चुनौतियों और अपमान से भरी बाइसेक्सुअल लोगों की जिंदगी | दुनिया | DW | 05.07.2019
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दुनिया

चुनौतियों और अपमान से भरी बाइसेक्सुअल लोगों की जिंदगी

बाइसेक्सुअल लोगों की समस्याओं को एलजीबीटी समुदाय भी अपना नहीं समझता. पेरिस में रहने वाली बाइसेक्सुअल साउदे राद बताती हैं कि कैसे ईरान में उनके साथ हिंसा और जुल्म हुए लेकिन साथ देने के बजाय लोगों ने उन्हीं पर सवाल उठाए.

जब साउदे राद ने अपने साथ हुई घरेलू हिंसा के बारे में ऑनलाइन लिखा तो उन्हें लगा कि कई और लोग भी अपनी पीड़ा खुलकर बताएंगे. लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. राद एक बाइसेक्सुअल है. लोगों का साथ मिलने की बजाय उन्हें अपमानित होना पड़ा. यहां तक कि फेसबुक यूजर्स ने राद के ईरानी पति द्वारा की गई हिंसा को भी नजरअंदाज कर दिया. लोगों ने ये तक कहा कि उसका पति सेक्सुअल ओरिएंटेशन को लेकर गुस्सा रहा होगा. कुछ ने तो पति की हिंसा को प्यार जताने का तरीका बता डाला.

38 साल की राद आज पेरिस में रहती हैं. बीते वक्त को याद करते हुए बताती हैं, "सोशल मीडिया पर लोग घरेलू हिंसा को वैध कह रहे थे जिसकी वजह से मुझे अस्पताल ले जाया गया. शारीरिक और मानसिक कष्टों का का सामना करना पड़ा."

एलजीबीटी समुदाय के लिए ईरान दुनिया के सबसे खराब देशों में से एक है. ग्लोबल एलजीबीटी अधिकार समूह (आईएलजीए) के अनुसार, इस्लामिक दंड संहिता में समलैंगिक संबंध के लिए मृत्युदंड और समलैंगिकों के लिए 100 कोड़े की सजा तक शामिल हैं.

राद ने ब्रिटेन में रहने वाली ईरानियन जैनब पाइकम्बारजादेह के साथ मिलकर 2015 में बाइसेक्सुअलिटी को लेकर फारसी भाषा में  पहली वेबसाइट 'डॉजेन्सगारा' शुरू की.

एलजीबीटी समुदाय के भीतर भी बाइसेक्सुअल लोगों के साथ भेदभाव देखने को मिलता है. बाईसेक्सुअल को नजरअंदाज और भेदभाव करने वालों की चर्चा करते हुए राद कहती हैं, "ईरानी प्रवासियों में एलजीबीटी कार्यकर्ताओं के बीच काफी दूरियां है. सभी इसे एक कलंक मानते हैं." वे यह नहीं जानते ​कि हम क्या चाहते हैं. वे हमें लालची समझते हैं. वे हमारे समुदाय को गाली देते हैं. हम वास्तव में एलजीबीटी कार्यकर्ताओं को ऐसा सोचने नहीं दे सकते. बाइसेक्सुअलिटी एक वैध और मौजूदा सेक्सुअलिटी है."

छिपी हुई जिंदगी

दो एक्टिविस्टों ने सेक्स, जेंडर और सेक्सुअल ओरिएंटेशन के बारे में लोगों को समझाने के लिए फारसी भाषा में वेबसाइट शुरू की. दुनिया में करीब 11 करोड़ लोग फारसी भाषा बोलते हैं.  20 साल की उम्र में डॉजेन्सगारा शब्द की खोज करने वाली राद बताती हैं, "वहां इससे जुड़ी कोई जानकारी नहीं थी." इस साइट में लंदन स्थित एलजीबीटी ऑनलाइन स्टेशन रेडियो रंगीनकमन के साथ बनाए गए यूटयूब वीडियो, पॉडकास्ट और दुनिया भर के बाइसेक्सुअल ईरानियों के बारे में लिखित कहानियां मिलती हैं.

वेबसाइट में अमेरिका की एक समलैंगिक ईरानी नीमा निया द्वारा ईरान के एलजीबीटी+ समुदाय के छिपे हुए जीवन के बारे में लिखित एक कॉमिक "वन ऑफ अस" मिलता है. साइट पर मैक्सिकी कलाकार फ्रिदा काहलो और अमेरिकी कवि वाल्ट व्हाइटमैन जैसे प्रसिद्ध बाइसेक्सुअल लोगों के प्रोफाइल भी हैं. लंदन स्थित मानवाधिकार समूह स्मॉल मीडिया के एक सर्वे मुताबिक ईरान में गे और लेस्बियन लोगों की तुलना में बाइसेक्सुअल लोग कम सामने आते हैं.  स्टडीज के मुताबिक बाइसेक्सुअल लोग, गे, लेस्बियन और अन्य लोगों की तुलना में मानसिक और स्वास्थ्य समस्याओं से अधिक घिरे होते हैं, जो सीधा-सीधा उनके साथ होने वाले दोहरे भेदभाव से जुड़ा है.

सोशल मीडिया पर लोकप्रियता

डॉजेन्सगारा के इंस्टाग्राम पर 8300 फॉलोअर हैं. राद इस बात का खुलासा नहीं करती हैं कि साइट पर कितने लोग आते हैं. साइट में ईरान में प्रतिबंधित है और सिर्फ और वीपीएन या अन्य तरीकों से यूजर्स साइट तक पहुंच पाते हैं.

डॉजेन्सगारा वेबसाइट को देखने वाले में से एक 25 वर्षीय फरीमन काशानी हैं. इन्हें ईरान में एक महिला सहपाठी के साथ एक लड़के की तरह व्यवहार करने का आरोप में 12 मनोवैज्ञानिकों के पास ले जाया गया था. एक मनोवैज्ञानिक ने कहा लड़की की तरह पली-बढ़ी 20 साल की काशानी एक ट्रांसजेंडर है और लिंग बदलने के लिए उन्हें सर्जरी करानी होगी.

लेकिन काशानी को सर्जरी के लिए पुरुष होने से जुड़े दस्तावेज चाहिए थे और इसके मां-बाप की अनुमति जरूरी थी. मकान मालिक द्वारा यौन शोषण किए जाने और तेहरान विश्वविद्यालय से बाहर निकाल जाने के बाद 2016 में काशानी तुर्की भाग गई.

वे कहती हैं, "मैं इसे और बर्दाश्त नहीं कर सकती थी. मैं आत्महत्या करना चाहती थी." 

डॉजेन्सगारा देखने के बाद काशानी को पता चला कि वे ना तो महिला हैं और न ही पुरुष. साथ ही उन्हें महसूस हुआ कि सर्जरी आवश्यक नहीं है.  काशानी बताती हैं, "मुझे पता चला कि मुझे पुरुष या महिला के रूप में फिट होने की आवश्यकता नहीं है. मैं खुद को टैग नहीं करती, जो भी मुझे अच्छा लगता है मुझे उससे प्यार हो जाता है."

पेशे से कंप्यूटर प्रोग्रामर काशानी को तुर्की में शरणार्थी का दर्जा मिला हुआ है. यहां उन्हें एक अन्य ईरानी शरणार्थी से प्यार हो गया. वे कहती हैं, "मुझे लगता है कि मेरी लव लाइफ और सेक्स लाइफ बिल्कुल सही है. मैं ईरान में भी यह नहीं कह सकती थी. हम साथ नहीं रह सकते थे."

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आरआर/एए (थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन)

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