जयपुर में मनाए गए ′जर्मन के सात दिन′ | मनोरंजन | DW | 31.03.2017
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मनोरंजन

जयपुर में मनाए गए 'जर्मन के सात दिन'

राजस्थान के जयपुर में एक हफ्ता जर्मन भाषा और संस्कृति के नाम रहा. जर्मन स्पीकर्स क्लब और 'ई' लैंग्वेज स्टूडियो नाम की दो संस्थाओं के मिलकर किये इस आयोजन का नाम दिया- "जीबन टागे फ्यूर डॉएच" यानि जर्मन भाषा के सात दिन.

जयपुर और राजस्थान के कई शहरों के जर्मन भाषा प्रेमी सात दिन तक आयोजित हुए विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल हुए जिनमें बड़ी संख्या जर्मन भाषा सीख रहे विद्यार्थियों की थी. उद्देश्य था कि न सिर्फ जर्मन भाषा को जाना और समझा जाए वरन उस की संस्कृति और सभ्यता को भी पहचाना जाए.

आयोजकों में शामिल जर्मन अध्यापक देवकरण सैनी ने बताया, "कोई भी भाषा सीखने और सिखाने में मजा तब आता है जब नए नए प्रयोग किये जाएं. यदि भाषा सीखने वाले उस भाषा को बोलने वाले मूल निवासियों और उनकी कृतियों जैसे उनके नाटकों, फिल्मों और किताबों के संपर्क में लाए जाएं तो विदेशी भाषा भी देश की भाषा लगने लगती है."

रामायण और महाभारत का मंचन जर्मन में

कार्यक्रम में सबसे ज्यादा तालियां बटोरी जर्मन भाषा में खेले गए भारत के कालजयी महाकाव्यों रामायण और महाभारत के प्रसंगों ने. राजस्थान में जर्मन भाषा सीख रहे विद्यार्थियों ने इसे मंचित किया. भारतीय किरदारों को धारा प्रवाह जर्मन बोलते देखना कमाल की अनुभूति रही.

रामायण से 'भरत मिलाप' और महाभारत से 'यक्ष प्रश्न' के प्रसंग लिए गए थे, जिन्हें अत्यंत दक्षता के साथ जर्मन भाषा में अनुवादित किया गया था. राम की भूमिका निभाने वाले हितेश शर्मा को जीवन में पहली बार किसी नाटक में काम करने का मौका मिला था, जिसका उन्होंने जी भर के आनंद लिया. सीता बनी हर्षिता जांगिड़ यूं तो पहले भी कई भूमिकाएं अभिनीत कर चुकी हैं पर जर्मन भाषा में की गयी संवाद अदायगी पहला अनुभव था.

यही इन रोचक प्रस्तुतियों ने प्रमाणित किया कि कैसे संवाद की माध्यम भाषाओं को अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से नहीं बांधा जा सकता.

जर्मन भाषा में डब हिंदी फिल्में

सात दिन चले इस समारोह में 'जर्मन फिल्म महोत्सव' भी आयोजित किया गया जिसमें कई फिल्में दिखाई गयीं. मशहूर हिंदी फिल्मों 'कुछ कुछ होता है' और 'थ्री इडियट्स' में हिंदी फिल्म अभिनेताओं को जर्मन बोलते देखना दर्शकों के लिए बेहद अलग अनुभव रहा. इसका सबसे अधिक आनंद लिया जर्मन भाषा के नये विद्यार्थियों ने, जो अपने चहेते फिल्म कलाकारों को इतनी अच्छी जर्मन बोलते देख खासे प्रभावित थे.

जर्मन फिल्मों में 'गुड बाय लेनिन', 'एमिल उंड डी डिटेक्टिव', 'उंटरगांग', 'डास लेबेन डेयर आंडरेन', 'एयर ईस्ट वीडर डा' और 'चार्ली उंट लुइज़' को बहुत दाद मिली.

जर्मन फॉर डॉक्टर्स एंड इंजिनीयर्स

समारोह में डॉक्टरों और इंजीनियरों के लिए आयोजित विशेष कार्यशाला को संबोधित किया हैदराबाद में ओस्मानिया यूनिवर्सिटी में जर्मन भाषा विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर जेवीडी मूर्ति ने. कार्यशाला में उच्च अध्ययन के लिए जर्मनी जाने के इच्छुक डॉक्टरों और इंजीनियरों ने विशेष रूचि दिखाई और भाषा संबंधी अपनी कई शंकाओं का समाधान पाया. कार्यशाला में अभियांत्रिकी और चिकित्सा से सम्बंधित कई तकनीकी पहलुओं को जर्मन भाषा में तजुर्मा कर समझाया गया.

जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में कार्यरत शल्य चिकित्सक डॉक्टर राशिम कटारिया का कहना था कि इस विषय को सुनने के बाद जर्मनी में उनकी रूचि बढ़ गयी है. उनका कहना था कि "कार्यशाला में ऑन दी स्पॉट किसी भी विषय पर जर्मन में बोलने का तरीका आज़माना उन्हें बहुत अच्छा लगा और वे भी इसी तरह धाराप्रवाह जर्मन बोलने की इच्छा रखते हैं." एक्स रे और डायमलर जैसे शब्द किस तरह से जर्मन भाषा से जुड़े हैं पर पर भी कार्यशाला में काफी चर्चा हुई.

गुलाबी नगरी की जर्मन गाइड ने कराई सैर

समारोह में शामिल कमोबेश हर शख्स ने यूं तो गुलाबी नगर 'जयपुर' के ऐतिहासिक स्थान कई बार देखे थे लेकिन इस बार की सैर अलग रही. जर्मन गाइड जय सिंह ने जब आमेर और नाहरगढ़ सरीखे जयपुर के ऐतिहासिक किलों का वर्णन जब जर्मन भाषा में अपने खास अंदाज़ में किया तो हर किसी को शहर का इतिहास कुछ नया सा लगा. जयपुर में बहुत बड़ी संख्या में जर्मन पर्यटक आते हैं और उनकी रूचि और उनके द्धारा क्या सवाल किये जाते हैं, इस बारे में उन्होंने खासी जानकारी दी.

बर्लिन से स्काइप से जुड़े जर्मन एक्सपर्स 

बर्लिन के जर्मन भाषा के विशेषज्ञ आंद्रेआस लेम्ब्के ने विद्यार्थियों से स्काइप के माध्यम से ऑनलाइन संवाद किया और उनके सवालों के जवाब दिये. उन्होंने 'जर्मनी की संस्कृति और हमारी समझ' विषय पर विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया और उन्हें अच्छी जर्मन बोले जाने के तरीकों से अवगत कराया. जर्मन भाषा प्रेमियों को सीधे जर्मनी से जुड़ना बहुत अच्छा लगा और उन्होंने इसे खूब एन्जॉय किया.

कुल मिलाकर यह सप्ताह जर्मन प्रेमियों के लिए आनंददायक रहा. गोएथे सोसाइटी ऑफ इंडिया की राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रोफेसर डॉक्टर पवन सुराना ने आगे भी इस तरह के कार्यक्रम होते रहने के महत्व पर बल दिया.

जयपुर से जसविंदर सहगल की रिपोर्ट. 

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