जर्मन कैबिनेट में साइबर सुरक्षा रणनीति को मंजूरी | दुनिया | DW | 10.11.2016
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दुनिया

जर्मन कैबिनेट में साइबर सुरक्षा रणनीति को मंजूरी

साइबर हमलों और इंटरनेट की दुनिया में बढ़ती असुरक्षा के मद्देनजर जर्मन कैबिनेट ने नई साइबर सुरक्षा रणनीति को मंजूरी दी है. हाल के कई साइबर हमलों के पीछे चीन और रूस का हाथ बताया गया है.

जर्मन कैबिनेट ने बुधवार को नई साइबर सुरक्षा रणनीति को मंजूरी देते हुए सरकारी संस्थानों, महत्वपूर्ण केंद्रों, कंपनियों और नागरिकों पर साइबर हमलों के खिलाफ कदम उठाया है. इस नई रणनीति में सूचना सुरक्षा के केंद्रीय कार्यालय के भीतर ही एक मोबाइल 'क्विक रिएक्शन फोर्स' का गठन करने को स्वीकृति मिली है. इसके अलावा साइबर हमलों के लिए समर्पित ऐसी ही टीमें केंद्रीय पुलिस और घरेलू गुप्तचर एजेंसी में भी बनाई जाएगी.

जर्मनी के साइबर डिफेंस सेंटर को गृह मंत्रालय के अंतर्गत रखा जाएगा. इससे तमाम आतंरिक सुरक्षा एजेंसियों के बीच सहयोग और समन्वय में आसानी होने की उम्मीद है. इसके अतिरिक्त साइबर खतरों ने निपटने में निजी और सरकारी क्षेत्रों के आपसी भरोसे और सहयोग पर भी जोर है. यह नीति अमेरिका की साइबर रक्षा रणनीति की तर्ज पर है. संवेदनशील जानकारियों की सुरक्षा के अलावा सरकार इस कदम से पानी की सप्लाई, स्वास्थ्य सुविधाओं, डिजिटल राउटिंग सिस्टम और ट्रांसपोर्ट जैसे रोजमर्रा की सुविधाओं को हर स्थित में सुरक्षित रखना चाहती है.

सभी केंद्रीय प्रशासनिक कार्यालयों को बेहतर साइबर सुरक्षा प्रबंधन की अत्याधुनिक तकनीक से लैस करना होगा. आम लोगों में भी आईटी उत्पादों के सुरक्षित इस्तेमाल और इनक्रिप्शन को आजमाने के लिए जागरुकता जगाई जाएगी. स्कूलों में आईटी ट्रेनिंग और विकास पर काम करना भी नई विस्तृत रणनीति का हिस्सा है.

सूचना सुरक्षा के केंद्रीय कार्यालय बीएसआई की हाल में आई रिपोर्ट में बताया गया है कि जर्मनी में ऐसे मालवेयर्स की तादात काफी बढ़ी है, जिनसे निपटने में मौजूदा एंटी-वायरस प्रोग्राम कारगर नहीं हैं. ऐसे कई साइबर हमलों में रैनसमवेयर का इस्तेमाल होता है जो कंप्यूटर को ब्लॉक कर देते हैं या उससे संवेदनशील डाटा चुरा कर बदले में फिरौती मांगते हैं.

जर्मन गृह मंत्री थोमास दे मेजियेर ने बताया है कि इनमें से ज्यादातर हमले जर्मनी के बाहर खासकर चीन और रूस से हो रहे हैं. चांसलर मैर्केल की बात का समर्थन करते हुए मेजियेर ने भी अगले साल होने वाले राष्ट्रीय चुनाव में प्रचार अभियान को प्रभावित करने के लिए रूसी दुष्प्रचार मशीनरी के इस्तेमाल की आशंका जताई है.

बर्लिन में सुरक्षा अधिकारियों को शक है कि हाल में जर्मन संसद के निचले सदन बुंडेसटाग और मैर्केल की पार्टी के मुख्यालय के सिस्टम पर हमले रूस के इशारे पर वहां के हैकरों ने किए हैं. हाल ही में संपन्न हुए अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के प्रचार अभियान में भी डेमोक्रेट उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन के मुख्यालय के कंप्यूटर में रूसी साइबर हमले की चर्चा थी.

आरपी/एके (एपी,डीपीए)

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