जर्मनी का फैसला: चुनाव की राह पर | जर्मन चुनाव 2017 | DW | 12.06.2017
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जर्मन चुनाव

जर्मनी का फैसला: चुनाव की राह पर

छह शहर, दो रिपोर्टर और एक सवाल: 2017 में हो रहे जर्मन आम चुनावों के मद्देनजर लोगों के लिए कौन से मुद्दे सबसे अहम हैं? सूमी सोमासकांदा और नीना हाजे निकल रहे हैं इन सवाल के साथ चुनाव की राह पर.

इस साल होने वाले जर्मन चुनावों की डीडब्ल्यू की कवरेज को #GermanyDecides नाम दिया गया है. जर्मन लोग अपने देश को किस दिशा में ले जाना चाहते हैं? इसी सवाल का जवाब हमारी संवाददाता सुमी सोमासकांदा और नीना हाजे तलाशना चाहती हैं. इसके लिए वे जून के मध्य से पूरे जर्मनी के छह हफ्ते के रिपोर्टिंग दौरे पर निकलेंगी. हर हफ्ते वह किसी एक निर्धारित जगह पर किसी विशेष मुद्दे की पड़ताल करेंगी.

उनके इस सफर की शुरुआत 12 जून को बर्लिन से होगी. वे एक बस में सबसे पहले ड्रेसडेन के लिए निकलेंगी और उनके पास सवाल होगा "जर्मनी किधर जा रहा है?" वे ऑनलाइन यूजर्स के साथ एक संवाद शुरू करना चाहती हैं. यह संवाद उन मुद्दों पर होगा जो 24 सितंबर को होने वाले चुनाव का फैसला करेंगे. उन सवालों के जबाव भी दिए जाएंगे जो दुनिया जर्मनी के बारे में जानना चाहती है.

छह शहर, छह सवाल

"जर्मनी में धुर दक्षिणपंथी कितने मजबूत हैं?"- ड्रेसडेन और उसके आसपास के इलाके में यह पड़ताल होगी.

"जर्मनी में शरणार्थियों का क्या अब भी स्वागत है?" बवेरिया में वेगशाइड और अन्य जगहों पर इस सवाल का जवाब तलाशा जाएगा.

"क्या जर्मनी की अर्थव्यवस्था भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार है?" श्टुटगार्ट और उससे आसपास यह समझने की कोशिश होगी.

"क्या इस्लाम जर्मनी को बदल रहा है?" कोलोन और उसके आसपास यह पड़ताल की जाएगी.

"जर्मनी सामाजिक तौर पर कितना निष्पक्ष और समान है?" ब्रेमेन में इस सवाल का जवाब तलाशा जाएगा.

इस सफर का आखिरी पड़ाव राजधानी बर्लिन होगा. यहां किस विषय की पड़ताल होगी, इसका फैसला पूरे सफर के दौरान होगा, ताकि उस मुद्दे को बहस में लाया जाये जो अभी आकार ले रहा है.

Deutschland | Canaletto-Blick ähnliche Panorama-Sicht auf den historischen Altstadtkern (picture-alliance/CHROMORANGE/U. Gnoth)

12 जून से 16 जून तक सूमी और नीना ड्रेसडेन और आसपास के इलाके में होंगे

केंद्र में आम लोग

टीवी और ऑनलाइन के लिए होने वाली समूची रिपोर्टिंग के केंद्र में जर्मनी के आम लोग और उनकी रोजमर्रा की जिंदगी को सबसे ज्यादा प्रभावित करने वाले मुद्दे होंगे. राजनेताओं और विशेषज्ञों के साथ होने वाले इंटरव्यू उसे जरूरी संदर्भ देंगे.

हमारी संवाददाता इस चुनाव में जर्मनी के उन दूरदराज के इलाकों के लोगों की बात आप तक पहुंचायेंगी जो थोड़े कम जाने पहचाने हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव हो या फिर ब्रेक्जिट जनमत संग्रह, हाल की कई घटनाओं से साबित होता है कि मीडिया के लिए कितना जरूरी है कि वह बड़े शहरों से बाहर निकलकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों का मत और मूड सामने रखे. आम लोग ट्विटर, फेसबुक (लाइव) और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया मंचों की मदद से जर्मन और अंग्रेजी भाषाओं में रोजाना संवाददाताओं को फॉलो कर सकते हैं. छह अहम सवालों के जो जवाब मिलेंगे, उनका विवरण वेबसाइट और डीडब्ल्यू टीवी पर भी आपको पढ़ने और देखने को मिलेगा.
रिपोर्टर

सुमी सोमासकांदा प्रेजेंटर के तौर पर डीडब्ल्यू इंग्लिश प्रोग्राम के लिए 2011 से काम कर रही हैं. उन्हें दुनिया भर में ऑनलाइन और टीवी रिपोर्टर के तौर पर काम करने का अनुभव है. उनका जन्म न्यूयॉर्क के रोचेस्टर में हुआ और पढ़ाई शिकागो में हुई. सैन फ्रांसिस्को में काम करने के दौरान सोमासकांदा एक पत्रकार के तौर पर काम करने के लिए बॉश फेलोशिप पर जर्मनी आयीं और फिर कभी वापस नहीं गयीं. वह नौ साल से बर्लिन में रह रही हैं. वह कहती हैं, "8 करोड़ की आबादी वाले जर्मनी ने अपनी अविश्वसनीय विविधता से मुझे हमेशा हैरान किया है- सिर्फ भौगोलिक तौर पर नहीं, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और यहां तक कि भाषायी रूप से भी. मैं पूरे जर्मनी की इस यात्रा को लेकर रोमांचित हूं. उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम, हर जगह मतदाताओं से बात होगी."

Berlin Sehenswürdigkeiten Fernsehturm (picture-alliance/dpa/S. Stache)

रिपोर्टिंग दौरे का आथिरी पड़ाव17 से 21 जुलाई तक राजधानी बर्लिन होगी

जब उनसे पूछा गया कि यह यात्रा क्यों महत्वपूर्ण है तो सोमासकांदा ने जर्मन मतदाताओं में ध्रुवीकरण होने के संकेतों का जिक्र किया. वह कहती हैं, "सर्वेक्षणों को देखें तो जर्मनी इस साल होने वाले चुनाव से पहले विभाजित दिखता है, लेकिन मैं पता लगाना चाहती हूं कि क्या वाकई ऐसा है और अगर हां तो क्यों. मैं जानना चाहती हूं कि वे कौन से मुद्दे हैं जिनके आधार पर मतदाता सितंबर में अपना वोट देंगे या फिर वोट नहीं देंगे. यह चुनाव न सिर्फ राष्ट्रीय स्तर पर बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बहुत अहमियत रखता है और मुझे सड़कों पर जाकर रिपोर्टिंग करने का इससे बेहतर अवसर नहीं दिखाई देता."
नीना हाजे 2005 से डीडब्ल्यू इंग्लिश और डीडब्ल्यू जर्मन कार्यक्रम के साथ रिपोर्टर, एडिटर, प्रेजेंटर और ऑनलाइन पत्रकार के तौर पर काम कर रही हैं. उनका जन्म नॉर्थ राइन वेस्टफालिया में रुअर और म्युंस्टर इलाकों के बीच हुआ. उनके लिए सबसे अहम सवाल यह है कि जर्मनी की राजनीतिक व्यवस्था कितनी स्थिर है. वह कहती हैं, "हर कहीं राजनीतिक परिस्थितियां बदल रही हैं. पुराने गठबंधनों पर सवाल उठाये जा रहे हैं- ब्रेक्जिट और अमेरिकी चुनाव को ही लीजिये- और राजनेता व्यवस्था विरोधी संदेश के साथ चुनाव जीत रहे हैं. दूसरी तरफ, जर्मनी में पारंपरिक पार्टियां पश्चिमी समुदाय के मूल्यों का हिस्सा हैं."

विदेशी मीडिया ने अंगेला मैर्केल को "मुक्त दुनिया की नेता" का तमगा दिया है. उनके सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी मार्टिन शुल्त्स शायद जर्मन राजनीति में यूरोपीय संघ के सबसे रक्षक हैं. हाजे कहती हैं, "लेकिन आप एक के बाद एक जर्मन राज्यों में दक्षिणपंथी पार्टी एएफडी को भी सीटें जीतते देख रहे हैं. जर्मनी में असंतोष आखिर कितना बड़ा है? यह सबसे अच्छा मौका है जब जमीनी स्तर पर लोगों से बात कर इन सवालों के जबाव तलाशे जा सकते हैं."

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