड जैसे बड़े शहरों वाले राज्य नॉर्थराइन वेस्टफालिया में इससे पहले भी सीडीयू ही सरकार का नेतृत्व कर रही थी. राज्य के मुख्यमंत्री रहे आर्मिन लाशेट को चांसलर पद का उम्मीदवार बनाये जाने के बाद सरकार की कमान एक साल पहले हेंड्रिक वुस्ट के हाथ में आ गई. इससे पहले यहां सीडीयू और एफडीपी की गठबंधन सरकार थी, लेकिन इस बार के नतीजे बता रहे हैं कि सिर्फ इन दलों के गठबंधन से काम नहीं चलेगा.

एसपीडी की लगातार दूसरे हफ्ते बड़ी हार का मुंह देखना पड़ा है

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एसपीडी ने उम्मीद नहीं छोड़ी

उम्मीद के विपरीत मिली जीत से सीडीयू काफी उत्साहित है. मारियो छाया ने कहा कि दोनों दल निश्चित रूप से चुनाव के विजेता हैं और "सरकार के लिए गठबंधन इसी दिशा में आगे बढ़ना चाहिए." पिछले रविवार को सीडीयू ने श्लेषविग होल्सटाइन राज्य में भी बड़ी जीत हासिल की थी. एसपीडी ने हालांकि उम्मीद छोड़ी नहीं है. पार्टी ने सरकार बनाने के लिए मध्य वामपंथी गठबंधन से इनकार नहीं किया है और कहा है कि वह "बातचीत के लिए तैयार है."

सीडीयू से केंद्र की सत्ता हथियाने के कुछ ही महीनों बाद एसपीडी ने दो अहम राज्यों में हार का मुंह देखा है. इन चुनाव नतीजों को केंद्र सरकार की नीतियों की परीक्षा के तौर पर भी देखा जा रहा है. नॉर्थ राइन वेस्टफालिया राज्य में बीते 76 सालों के इतिहास में एसपीडी को इतने कम वोट कभी नहीं मिले थे. पिछले हफ्ते हुएश्लेषविग होल्स्टाइन के चुनाव में तो पार्टी सिमट कर तीसरे नंबर पर चली गई.

चुनाव में यूक्रेन बना प्रमुख मुद्दा

कारोबार समर्थक फ्री डेमोक्रैटिक पार्टी की भी हालत अच्छी नहीं है. पिछली बार के 12.6 फीसदी की तुलना में इस बार उसे सिर्फ 5.9 फीसदी वोट ही मिले हैं. धुर दक्षिणपंथी एएफडी का वोटशेयर भी गिरा है और वह पिछले चुनाव के 7.4 से घट कर 5.4 प्रतिशत पर आ गई है. इसी तरह लेफ्ट पार्टी को भी 4.9 फीसदी की बजाय इस बार सिर्फ 2.1 फीसदी वोट ही मिले हैं.

ग्रीन पार्टी का वोट शेयर दोगुना हो गया है

ग्रीन पार्टी का वोट शेयर दोगुना हो गया है

करीब 1.3 करोड़ वोटरों वाला यह औद्योगिक राज्य अक्सर राष्ट्रीय चुनावों के लिये मार्गदर्शक का काम करता है. इस बार के चुनाव में 786,000 लोगों ने पहली बार अपने मताधिकार का प्रयोग किया. कुछ विश्लेषकों का कहना है कि लगातार दो राज्यों में बुरी हार के कारण चांसलर ओलाफ शॉल्त्स की पार्टी दबाव में आ गई है. 

चुनाव प्रचार के दौरान यूक्रेन से जुड़े मुद्दों पर ही चर्चा होती रही. ऊर्जा सुरक्षा, कोयले से छुटकारा और ईंधन के साथ ही ऊर्जा की बढ़ी कीमतें शीर्ष एजेंडे में थी. जलवायु परिवर्तन, शिक्षा नीति और किफायती घर जैसे मुद्दों की गूंज भी सुनाई देती रही. सीडीयू और एसपीडी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बीते कुछ सालों में अपने रिश्तों की भी चर्चा चुनाव के दौरान की.

एनआर/एसएम (डीपीए, रॉयटर्स)

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