जर्मनी के 160 आईएस समर्थक अब भी लापता | दुनिया | DW | 24.06.2019
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दुनिया

जर्मनी के 160 आईएस समर्थक अब भी लापता

साल 2013 के बाद करीब एक हजार जर्मन इस्लामिक स्टेट में शामिल होने खाड़ी देशों की ओर गए. इनमें से एक-तिहाई वापस आ गए, कुछ युद्ध में मारे गए, कुछ जेलों में बंद है और कइयों का कुछ अता पता नहीं है.

Terrorprozess gegen Syrien-Rückkehrer in Frankfurt (picture-alliance/dpa/B. Roessler)

जर्मनी में ट्रायल झेलता आईएस सदस्य

जर्मन सरकार के पास ऐसे आतंकवादी समूह इस्लामिक स्टेट (आईएस) के समर्थक उन 160 जर्मन लोगों की कोई ताजा जानकारी नहीं है जो आईएस में शामिल होने के लिए सीरिया और इराक गए थे. जर्मन अखबार "द वेल्ट" ने अपनी एक रिपोर्ट में ये बताया है. गृह मंत्रालय की ओर से व्यापार-समर्थक जर्मन राजनीतिक दल 'फ्री डेमोक्रेट' (एफडीपी) के सवाल के जवाब में यह आंकड़ा पेश किया गया था. मंत्रालय ने कहा कि आईएस में शामिल अधिकतर जर्मन लड़ाके युद्धक्षेत्र में मारे गए. साथ ही कुछ लोग बच कर भागने और गायब होने में कामयाब रहे. 

मंत्रालय ने कहा, "ऐसा नहीं हो सकता कि वे आईएस लड़ाके जर्मनी में पहचाने नहीं जाएंगे. तमाम तरह के सुरक्षा बंदोबस्त होने के कारण उनका दोबारा प्रवेश करना काफी मुश्किल है."

योजना की कमी

एफडीपी की महासचिव लिंडा टॉयटेबेर्ग ने 'द वेल्ट' से कहा कि स्थिति चिंताजनक है, यूरोपीय सीमाओं में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं होने के कारण यह मानना मुश्किल है कि आईएस से आने वाले दोबारा देश में प्रवेश नहीं कर सकते.

टॉयटेबेर्ग ने आरोप लगाया कि सरकार के पास जर्मनी से निकले विदेशी लड़ाकों से निपटने के लिए ऐसी कोई योजना नहीं है, जिसके जरिए उन्हें उनके कामों के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सके. उन्होंने कहा, "यह युद्ध क्षेत्रों और विवादग्रस्त इलाकों से हिरासत में लिए गए जर्मनों पर भी लागू है साथ ही उन 200 पूर्व-आईएस समर्थकों पर भी जो जर्मनी में वापस आ गए हैं." उन्होंने कहा कि इस मसले को हल करने का एक तरीका यह भी हो सकता है कि विदेश में जांच करने और सजा देने की जर्मन प्रशासन की क्षमताओं को बढ़ाया जाए.

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, साल 2013 के बाद से तकरीबन 1,050 जर्मनों ने मध्य पूर्वी देशों की यात्रा की. इसमें से लगभग एक तिहाई लोग जर्मनी वापस लौट आए. इनमें से कइयों को पुनर्वास केंद्रों में भेजा गया तो कुछ के खिलाफ मुकदमा चल रहा है. तकरीबन 220 लोग सीरिया और इराक में मारे गए वहीं कई अब भी विदेशी जेलों में बंद हैं.

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एए/आरपी (डीपीए, केएनए)

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