चूहे को बहादुरी के लिए मिला गोल्ड मेडल | दुनिया | DW | 25.09.2020
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दुनिया

चूहे को बहादुरी के लिए मिला गोल्ड मेडल

ब्रिटेन की एक चैरिटी संस्था ने अफ्रीकी नस्ल के एक विशाल चूहे को बहादुरी के लिए गोल्ड मेडल से नवाजा है. इस चूहे ने कंबोडिया में बारूंदी सुरंगें हटाने में मदद की थी. वह इस पुरस्कार को जीतने वाला पहला चूहा है.

इस अफ्रीकी जाइंट पाउच्ड चूहे का नाम मागावा है और वह सात साल का है. उसने सूंघकर 39 बारूदी सुरंगों का पता लगाया. इसके अलावा उसने 28 दूसरे ऐसे गोला बारूद का भी पता लगाया जो फटे नहीं थे. शुक्रवार को ब्रिटेन की एक चैरिटी संस्था पीडीएसए ने इस चूहे को सम्मानित किया.

मागावा ने दक्षिण पूर्व एशियाई देश कंबोडिया में 15 लाख वर्ग फीट के इलाके को बारूदी सुरंगों से मुक्त बनाने में मदद की. इस जगह की तुलना आप फुटबॉल की 20 पिचों से कर सकते हैं. यह बारूदी सुरंगें 1970 और 1980 के दशक की थीं जब कंबोडियो में बर्बर गृह युद्ध छिड़ा था.

कंबोडियो के माइन एक्शन सेंटर (सीएमएसी) का कहना है कि अब भी 60 लाख वर्ग फीट का इलाका ऐसा बचा है जिसका पता लगाया जाना बाकी है. बारूदी सुरंग हटाने के लिए काम कर रहे गैर सरकारी संगठन हालो ट्रस्ट का कहना है कि इन बारूंदी सुरंगों के कारण 1979 से अब तक 64 हजार लोग मारे जा चुके हैं जबकि 25 हजार से ज्यादा अपंग हुए हैं.

ये भी पढ़िए: असल में कैसे होते हैं चूहे

मागावानेकैसेपतालगाया

चूहों को सिखाया जाता है कि विस्फोटकों में कैसे रासायनिक तत्वों को पता लगाना है और बेकार पड़ी धातु को अनदेखा करना है. इसका मतलब है कि वे जल्दी से बारूदी सुरंगों का पता लगा सकते हैं. एक बार उन्हें विस्फोटक मिल जाए, तो फिर वे अपने इंसानी साथियों को उसके बारे में सचेत करते हैं. उनकी इस ट्रेनिंग में एक साल का समय लगता है. 

मागावा का वजन सिर्फ 1.2 किलो है और वह 70 सेंटीमीटर लंबा है. इसका मतलब है कि उसमें इतना वजन नहीं है कि वह बारूदी सुरंगों के ऊपर से गुजरे तो वे फट जाए. वह आधे घंटे में टेनिस कोर्ट के बराबर जगह की तलाशी ले सकता है. इंसानों को इतने बड़े इलाके को मेटल डिटेक्टरों के सहारे साफ करने के लिए चार दिन चाहिए.

चूहे को बारूदी सुरंग का पता लगाने की ट्रेनिंग

इन चूहों की ट्रेनिंग में एक साल लगता है

पीडीएसए के महानिदेशक जैन मैकलोगलिन ने ब्रिटेन के प्रेस एसोसिएशन के साथ बातचीत में कहा, "मागावा ने उन पुरुषों, महिलाओं और बच्चों की जिंदगी बचाई है जो इन बारूदी सुरंगों से प्रभावित होते हैं." 

सात साल की उम्र पूरी करने के बाद अब मागावा अपने रिटायरमेंट के करीब है. कैलिफोर्निया के सैन डिएगो चिड़ियाघर का कहना है कि जाइंट अफ्रीकी पाउच्ड चूहों की औसत उम्र आठ साल होती है.

रिपोर्ट: रॉबर्ट टर्नर

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