चीन में क्रिकेट | खेल | DW | 21.12.2013
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खेल

चीन में क्रिकेट

सफेद लिबास में चीनी क्रिकेट खिलाड़ी बीजिंग में अभ्यास. देश के सबसे बड़े मुकाबले राष्ट्रीय यूनिवर्सिटी टूर्नामेंट का आयोजन बेसबॉल के एक मैदान में किया गया.

स्टंप प्लास्टिक के बनाए गए और ऑरेंज रंग के डिस्क से बाउंड्री की लकीर खींची गई. यह सब इस बात का संकेत देता है कि सरकार इस खेल को लेकर बहुत संजीदा नहीं है. विशाल देश में सिर्फ दो दर्जन टीमें क्रिकेट खेलती हैं, जबकि कुछ विदेशी खिलाड़ी अपने दम पर इस खेल को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं.

उस पार है जुनून

हिमालय के उस पार भारत है, जहां क्रिकेट सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि जुनून है. भारत विश्व चैंपियन है और चोटी की टीमें में शामिल है. चीन का स्थान एशिया में नीचे से तीसरा है. उसके नीचे सिर्फ म्यांमार और ब्रुनेई की क्रिकेट टीमें हैं.

पाकिस्तान के पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी राशिद खान अब चीन की राष्ट्रीय टीम को कोचिंग देते हैं. उनका कहना है, "जब मैं यहां आया, तो हर कोई बल्ले को वैसे पकड़ता था, जैसे बेसबॉल के बैट को पकड़ते हैं." चीन की यूनिवर्सिटी में जो मुकाबला चल रहा है, वहां राशिद खान जैसे इक्का दुक्का खिलाड़ी ही मौजूद हैं.

150 साल का इतिहास

उनका कहना है, "अब वे अच्छी क्रिकेट खेल लेते हैं. कम से कम गेंदबाज तो काफी तेज गेंद फेंक रहे हैं." चीन के रिकॉर्ड के मुताबिक वहां पहला क्रिकेट मैच 1858 में खेला गया था, जब ब्रिटिश नौसेना के एचएमएस के सिपाही शंघाई की टीम से भिड़े थे.

ब्रिटेन ने इस खेल को ऑस्ट्रेलिया से लेकर कैरिबियाई देशों तक फैलाया, जबकि चीन के पड़ोसी देश हांग कांग में भी यह चल गया. हांग कांग अगले साल ट्वेन्टी 20 विश्प कप के लिए क्वालीफाई भी कर गया. लेकिन विशाल देश चीन में क्रिकेट का प्रसार नहीं हो पाया.

हाल में जब फुटबॉल और बास्केटबॉल चीन में लोकप्रिय हुआ है, तो रग्बी और अमेरिकी फुटबॉल में भी चीन में खुद को आजमाना चाहता है. यहां का बड़ा बाजार उन्हें अपनी ओर आकर्षित कर रहा है. मलेशिया में स्थित एशियाई क्रिकेट काउंसिल चीन की राष्ट्रीय टीम को प्रायोजित करता है. उत्तरपूर्वी शेनयांग शहर में यूनिवर्सिटी स्तर पर ट्रेनिंग देने वाले ब्रिटेन के मैट स्मिथ कहते हैं, "हम क्रिकेट की एक संस्कृति बनाने की कोशिश कर रहे हैं." हालांकि आंकड़ों के मुताबिक करीब 1.35 अरब आबादी वाले देश में सिर्फ 68 रजिस्टर टीमें हैं.

नहीं मिलते सामान

चीन में क्रिकेट के बल्ले और बॉल आसानी से नहीं मिलते. स्मिथ इसे अपने साथ लाए हैं. लेकिन उनके लिए सबसे बड़ी मुश्किल क्रिकेट की भाषा को चीनी में समझाना है. उनकी गुगली फेंकने की मांग पर कोई ऑफ स्पिन कर रहा है, तो कोई चाइनामैन को समझ ही नहीं पा रहा है. हालांकि क्रिकेट का सबसे लोकप्रिय शब्द "हाउजदैट" यहां भी सब समझते हैं. स्मिथ ने पिछले यहां के एक बल्लेबाज जियांग शुयाओ को इंग्लैंड भेजने में कामयाबी हासिल की थी, जो चीन के इकलौते क्रिकेट खिलाड़ी हैं, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय हालात में खेलने का अनुभव है. स्मिथ का कहना है, "अगर हमें बेहतर करना है तो हमें बाहर जाकर खेलना होगा." उनका कहना है कि अगर चीन में अच्छा करेगा, तो यह ओलंपिक का खेल भी बन सकता है.

हालांकि चीन में खेल पर सरकार का कब्जा है और ज्यादा पैसे उन खिलाड़ियों को मिलते हैं, जिनसे ओलंपिक में पदक की उम्मीद होती है. देश का एकमात्र क्रिकेट स्टेडियम 2010 में ग्वांगझू में बना था, जब एशियाई खेलों में क्रिकेट को शामिल किया गया था. चीन के पुरुष टीम को लगातार हार का सामना करना पड़ा है, हालांकि महिला टीम ने बेहतर प्रदर्शन किया है. उसने मलेशिया और थाइलैंड को हराया है.

हालांकि क्रिकेट खेलने वाले बहुत उत्साहित नहीं हैं. झांग यूफेई किसी अंतरराष्ट्रीय मैच में चीन के लिए शतक बनाने वाले पहले क्रिकेटर हैं. लेकिन 21 की उम्र में ही संन्यास लेना चाहते हैं. उनका कहना है, "क्रिकेट से आप रोजी रोटी नहीं कमा सकते."

एजेए/एमजी (एएफपी)

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