जब चार ग्रह एक सीध में आ जाते हैं तो शुक्र और बृहस्पति ‘टकराते’ हैं | विज्ञान | DW | 29.04.2022

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विज्ञान

जब चार ग्रह एक सीध में आ जाते हैं तो शुक्र और बृहस्पति ‘टकराते’ हैं

शुक्र और बृहस्पति वास्तविक रूप से टकराने वाले नहीं हैं, लेकिन 30 अप्रैल को आसमान में कुछ ऐसा ही नजारा दिखेगा. सौरमंडल के दो सबसे चमकीले ग्रह मंगल और शनि के साथ एक सीध में आने वाले हैं.

चार ग्रह एक सीध में आयेंगे

चार ग्रह एक सीध में आयेंगे

ग्रह और तारे अक्सर संरेखित होते हैं यानी एक सीध में आ जाते हैं. हालांकि अप्रैल 2022 एक दुर्लभ संयोग का साक्षी बन रहा है जब सौर मंडल में हमारे चार निकटतम पड़ोसी ग्रह- शुक्र, मंगल, बृहस्पति और शनि लगभग पूरी तरह से एक सीध में होंगे और बिना दूरबीन के नंगी आंखों से भी इन्हें देखा जा सकेगा.

इसके अलावा एक और अद्भुत नजारा देखने को मिलेगा जब 30 अप्रैल और 1 मई की सुबह, शुक्र और बृहस्पति आपस में टकराते हुए दिखाई देंगे. इस घटना को अल्ट्राक्लोज कंजंक्शन कहते हैं.

आकाश के दो सबसे चमकीले ग्रह- शुक्र और बृहस्पति वास्तव में एक दूसरे से बहुत दूर होंगे, लेकिन इस दौरान शुक्र ग्रह कुछ इस तरह दिखेगा जैसे वह या तो बृहस्पति को ढक रहा है या फिर उसकी ओर बढ़ रहा है. हालांकि यह स्थिति इस बात पर भी निर्भर करेगी कि आप इस दृश्य को कितनी दूरी से यानी पृथ्वी के किस हिस्से से देख रहे हैं.

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बृहस्पति ग्रह सबसे चमकदार ग्रहों में एक है

ये दोनों इतने भी करीब नहीं होंगे जितने कि दिसंबर 2020 में बृहस्पति और शनि के पास आने का संयोग बना था. खगोलीय घटनाओं पर नजर रखने वाले नासा के वैज्ञानिकों का कहना है कि फिर भी यह "वास्तव में प्रभावशाली होगा और सुबह के आकाश को रोमांचक बना देगा.”

मंगल और शनि अप्रैल की शुरुआत में भी एक दूसरे के बहुत निकट आए थे.

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संयोजन या कंजंक्शन वास्तव में है क्या?

संयोजन की स्थिति तब बनती है जब दो ग्रह, या एक ग्रह और चंद्रमा या फिर एक ग्रह और एक तारा पृथ्वी से देखने पर एक साथ और काफी नजदीक दिखाई देते हैं.

हमारे सौर मंडल में ग्रहों की ऐसा अक्सर होता है क्योंकि ग्रह सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करते हैं और ग्रहण की स्थितियां भी इसी से बनती हैं.

बृहस्पति की शुक्र से टक्कर होते दिखेगा

बृहस्पति की शुक्र से टक्कर होते दिखेगा

हालांकि नक्षत्र अलग-अलग होते हैं. यह सब इस बात पर निर्भर करता है कि ग्रह एक दूसरे के सापेक्ष कितनी तेज या धीमी गति से सूर्य की परिक्रमा करते हैं.

शुक्र और बृहस्पति ग्रहों की संयोजन सामान्य बात है जो वर्ष में लगभग एक बार होती ही है.

भले ही ये घटनाएं नियमित हों, और नासा का कहना है कि इन संयोजनों का ‘कोई खास खगोलीय महत्व नहीं है', फिर भी ये घटनाएं एक खूबसूरत दृश्य का निर्माण तो करती ही हैं.

क्या मैं दुनिया में कहीं से भी संयोजन देख सकता हूं?

छोटा सा जवाब है- ‘हां'. लेकिन यह सब परिप्रेक्ष्य पर निर्भर करता है. जैसे, यदि आप उत्तरी गोलार्ध में हैं, तो चार ग्रह रात के आकाश में एक विकर्ण रेखा के रूप में दिखाई देते हैं जबकि दक्षिणी गोलार्ध में वे एक ऊर्ध्वाधर या सीधी रेखा के रूप में दिखाई देंगे.

शुक्र, सूर्य की ओर से दूसरा ग्रह है. इसलिए इसकी कक्षा पृथ्वी की तुलना में सूर्य के अधिक निकट है. बृहस्पति सूर्य से पांचवां ग्रह है, इसलिए इसकी कक्षा काफी दूर है.

नासा के मुताबिक, "निकटता एक भ्रम है, जो केवल इसलिए होता है क्योंकि पृथ्वी, शुक्र और बृहस्पति लगभग एक ही रेखा पर होते हैं.”

उदाहरण के लिए, साल 2020 के उस संयोग को देखें जब बृहस्पति और शनि बहुत करीब दिखाई दिए थे, लेकिन वे तब भी करीब 80 करोड़ किलोमीटर दूर थे.

30 अप्रैल को आकाश में जबर्दस्त नजारा दिखेगा

30 अप्रैल को आकाश में जबर्दस्त नजारा दिखेगा

इन चार ग्रहों की परेड के बारे में क्या खास है?

यह देखते हुए कि चार ग्रहों का संयोजन साल में लगभग एक बार हो सकता है, आप कह सकते हैं कि इसमें खास क्या है? लेकिन यह घटना अद्वितीय है क्योंकि यह प्रभावी रूप से दो ग्रहों की संयोजन है जो लगभग एक ही समय में हो रही है और जिसमें एक बहुत बड़ा चार-ग्रहों का तारामंडल बन रहा है.

कुछ लोग इसे लघु ग्रह परेड कहते हैं. यह कोई वैज्ञानिक शब्द नहीं है लेकिन यह इस बात की बड़े करीने से व्याख्या करता है कि जब दो से अधिक ग्रह रात के आकाश के एक ही हिस्से में एक सीध में आते हैं, तो क्या होता है.

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बड़े संयोजन और संरेखण थोड़े दुर्लभ हैं. लगभग हर 19 साल में पांच ग्रह एक सीध में आते हैं और कुछ लोग कहते हैं कि सभी आठ ग्रह हर 170 साल में एक बार एक सीध में आते हैं. लेकिन यह सब आपकी परिभाषाओं पर निर्भर करता है, खासकर इस पर कि ग्रह पूरी तरह से एक सीध में कैसे आते हैं. 

कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि पिछली बार 1,000 साल पहले आठ ग्रह पूरी तरह एक सीध में थे. हालांकि कई लोगों का कहना है कि ऐसा कभी नहीं होता है क्योंकि प्रत्येक ग्रह अलग अलग मार्गों पर परिक्रमा करते हैं. उनके मुताबिक, आप केवल फिल्मों में या पोस्टकार्ड पर सौर मंडल के सचित्र मानचित्रों पर ही उन्हें एक सीध में देखते हैं, वास्तविक रूप में नहीं.

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