जर्मनी में प्राकृतिक मिनरल वॉटर का खजाना | मंथन | DW | 24.02.2017
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मंथन

जर्मनी में प्राकृतिक मिनरल वॉटर का खजाना

यूरोप में मिनरल वॉटर का सबसे बड़ा प्राकृतिक भंडार जर्मनी में है. कुदरत यहां हर दिन करोड़ों लीटर पौष्टिक पानी छलकाती है.

Zur Studie - Top Städte in Deutschland (Fotolia/World travel images)

हर दिन 2.2 करोड़ लीटर मिनरल वॉटर

जर्मन प्रांत बाडेन वुर्टेमबर्ग की राजधानी श्टुटगार्ट के महानगरीय जंगल में छुपी इस प्राकृतिक जगह पर पश्चिमी यूरोप का सबसे बड़ा मिनरल वॉटर भंडार है. यहां झरने भी हैं, और ऐसी जगहें भी जहां से भूजल लगातार फव्वारों से बाहर निकलता है. यहां 19 झरनों से हर रोज 2.2 करोड़ लीटर पानी निकलता है. भूविज्ञानी राल्फ लाटेर्नजर ने पानी की इस दुनिया के संरक्षण को अपने जीवन का मकसद बना लिया है. डॉ. लाटेर्नजर कहते हैं, "यहां की खास बात अपेक्षाकृत साफ पानी का इतना बड़ा भंडार है जो यहां 5,00,000 साल से लगातार बह रहा है. ऐसा प्राकृतिक खजाना जिसे भविष्य में भी इस्तेमाल किया जा सकता है, पीने के लिए और स्वास्थ्य के लिए भी क्योंकि यहां बहुत सारा पानी चिकित्सीय गुणों वाला भी है."

प्राकृतिक मिनरल वॉटर, यानि मूल्यवान खनिज और लवणों से भरा पानी जो जीवन के लिए अमृत जैसा है. बहुत दूर तक फैले पाइपों की मदद से पानी को फव्वारों

और स्पा तक पहुंचाया गया है. पानी को उसके प्राकृतिक रूप में छोड़ दिया गया है, कोई भी अतिरिक्त रसायन नहीं मिलाया गया है. इस प्राकृतिक जल का इस्तेमाल हजारों साल पुरानी स्पा परंपरा के साथ जुड़ा है. पाषाणयुग में लोग पहली बार यहां रहने लगे थे, रोमन काल में लोगों ने पास में बस्तियां बनाईं और यहां नहाते थे. यहां का पानी आज भी पेयजल के अलावा स्वास्थ्यलाभ के लिए प्राकृतिक संसाधन बना हुआ है.

कारों के शहर श्टुटगार्ट के ज्यादातर झरने स्वास्थ्य लाभ के पानी के रूप में सरकारी तौर पर मान्य है. इस पानी में पाये जाने वाले खनिज तत्वों की नियमित जांच होती है ताकि तय किया जा सके कि वह कहीं दूषित तो नहीं हो गया है. यहां जमीन से फूटकर निकलने वाला पानी बीस साल पहले बारिश और भाप बनने की प्रक्रिया से गुजरकर छन छन कर जमीन के अंदर गया है. डॉ. राल्फ लाटेर्नजर कहते हैं, "ये सौभाग्य है कि पानी अपने आपको साफ करता रहता है. जर्मनी में पानी की कोई कमी नहीं है, लेकिन फिर भी भूजल और खासकर मिनरल वॉटर को भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षित रखना बहुत जरूरी है."

जल ही जीवन है. कहीं कहीं और कभी कभार ही यह इस उदारता से छलकता रहता है, जितना कि जर्मनी के श्टुटगार्ट में. ये प्रकृति का अद्भुत वरदान है, जिसे सहेज कर रखना और जिसका सम्मान और संरक्षण जरूरी है.

(जर्मनी की सुंदर नदियां)

महेश झा/ओएसजे

 

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