जर्मनी ने रवांडा को मदद रोकी | दुनिया | DW | 29.07.2012
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दुनिया

जर्मनी ने रवांडा को मदद रोकी

जर्मनी ने अफ्रीकी देश रवांडा को करोड़ो डॉलर की सहायता रोक दी है. रवांडा पर आरोप है कि वह पड़ोसी देश डीआर कॉन्गो में विद्रोहियों को समर्थन दे रहा है. जर्मनी के विकास मंत्री यह जानकारी दी है.

जर्मनी के विकास मंत्री डिर्क निबेल ने बताया है कि जर्मन सरकार ने अब से 2015 तक के बीच रवांडा को दिए जाने वाले करीब 2.1 करोड़ यूरो की सहायता रोकने का फैसला किया है. इसके साथ ही उन्होंने यहा कहा, "यह रवांडा की सरकार के लिए साफ संकेत है." पिछले साल नवंबर में जर्मनी ने रवांडा को तीन साल के समय में हर साल 2 करोड़ यूरो की मदद देने का वादा किया था.

निबेल ने कहा, "रवांडा ने अपने ऊपर लगे आरोपों को दूर करने में समय का इस्तेमाल नहीं किया है. यह साफ होना चाहिए कि रवांडा पूर्वी डीआर कॉन्गो में विद्रोही लड़ाकों को समर्थन नहीं दे रहा है." निबेल ने रवांडा से संयुक्त राष्ट्र के साथ "पूर्ण सहयोग" करने की मांग की है.

रवांडा के बारे में संयुक्त राष्ट्र की एक पैनल ने जून में कहा कि वह एम23 विद्रोहियों को रसद दे रहा है. यह टूट्सी के पूर्व विद्रोहियों का एक गुट है जो फिलहाल डीआर कॉन्गों को संवेदनशील इलाके नॉर्ड किवू में देश की नियमित सेना से जंग लड़ रहा है. इन्हीं आरोपों के बाद अमेरिका और नीदरलैंड्स ने भी रवांडा को दी जाने वाली सहायता रोकने का एलान किया है. हालांकि रवांडा इन आरोपों से साफ इनकार कर रहा है. अमेरिका ने इसके विद्रोहियों को रवांडा की मदद मिलने के सबूतों पर गहरी चिंता जताते हुए पिछले रविवार एलान किया कि वह रवांडा को सैनिक सहायता बंद कर रहा है.

शुक्रवार को हेग की अंतरराष्ट्रीय अदालत ने रवांडा में न्यायतंत्र को मजबूत करने के लिए दी जाने वाली 50 लाख यूरो की सहायता भी रोकने का एलान कर दिया. इन सबके बीच रवांडा के विदेश मंत्री लुईस मुशिकिवाबो ने कहा है, "यह सब कमजोर सबूतों पर जल्दबाजी में लिए फैसले हैं." इसके साथ ही उन्होंने विद्रोहियों को मदद देने की बात से साफ इनकार किया.

इसी महीने की शुरुआत में कॉन्गो के राष्ट्रपति जोसेफ कबीला और रवांडा का राष्ट्रपति पॉल कागामे विद्रोहियों को दबाने के लिए एक टास्क फोर्स बनाने पर रजामंद हुए थे. संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थियों के मामले देखने वाली एजेंसी ने पूर्वी कॉन्गो में आम लोगों की सुरक्षा के लिए आग्रह किया है. ऐसी खबरें हैं कि इन इलाकों में अंधाधुंध हत्याएं, बलात्कार और आमलोगों पर जुल्म हो रहा है.

एनआर/ आईबी (एएफपी)

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