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Deutschland ASOC Bundeswehr stellt Weltraumoperationszentrum in Dienst
तस्वीर: Carsten Hoffmann/dpa/picture alliance

जर्मनी ने खोला सेना का अंतरिक्ष ऑपरेशन सेंटर

२१ सितम्बर २०२०

जर्मन रक्षा मंत्री आनेग्रेट क्रांप कारेनबावर ने जब स्पेस ऑपरेशन सेंटर का उद्घाटन किया तो लगा कि जैसे जर्मनी स्टार वार के युग में प्रवेश कर रहा है. लेकिन समाज और अर्थव्यवस्था के लिए अंतरिक्ष का महत्व बढ़ता जा रहा है.

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जर्मनी का एयर एंड स्पेस ऑपरेशंस सेंटर नॉर्थ राइन वेस्टफेलिया के उइडेम में है और ये देश की वायुसेना के ऑपरेशंस मुख्यालय का हिस्सा है. यहीं से जर्मन वायुसेना देश के हवाई क्षेत्र पर नजर रखती है. अब ये ऑपरेशन सेंटर यहां से उपग्रहों की बाधाओं और हमलों से सुरक्षा करेगा और उन प्रोजेक्टाइल पर भी नजर रखेगा जो वायुमंडल में प्रवेश के बाद जमीन पर बसी बस्तियों के लिए खतरा बन सकते हैं. ऑपरेशन सेंटर अंतरिक्ष के ऑब्जेक्ट और अंतरिक्ष के कचरे का कैटेलॉग बनाएगा.

अंतरिक्ष पर नजर रखने वाले इस सेंटर की शुरुआत में वहां 50 विशेषज्ञ काम करेंगे. 2031 तक उनकी संख्या बढ़कर 150 करने की योजना है. अंतरिक्ष में चक्कर काटने वाले ऑबजेक्ट की कक्षा का पता करने के लिए जर्मन एक्सपेरिमेंटल स्पेस सर्विलांस एंड ट्रैकिंग रडार गेस्ट्रा का इस्तेमाल किया जाएगा. इसका विकास जर्मन अंतरिक्ष एजेंसी के लिए फ्राउनहोफर इंस्टीट्यूट ने किया है. ऑबजेक्ट को नजदीक से देखने के लिए अंतरिक्ष निरीक्षण रडार (टीरा) का उपयोग किया जाएगा. टीम के पास इसके लिए टेलिस्कोप की सुविधा भी उपलब्ध होगी.

Deutschland ASOC Bundeswehr stellt Weltraumoperationszentrum in Dienst
तस्वीर: Carsten Hoffmann/dpa/picture alliance

दुनिया में प्रमुख देशों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच अंतरिक्ष की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण होती जा रही है. धरती के निकट आकाश में स्थित ढांचागत संरचना धरती पर नेविगेशन, इंटरनेट या टेलिकम्युनिकेशन के काम करने के लिए अत्यंत जरूरी है. इसलिए इनकी सुरक्षा भी सैनिक नजरिए से जरूरी है. सैनिक विशेषज्ञों का कहना है कि हवाई क्षेत्र और अंतरिक्ष को अब और अलग अलग नहीं किया जा सकता, भले ही उसमें भौतिकी के हिसाब से अंतर हो.

इस फैसले के साथ जर्मनी ने अपने सहयोगी अमेरिका की तुलना में एक अलग रास्ता चुना है. अमेरिका ने अंतरिक्ष के लिए अपनी सेना का एक अलग विभाग बना दिया है. अमेरिका के अलावा यूरोप में फ्रांस जर्मनी का निकट सहयोगी है. अमेरिका, चीन या रूस के विपरीत जर्मनी के पास अंतरिक्ष में होने वाले हमले का सैनिक जवाब देने की क्षमता नहीं है. इस तरह के हथियार जर्मन सेना के पास नहीं हैं. जरूरत पड़ने पर उसे जमीन पर कार्रवाई करनी होगी और वह भी कूटनीतिक. तकनीकी प्रतिरक्षा अप्रत्यक्ष रूप से होगी.

लेकिन ऑपरेशंस सेंटर द्वारा अंतरिक्ष में दिखने वाले ऑब्जेक्ट के बारे में जमा की जाने वाली सूचनाएं और दूसरे देशों की गतिविधियों की जानकारी जरूरी होगी. इस सेंटर के साथ जर्मनी अंतरिक्षीय प्रतिरक्षा के एक नए युग में प्रवेश कर रहा है.

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