जर्मनी में पढ़ी लिखी महिलाओं की तादाद दोगुनी हुई | दुनिया | DW | 07.09.2018
  1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages
विज्ञापन

दुनिया

जर्मनी में पढ़ी लिखी महिलाओं की तादाद दोगुनी हुई

जर्मनी में भी पुरुषों और महिलाओं की समानता का मुद्दा चुनौतियों से भरा है. लेकिन कोशिशें रंग ला रही है और ज्यादा पढ़ी लिखी महिलाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है.

जर्मनी के सांख्यिकी विभाग ने 2017 में लघु जनगणना कराई थी. इसके अनुसार मास्टर और पीएचडी डिग्री हासिल करने वाली युवा महिलाओं की संख्या उनकी मांओं की पीढ़ी की तुलना में दोगुनी हो गई है. सांख्यिकी कार्यालय के अनुसार 2017 में 30 से 34 के आयुवर्ग में 30 प्रतिशत महिलाओं के पास यूनिवर्सिटी डिग्री थी जबकि 60 से 64 साल के आयुवर्ग में सिर्फ 15 प्रतिशत महिलाएं ऐसी हैं जिन्होंने यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की थी. 

पिछले सालों में शिक्षा के स्तर के मामले में आबादी के महिला हिस्से ने पुरुषों के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया है. 30 से 34 के आयुवर्ग में 27 फीसदी पुरुषों के पास यूनिवर्सिटी डिग्री है जबकि 60 से 64 आयुवर्ग में 22 प्रतिशत पुरुषों ने यूनिवर्सिटी शिक्षा पाई है. कुल मिलाकर जर्मनी में 30 से 34 साल के युवाओं में 29 प्रतिशत को उच्च शिक्षा मिली है. 60 से 64 के आयुवर्ग में उनकी संख्या 19 प्रतिशत है.

लघु जनगणना के अनुसार 2008 में ही महिलाओं ने उच्च शिक्षा के मामले में पुरुषों को पछाड़ना शुरू कर दिया था. उस समय पुरुषों के 21 प्रतिशत के मुकाबले 21.1 प्रतिशत महिलाओं ने यूनिवर्सिटी शिक्षा पाई थी. उसके बाद से अंतर लगातार बढ़ता गया है और 2017 में यह अंतर 3 प्रतिशत हो गया है.

शिक्षा में महिलाओं की स्थिति बेहतर जरूर हुई है लेकिन समाजशास्त्री प्रोफेसर बिर्गिट ब्लेटेल मिंक आंकड़ों पर सावधानी की चेतावनी देते हुए कहती हैं, "शिक्षा व्यवस्था में पुरुषों और महिलाओं की समानता में नियमित बेहतरी के संकेत नहीं हैं." सचमुच अभी भी विश्वविद्यालयों में पुरुष प्रोफेसरों की तादाद महिला प्रोफेसरों से ज्यादा है. पिछले साल प्रोफेसर बनने के लिए जरूरी स्टेट डॉक्टरेट करने वाली महिलाओं की संख्या में कमी आई है.

जर्मनी में यूनिवर्सिटी शिक्षा पाने वाली महिलाओं की तादाद बढ़ी है, वे पुरुषों के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन भी कर रही हैं, एडमिशन लेने वालों का बड़ा हिस्सा डिग्री पास भी कर रहा है, लेकिन वे अक्सर ऐसे विषयों को चुन रही हैं जिनमें तनख्वाह कम है. अधिक तनख्वाह देने वाले साइंस विषयों में पुरुषों की संख्या अभी भी बहुत ही ज्यादा है. प्रोफेसर बिर्गिट ब्लेटेल मिंक कहती हैं, "उच्च शिक्षा व्यवस्था में मौके की समानता अभी हासिल नहीं हुई है."

असमानता की वजहें कई और अक्सर जटिल हैं. प्रोफेसर बिर्गिट ब्लेटेल मिंक के अनुसार इसके कारणों में लड़के और लड़कियों के अलग तरह के परवरिश के अलावा प्रतियोगिता पर आधारित विज्ञान और आर्थिक व्यवस्था भी शामिल है. महिलाओं को अक्सर बच्चे और करियर के बीच फैसला करना होता है और परिवार के लिए करियर छोड़ने पर उन्हें ही जिम्मेदार ठहराया जाता है

.

पति पत्नी दोनों के उच्च शिक्षा प्राप्त होने की स्थिति में भी अक्सर पुरुष ही करियर में ऊंचा जाते हैं. अक्सर पति अच्छी तनख्वाह वाले मैनेजर की नौकरियां करता है तो पत्नी कम वेतन वाले सरकारी नौकरियों में रहकर बच्चों की देखभाल करती है. प्रोफेसर बिर्गिट ब्लेटेल मिंक अपने सहयोगियों का उदाहरण देते हुए कहती हैं कि बच्चों और पक्के दांपत्य वाले पुरुष सहयोगियों की संख्या महिला सहयोगियों से ज्यादा है.

जर्मनी में पिछले सालों में यूनिवर्सिटी शिक्षा पाने वाले लोगों की तादाद लगातार बढ़ी है. इसके विपरीत व्यावसायिक प्रशिक्षण पाने वाले लोगों की संख्या कम हुई है. 2017 में 60 से 64 के आयुवर्ग में 55 प्रतिशत लोगों के पास व्यावसायित प्रशिक्षण की डिग्री थी जबकि 30 से 34 आयुवर्ग में उनकी संख्या सिर्फ 45 प्रतिशत रह गई है. तकनीकी प्रशिक्षण पाने लोगों की संख्या में भी कमी आई है.

एमजे/एनआर(डीपीए)

DW.COM

संबंधित सामग्री

विज्ञापन