चुनौती है भारत में साफ पानी की सप्लाई | दुनिया | DW | 22.03.2016
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दुनिया

चुनौती है भारत में साफ पानी की सप्लाई

जल संकट ने भारत के कई राज्यों को अपनी चपेट में ले रखा है. जमीन के नीचे पानी का स्तर लगातार नीचे जा रहा है. एक अनुमान के मुताबिक भारत में लगभग आठ करोड़ लोगों को पीने का साफ नहीं मिल रहा है.

सूखे की गंभीर स्थिति का सामना कर रहे महारष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र और अन्य राज्यों में पानी को लेकर खून खराबे की नौबत तक आ जाती है. गांवों की तो छोड़ दें, देश के कई शहरों में लोगों को पानी की किल्लत का सामना करना पड़ता है. पानी को लेकर आये दिन लड़ाई झगड़े की खबरें भी आती रहती हैं. लेकिन महाराष्ट्र के लातूर में पानी का संकट इस बार इतना गहरा गया है कि प्रशासन को यहां जल स्रोतों के आसपास धारा 144 का प्रयोग करना पड़ा है.

पानी की सप्लाई को लेकर हुए हिंसक विवाद और झड़पों के बाद प्रशासन ने ऐहतियात के तौर पर यह कदम उठाया है. जिले के कलेक्टर पांडुरंग पोले के मुताबिक लातूर शहर और आसपास के इलाको में पानी को लेकर हिंसक झड़पों की आशंका को देखते हुए यह कदम उठाया गया है. प्रशासन ने ऐसे 20 पानी वाली जगहों को चुना है, जहां पर एक समय में 5 लोग एक साथ जमा नहीं हो सकते. यह आदेश 31 मई तक के लिए लागू है.

बिगड़ सकते हैं हालात

हाल के दिनों में यह अपनी तरह का पहला मामला है जब पानी पर झगड़े और खून खराबे की आशंका के कारण धारा 144 लगाई गई हो. अभी तक पानी संकट के कारण सिर्फ देशों के बीच विवाद की संभावना व्यक्त की जा रही है, लेकिन कई देशों में प्रांतों के बीच जल विवाद भी आम हो गया है. आने वाले दिनों में लातूर के अलावा दूसरी जगह भी “जल संघर्ष” से निपटने में कानून का सहारा लेना पर सकता है.

लातूर की तरह देश के कई छोटे बड़े शहरों में पानी की प्यास लड़ाई की वजह बन रही है. इसी महीने उत्तर प्रदेश के बदांयू गांव में पानी को लेकर रिश्तेदारों के बीच हुए झड़प में एक 35 साल के व्यक्ति को अपनी जान गवांनी पड़ी. 11 मार्च को हुई इस घटना में मृतक का परिवार एक सरकारी नल से अपनी बाल्टी पहले भरने की कोशिश कर रहा था. अंतरराष्ट्रीय जल दिवस के ठीक दो दिन पहले मध्य प्रदेश के रायसेन में भी पानी के लिए खूनी संघर्ष हुआ. दो पक्षों में पानी को लेकर विवाद हो गया. जिसके बाद दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर हमला कर दिया. इस घटना में 3 महिलाओं समेत 8 लोग घायल हो गए.

घटता भूजल और पलायन

बीते दशकों में भूजल के स्तर में चिंताजनक गिरावट आयी है. भूजल का स्तर गिरते-गिरते नौ राज्यों में खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है. ऐसे राज्यों में नब्बे फीसद भूजल का दोहन हो चुका है और उनके पुनर्भरण में काफी गिरावट आई है. केंद्रीय जल आयोग द्वारा 2014 में जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार देश के अधिकांश बड़े जलाशयों का जल-स्तर वर्ष 2013 के मुकाबले कम पाया गया था. आयोग के अनुसार देश के बारह राज्यों हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, पश्चिम बंगाल, झारखंड, त्रिपुरा, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु के जलाशयों के जल-स्तर में काफी गिरावट दर्ज की गई थी. 2015 में भी लगभग यही स्थिति रही.

सूखा और पानी की कमी ने पलायन को भी बढ़ावा दिया है. मराठवाड़ा और विदर्भ से लाखों लोग पलायन कर चुके हैं. महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त इलाकों में लोग पानी की कमी की वजह से एक से ज़्यादा शादियां कर रहे हैं. जब एक पत्नी, बच्चे और घर संभालती है तो दूसरी पत्नी सिर्फ पानी लाने का काम करती है, क्योंकि महिलाओं को अपने घरों से कई किलोमीटर तक पैदल जाकर पानी लाना पड़ता है. राजधानी दिल्ली तक में सभी को नल से पानी नहीं मिल रहा है, जिसकी वजह से जल माफिया का उदय हो गया है. वे किल्लत का सामना कर रहे लोगों को महंगे में पानी बेचते हैं.

उपाय

जल-जन जोड़ो अभियान के संयोजक संजय सिंह का कहना है कि जल संकट को गंभीरता से नहीं लिया गया तो 2030 तक देश की 40 फीसदी आबादी पानी के लिए तरसेगी. संयुक्त राष्ट्र के ताजा आंकड़ों के अनुसार 2025 तक दुनिया की 1.8 अरब आबादी पीने के पानी की कमी का संकट झेलेगी. यूरोपीय संघ का कहना है कि साफ पानी पाना सिर्फ बेसिक मौलिक अधिकार ही नहीं है बल्कि यह सुरक्षा का मामला बन गया है. विश्व संस्था की एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया की जरूरतें पूरी करने के लिए पर्याप्त पानी है, लेकिन उसके सही प्रबंधन की जरूरत है. भारत के संदर्भ में भी यही बात कही जा सकती है.

जल संरक्षण कार्यकर्ता और विशेषज्ञ पर्यावरण (सुरक्षा) अधिनियम को कड़ाई से लागू करने की मांग कर रहे हैं. इसके तहत भूमिगत जल के अनियंत्रित दोहन पर अंकुश लगाने का प्रावधान है. छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह वर्षा के पानी के संरक्षण को बढ़ावा देकर घटते जल स्तर से निपटने की बात कहते हैं. वर्षा जल संचय के प्रति जागरूकता बढ़ाकर समस्या पर कुछ हद तक काबू पाया जा सकेगा.

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